ठंड में बढ़ता हाइपोथर्मिया का खतरा: इन 12 संकेतों से पहचानें और बचाव के लिए बरतें 11 जरूरी सावधानियां

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सर्दियों का मौसम अपने साथ खूबसूरत नजारों के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी लेकर आता है। खासकर ठंड के मौसम में शरीर का तापमान असामान्य रूप से कम होने से हाइपोथर्मिया जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। हाइपोथर्मिया तब होता है जब शरीर का केंद्रीय तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है। यदि समय रहते इसे पहचानकर इलाज न किया जाए तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।

हाइपोथर्मिया के 12 प्रमुख संकेत

हाइपोथर्मिया के लक्षण शुरुआत में हल्के दिखाई देते हैं, लेकिन समय के साथ गंभीर हो जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्थिति को पहचानने के लिए इन संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है। सबसे पहले व्यक्ति अत्यधिक ठंड का अनुभव करता है और कंपकंपी शुरू हो जाती है। इसके साथ थकान, कमजोरी और ऊर्जा की कमी महसूस होती है। ठंड में त्वचा का रंग पीला या नीला पड़ सकता है। हाथ-पैर ठंडे और सुन्न हो जाते हैं।

इसके अलावा, धीमा और अस्पष्ट बोलना, संतुलन में कमी, धीमी धड़कन, सांस लेने में कठिनाई, भ्रम, नींद का अधिक आना या बेहोशी जैसी स्थिति भी हाइपोथर्मिया के संकेत हैं। अगर किसी व्यक्ति में ये लक्षण दिखें तो तुरंत सावधानी बरतना आवश्यक है।

हाइपोथर्मिया से बचाव के लिए 11 जरूरी सावधानियां

1.सर्दियों में गर्म कपड़े पहनें: लेयरिंग पद्धति अपनाएं, जिससे शरीर का तापमान नियंत्रित रहे। ऊनी कपड़े और विंटर जैकेट का इस्तेमाल फायदेमंद है।

2.सर और हाथों की सुरक्षा: सिर और हाथ से शरीर का तापमान सबसे अधिक प्रभावित होता है। टोपी, दस्ताने और मोज़े पहनना जरूरी है।

3.सर्दियों में भोजन का ध्यान: गर्म और ऊर्जा से भरपूर भोजन शरीर को अंदर से गर्म रखता है।

4.हाइड्रेटेड रहें: ठंड के मौसम में भी पर्याप्त पानी पीना जरूरी है।

5.धूप का लाभ उठाएं: दिन के समय धूप में थोड़ी देर समय बिताने से शरीर गर्म रहता है।

6.ठंडी हवा में लंबे समय तक न रहें: लंबे समय तक बाहर रहने से शरीर का तापमान तेजी से गिर सकता है।

7.नमी से बचाव: गीले कपड़े शरीर को जल्दी ठंडा कर सकते हैं, इसलिए गीले कपड़े तुरंत बदलें।

8.अत्यधिक शराब से बचें: शराब शरीर को गर्म रखती है ऐसा लगता है, लेकिन यह हाइपोथर्मिया के खतरे को बढ़ाती है।

9.शारीरिक गतिविधि बनाए रखें: हल्की एक्सरसाइज शरीर का तापमान बनाए रखती है।

10.कमजोर और बुजुर्गों का विशेष ध्यान: बच्चे और बुजुर्ग हाइपोथर्मिया के लिए अधिक संवेदनशील होते हैं।

11.आपातकालीन स्थिति के लिए तैयारी: अगर किसी को हाइपोथर्मिया के लक्षण दिखें तो उसे तुरंत गर्म वातावरण में ले जाएं और प्राथमिक चिकित्सा दें।

विशेषज्ञों की सलाह

डॉ. रेखा शर्मा, जो सर्दियों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर शोध करती हैं, कहती हैं कि हाइपोथर्मिया को हल्के लक्षणों में ही पहचानना और सही तरीके से बचाव करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि समय रहते सावधानी और प्राथमिक उपचार से इस गंभीर स्थिति को आसानी से टाला जा सकता है।

डॉ. शर्मा का कहना है कि लोगों को केवल अपने स्वास्थ्य की ही नहीं बल्कि आसपास के बुजुर्गों और बच्चों की भी निगरानी करनी चाहिए। खासकर घर से बाहर जाने पर सभी सावधानियां बरतें और लंबे समय तक ठंडी हवा में Exposure से बचें।

निष्कर्ष

सर्दियों में हाइपोथर्मिया एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है, जिसे नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। सही जानकारी और सावधानियों के पालन से आप और आपका परिवार सुरक्षित रह सकता है। इन 12 संकेतों को पहचानें और 11 जरूरी सावधानियों को अपनाकर ठंड में अपने स्वास्थ्य की रक्षा करें।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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