
भारत सरकार ने एक अहम फैसले में 7 लाख से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों के करीब 12.68 लाख ईमेल अकाउंट्स को NIC (National Informatics Centre) से निजी कंपनी ZOHO के सुरक्षित ईमेल प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट कर दिया है। इस बदलाव के बाद केंद्रीय मंत्रालयों और अहम सरकारी विभागों— जिसमें प्रधानमंत्री कार्यालय और गृहमंत्री अमित शाह का आधिकारिक ईमेल भी शामिल है— का प्रबंधन अब ZOHO के सिस्टम पर चलने लगा है। हालांकि पुराने gov.in और nic.in डोमेन का उपयोग जारी रहेगा तथा सभी डेटा की मालिकाना हक सरकार के पास ही रहेगा।
यह निर्णय भारत की टेक इंडस्ट्री में एक नई दिशा का संकेत देता है, जहां लंबे समय से सरकारी ईमेल सेवाओं को अब भारतीय प्राइवेट SaaS कंपनी के भरोसे सौंपा गया है। कुल 7.45 लाख सरकारी कर्मचारियों के ईमेल अकाउंट्स का स्टोरेज, प्रोसेसिंग और मैनेजमेंट अब पूर्ण रूप से ZOHO की टेक इन्फ्रास्ट्रक्चर के तहत चलेगा।
कौन हैं ZOHO के संस्थापक श्रीधर वेम्बू?
ZOHO Corporation के संस्थापक श्रीधर वेम्बू भारतीय सॉफ्टवेयर उद्योग की ऐसी शख्सियत हैं, जिन्होंने बिना किसी बाहरी निवेश के अपनी कंपनी को वैश्विक SaaS दिग्गजों— माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और सेल्सफोर्स— के बराबर खड़ा किया।
तमिलनाडु के तंजावुर जिले के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे वेम्बू IIT मद्रास से BTech और अमेरिका की प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से PhD हैं। उन्होंने 1990 के दशक में सिलिकॉन वैली में Qualcomm के साथ वायरलेस इंजीनियर के रूप में अपना करियर शुरू किया। यहीं से उन्होंने तकनीक, नेटवर्किंग और सॉफ्टवेयर की दुनिया को गहराई से समझा।
1996 में उन्होंने अपने भाइयों और मित्र टोनी थॉमस के साथ मिलकर AdventNet नाम की कंपनी शुरू की, जो नेटवर्क सॉल्यूशन प्रोवाइड करती थी। जैसे-जैसे यह कंपनी बढ़ी, 2009 में इसका नाम बदलकर ZOHO Corporation कर दिया गया। इसी समय कंपनी ने क्लाउड-बेस्ड SaaS मॉडल पर काम शुरू किया और CRM सहित कई सॉफ्टवेयर बाजारों में प्रवेश किया।
ZOHO यूनिवर्सिटी — ग्रामीण भारत से टेक टैलेंट बनाने की पहल
साल 2004 में वेम्बू ने ZOHO यूनिवर्सिटी (अब ZOHO Schools of Learning) की शुरुआत की, जो ऐसे युवाओं को टेक ट्रेनिंग देती है, जो पारंपरिक कॉलेज में जाने का खर्च नहीं उठा सकते। यह मॉडल आगे चलकर ZOHO की सबसे बड़ी ताकत बना, जहां कंपनी ने हजारों युवाओं को प्रशिक्षण देकर सीधे रोजगार दिया। इस मॉडल को आज भारत में रोजगार-केंद्रित शिक्षा का सबसे सफल उदाहरण माना जाता है।
अमेरिका छोड़कर तमिलनाडु के छोटे गांव में बस गए वेम्बू
2019 में श्रीधर वेम्बू ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए अमेरिका से भारत लौटने का फैसला किया। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने अपना मुख्यालय किसी मेट्रो शहर में नहीं, बल्कि तमिलनाडु के तेनकासी जिले के एक छोटे गांव में बनाया।
उनका मानना है कि भारत के गांव भी वैश्विक तकनीकी केंद्र बन सकते हैं, बशर्ते वहां अवसर और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। आज ZOHO के कई दफ्तर ग्रामीण क्षेत्रों में हैं, जहां से विश्वस्तरीय सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट हो रहा है।
माइक्रोसॉफ्ट और गूगल को टक्कर देने वाली भारतीय कंपनी
ZOHO ने 2021 में भारतीय मैसेजिंग ऐप Arattai लॉन्च किया। इसके अलावा 50 से ज्यादा क्लाउड-बेस्ड सॉफ्टवेयर दुनिया के 180 देशों में 10 मिलियन से ज्यादा यूजर्स इस्तेमाल कर रहे हैं। ईमेल, CRM, अकाउंटिंग, HR मैनेजमेंट और बिजनेस ऑपरेशन— हर सेक्टर में ZOHO का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
ZOHO दुनिया की अग्रणी SaaS कंपनियों में से एक है और यह पूरी तरह बूटस्ट्रैप्ड है— यानी कंपनी ने कभी निवेशकों से पैसे नहीं लिए। यह भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक अनोखा उदाहरण है।
भारत के 39वें सबसे अमीर व्यक्ति, लेकिन जीवनशैली बेहद सादगी भरी
2024 के फोर्ब्स अनुसार वेम्बू की कुल संपत्ति लगभग 5.85 बिलियन डॉलर है, जिससे वे भारत के 39वें सबसे अमीर व्यक्ति बने। इसके बावजूद उनकी सादगी और ग्रामीण जीवनशैली उन्हें अलग बनाती है। वे अक्सर साइकिल चलाकर ऑफिस जाते हैं और गांव के बच्चों को पढ़ाते हुए भी देखे गए हैं।
परिवारिक विवाद भी बना सुर्खियों का हिस्सा
वेम्बू की पत्नी प्रमिला श्रीनिवासन— जो एक शिक्षाविद हैं— ने 2020 में तलाक के लिए आवेदन दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत लौटने के बाद वेम्बू ने उन्हें और उनके ऑटिज्म से पीड़ित बेटे सिद्धु को अनदेखा किया तथा कुछ वित्तीय संपत्तियों को छुपाया।
वेम्बू ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा परिवार का समर्थन किया और सभी आवश्यक खर्चों का ध्यान रखा।
केंद्रीय कर्मचारियों के ईमेल ZOHO पर शिफ्ट करने का फैसला भारतीय टेक उद्योग की वैश्विक क्षमता को दर्शाता है। यह सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि भारत की प्राइवेट टेक कंपनियों पर बढ़ते भरोसे और स्वदेशी डिजिटल इकोसिस्टम की मजबूती का संकेत भी है।
Author: THE CG NEWS
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