
सर्दियों के मौसम में कंधे में जकड़न और दर्द की शिकायत तेजी से बढ़ जाती है। कई मामलों में यह समस्या साधारण दर्द नहीं बल्कि फ्रोजन शोल्डर यानी एडहेसिव कैप्सुलाइटिस होती है। डॉक्टरों के मुताबिक ठंड के मौसम में मांसपेशियों की गतिविधि कम हो जाती है, ब्लड सर्कुलेशन धीमा पड़ता है और इसी वजह से फ्रोजन शोल्डर के केस ज्यादा सामने आते हैं। खासतौर पर महिलाएं, डायबिटीज और हार्ट के मरीज इस बीमारी की चपेट में ज्यादा आते हैं।
क्या होता है फ्रोजन शोल्डर
फ्रोजन शोल्डर एक ऐसी स्थिति है जिसमें कंधे के जोड़ के आसपास की कैप्सूल में सूजन और जकड़न आ जाती है। इससे कंधे की मूवमेंट धीरे-धीरे सीमित होने लगती है और हाथ उठाना, पीछे ले जाना या साधारण काम करना भी दर्दनाक हो जाता है। यह समस्या अचानक नहीं होती, बल्कि महीनों में धीरे-धीरे बढ़ती है।
सर्दियों में क्यों बढ़ जाते हैं केस
ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों में लोग शारीरिक गतिविधियां कम कर देते हैं। ठंड की वजह से शरीर की मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं और कंधे की नियमित मूवमेंट नहीं हो पाती। इससे जोड़ के आसपास का टिश्यू सख्त होने लगता है। इसके अलावा ठंड में ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो जाता है, जिससे सूजन और दर्द बढ़ जाता है। यही कारण है कि नवंबर से फरवरी के बीच फ्रोजन शोल्डर के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है।
महिलाओं और हार्ट पेशेंट को क्यों ज्यादा खतरा
डॉक्टरों के मुताबिक 40 से 60 वर्ष की महिलाएं इस समस्या से ज्यादा प्रभावित होती हैं। हार्मोनल बदलाव, थायरॉइड की समस्या और कैल्शियम की कमी इसके बड़े कारण माने जाते हैं। वहीं हार्ट पेशेंट, खासकर जिन्हें पहले हार्ट अटैक हो चुका है, उनमें फ्रोजन शोल्डर का खतरा बढ़ जाता है। हार्ट सर्जरी या लंबे समय तक हाथ की मूवमेंट कम रहने से कंधे में जकड़न बनने लगती है। डायबिटीज के मरीजों में भी यह समस्या आम है, क्योंकि उनमें नसों और जोड़ों की रिकवरी धीमी होती है।
फ्रोजन शोल्डर के शुरुआती लक्षण
शुरुआत में कंधे में हल्का दर्द महसूस होता है, जो धीरे-धीरे बढ़ता है। रात में दर्द ज्यादा परेशान करता है और करवट बदलने में दिक्कत होती है। कुछ समय बाद हाथ ऊपर उठाने, कपड़े पहनने, बाल बनाने या पीछे हाथ ले जाने में परेशानी होने लगती है। अगर समय रहते इलाज न किया जाए तो कंधा लगभग जाम सा हो जाता है।
इलाज में देरी क्यों खतरनाक
विशेषज्ञ बताते हैं कि फ्रोजन शोल्डर को ठीक होने में 1 से 2 साल तक लग सकते हैं। अगर शुरुआती स्टेज में इलाज शुरू कर दिया जाए तो यह समय काफी कम हो सकता है। देरी करने पर दर्द और जकड़न बढ़ती जाती है और फिजियोथेरेपी के बावजूद पूरी मूवमेंट वापस पाना मुश्किल हो सकता है।
डॉक्टर क्या सलाह देते हैं
ऑर्थोपेडिक डॉक्टरों के अनुसार फ्रोजन शोल्डर का इलाज दवाइयों के साथ फिजियोथेरेपी से किया जाता है। दर्द कम करने के लिए एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं दी जाती हैं और कंधे की मूवमेंट बढ़ाने के लिए नियमित एक्सरसाइज करवाई जाती है। कुछ मामलों में स्टेरॉयड इंजेक्शन की जरूरत भी पड़ सकती है। बहुत गंभीर मामलों में सर्जरी का विकल्प अपनाया जाता है, हालांकि इसकी जरूरत कम ही पड़ती है।
घर पर कैसे करें बचाव
डॉक्टरों का कहना है कि सर्दियों में कंधे को ज्यादा देर तक स्थिर न रखें। रोजाना हल्की स्ट्रेचिंग और कंधे की एक्सरसाइज करें। ठंड से बचाव के लिए कंधे को गर्म रखें और गुनगुने पानी से सेक करें। लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप पर एक ही पोजीशन में काम करने से बचें। हार्ट और डायबिटीज मरीजों को अपने डॉक्टर की सलाह से नियमित फिजिकल एक्टिविटी जरूर करनी चाहिए।
कब तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
अगर कंधे का दर्द 2 से 3 हफ्ते तक बना रहे, रात में दर्द बढ़े या हाथ की मूवमेंट तेजी से कम होने लगे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर पहचान और इलाज से फ्रोजन शोल्डर को गंभीर होने से रोका जा सकता है।
साफ है कि फ्रोजन शोल्डर कोई मामूली समस्या नहीं है। सर्दियों में थोड़ी सी लापरवाही इस दर्दनाक बीमारी को जन्म दे सकती है, इसलिए सतर्क रहना और समय पर इलाज बेहद जरूरी है।
Author: THE CG NEWS
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