Pradosh Vrat 2025: साल का आखिरी प्रदोष व्रत कल, शिव कृपा पाने का विशेष संयोग, जानें पूजन विधि, नियम और दिव्य मंत्र

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हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2025 का आखिरी प्रदोष व्रत पौष कृष्ण त्रयोदशी तिथि को रखा जाएगा। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष आराधना के लिए समर्पित होता है। इस बार पौष कृष्ण त्रयोदशी तिथि 16 दिसंबर को रात 11 बजकर 57 मिनट से प्रारंभ होकर 17 दिसंबर को रात 9 बजकर 44 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर प्रदोष व्रत 17 दिसंबर 2025, बुधवार को रखा जाएगा। बुधवार होने के कारण यह बुध प्रदोष व्रत कहलाएगा, जिसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व

प्रदोष व्रत का विशेष संबंध भगवान शिव के उस समय से माना जाता है, जब सूर्यास्त के बाद संध्या काल में शिवजी कैलाश पर्वत पर नृत्य करते हैं। मान्यता है कि इस समय की गई पूजा से शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सभी कष्ट दूर करते हैं। शास्त्रों के अनुसार प्रदोष व्रत रखने से रोग, दरिद्रता, मानसिक तनाव और पारिवारिक कलह से मुक्ति मिलती है। साथ ही यह व्रत जीवन में स्थिरता, सफलता और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खोलता है।

साल के आखिरी प्रदोष व्रत का विशेष संयोग

साल का अंतिम प्रदोष व्रत होने के कारण इस दिन पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वर्ष के अंतिम प्रदोष व्रत पर भगवान शिव से आने वाले वर्ष के लिए स्वास्थ्य, समृद्धि और सुख-शांति की कामना करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पौष मास वैसे भी शिव भक्ति के लिए विशेष माना जाता है, ऐसे में यह व्रत शिव साधना का श्रेष्ठ अवसर प्रदान करता है।

प्रदोष व्रत की पूजा विधि

प्रदोष व्रत के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूरे दिन व्रत का संकल्प लें और मन को शांत रखें। शाम के समय सूर्यास्त से पहले पूजा की तैयारी कर लें। घर के मंदिर या शिव मंदिर में भगवान शिव का अभिषेक करें। अभिषेक के लिए जल, दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल का प्रयोग किया जा सकता है। इसके बाद शिवलिंग पर बेलपत्र, भस्म, सफेद फूल और अक्षत अर्पित करें।

संध्या काल में दीपक जलाकर भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा करें। धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित कर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें। पूजा के बाद प्रदोष व्रत कथा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। अंत में शिव आरती कर परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।

प्रदोष व्रत के नियम और सावधानियां

प्रदोष व्रत के दिन सात्विक आचरण का पालन करना चाहिए। व्रती को झूठ, क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए। व्रत के दौरान अनाज का सेवन वर्जित माना जाता है। फलाहार या केवल जल पर व्रत रखा जा सकता है। कुछ श्रद्धालु व्रत के दिन नमक का भी त्याग करते हैं। पूजा के समय साफ-सफाई और शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

प्रदोष व्रत के प्रभाव और लाभ

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार प्रदोष व्रत करने से जीवन के सभी प्रकार के दोष शांत होते हैं। कुंडली में मौजूद ग्रह दोष, विशेषकर शनि दोष और कालसर्प दोष से राहत मिलने की मान्यता है। यह व्रत विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने, संतान सुख प्राप्त करने और व्यापार में उन्नति के लिए भी फलदायी माना गया है। शिव भक्तों का विश्वास है कि नियमित प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति को शिवलोक की प्राप्ति होती है।

प्रदोष व्रत के दिव्य मंत्र

पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप विशेष फलदायी माना जाता है—

ॐ नमः शिवाय

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्

उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्

इन मंत्रों के जाप से मानसिक शांति मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।

शिव कृपा पाने का श्रेष्ठ अवसर

साल का आखिरी प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना का अत्यंत शुभ अवसर है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत भक्तों को जीवन में नई ऊर्जा, सकारात्मकता और ईश्वरीय कृपा प्रदान करता है। शिव भक्तों के लिए यह दिन आत्मिक शुद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

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Author: THE CG NEWS

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