
गाजा में सीजफायर के बावजूद हालात सामान्य होने के बजाय और जटिल होते जा रहे हैं। अमेरिकी मीडिया नेटवर्क CNN की एक विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, गाजा में कम से कम पांच इजराइल समर्थित मिलिशिया समूह सक्रिय हो गए हैं, जो खुले तौर पर हमास से जुड़े लड़ाकों और समर्थकों को निशाना बना रहे हैं। ये समूह खुद को “सिविलियन फोर्स” या “काउंटर-टेररिज्म यूनिट” बताते हैं और दावा कर रहे हैं कि हमास को सत्ता से हटाने के बाद वे गाजा के शासन में अहम भूमिका निभाएंगे।
इजराइल के कब्जे वाले इलाकों में एक्टिव मिलिशिया
रिपोर्ट के अनुसार, ये मिलिशिया मुख्य रूप से गाजा के पूर्वी हिस्से में सक्रिय हैं, जिसे इजराइल की सेना ने अपने नियंत्रण में रखा हुआ है। इस इलाके को ‘येलो लाइन’ कहा जा रहा है। यहां नागरिक आबादी कम है और इजराइली सेना की सीधी निगरानी में ये सशस्त्र गुट काम कर रहे हैं। आरोप है कि इन समूहों को इजराइल से हथियार, लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा समर्थन मिल रहा है, जिससे ये हमास के सदस्यों की लक्षित हत्याओं में शामिल हैं।
यासर अबू शबाब की हत्या से बदला समीकरण
इस महीने की शुरुआत में पॉपुलर फोर्सेस नामक गुट के नेता यासर अबू शबाब की हत्या ने पूरे नेटवर्क को झटका दिया। इस गुट को इजराइल का सबसे करीबी समर्थक माना जाता था। हमास ने अबू शबाब की मौत पर सार्वजनिक रूप से खुशी जताई और मिठाइयां बांटीं। इसके बाद उनकी मिलिशिया कमजोर पड़ गई और कई लड़ाकों ने सरेंडर कर दिया। इजराइल पहले संकेत दे चुका था कि रफाह क्षेत्र में पुनर्निर्माण की सुरक्षा का जिम्मा इसी गुट को सौंपा जाएगा।
इमाम की हत्या और मिलिशिया पर आरोप
नवंबर की शुरुआत में दक्षिणी गाजा में एक मस्जिद के इमाम शेख मोहम्मद अबू मुस्तफा की हत्या ने हालात और बिगाड़ दिए। नमाज के बाद मस्जिद से बाहर निकलते समय मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी। एक इस्लामिस्ट समूह ने दावा किया कि यह हत्या इजराइल समर्थित मिलिशिया ने की है। बाद में हमास से जुड़े एक अन्य संगठन ने कहा कि मारे गए इमाम जिहादी गतिविधियों में शामिल थे और उन्होंने गाजा युद्ध के दौरान इजराइली बंधकों को छिपाने में मदद की थी। इस हत्या को हुसाम अल-अस्तल के नेतृत्व वाले गुट से जोड़ा गया।
मिलिशिया लीडर का बयान, हमास को हराने की कसम
CNN से बातचीत में मिलिशिया प्रमुख हुसाम अल-अस्तल ने इमाम की हत्या में अपनी भूमिका से इनकार किया, लेकिन यह जरूर कहा कि वे हमास को हराने की कसम खा चुके हैं। उनका संगठन खुद को काउंटर-टेररिज्म स्ट्राइक फोर्स बताता है और दावा करता है कि वह खान यूनिस के इजराइली कब्जे वाले हिस्से में एक गांव पर नियंत्रण रखता है। अल-अस्तल ने कहा कि पॉपुलर आर्मी और पॉपुलर डिफेंस आर्मी जैसे अन्य गुटों से उनका संपर्क है और सभी का लक्ष्य एक ही है।
पश्चिमी गाजा में हमास की वापसी
दो साल से जारी युद्ध के बाद गाजा अब दो हिस्सों में बंटा नजर आ रहा है। पश्चिमी गाजा से इजराइली सेना पीछे हट चुकी है और यहां हमास फिर से अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। गाजा की ज्यादातर आबादी इसी हिस्से में रहती है। इसके उलट, पूर्वी गाजा में इजराइल का कब्जा है, जहां ये मिलिशिया सक्रिय हैं और खुद को भविष्य के शासक के तौर पर पेश कर रहे हैं।
हमास की जवाबी कार्रवाई, गृहयुद्ध का डर
मिलिशिया हमलों के जवाब में हमास ने भी सख्त कदम उठाए हैं। अक्टूबर में एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें हमास के नकाबपोश लड़ाकों ने आठ मिलिशिया सदस्यों को सड़क पर गोली मार दी थी। हमास ने उन्हें इजराइल का जासूस बताया था। इस घटनाक्रम के बाद गाजा में गृहयुद्ध जैसी स्थिति बनने की आशंका गहरा गई है।
इजराइल की रणनीति और ‘येलो लाइन’
इजराइल का साफ लक्ष्य हमास को कमजोर कर गाजा से उसकी सत्ता खत्म करना है। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पहले स्वीकार कर चुके हैं कि ऐसे स्थानीय गुटों को सक्रिय करने से इजराइली सैनिकों की जान बचती है। इजराइली सेना प्रमुख ऐयाल जमीर ने हाल ही में कहा कि गाजा की 50% से ज्यादा जमीन अब इजराइल की ‘सुरक्षा सीमा’ के भीतर है और सेना अपनी मौजूदा पोजिशन नहीं छोड़ेगी।
युद्ध की भारी कीमत
7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद शुरू हुई जंग को दो साल से ज्यादा हो चुके हैं। अब तक 67 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, जिनमें हजारों बच्चे शामिल हैं। राहत एजेंसियों का कहना है कि गाजा अब एक शहर नहीं, बल्कि जिंदा बचे लोगों का विशाल शिविर बन चुका है। ऐसे में इजराइल समर्थित मिलिशिया और हमास के बीच बढ़ता संघर्ष गाजा को और गहरे संकट की ओर धकेलता दिख रहा है।
Author: THE CG NEWS
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