बांग्लादेश हाई कमीशन ने भारत में वीजा सेवाएं रोकीं, सुरक्षा कारणों का हवाला; हादी हत्याकांड के आरोपी पर शरण के दावे खारिज

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भारत–बांग्लादेश संबंधों में बढ़ते तनाव के बीच बांग्लादेश हाई कमीशन ने भारत में अपनी सभी वीजा और काउंसलर सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला किया है। हाई कमीशन ने इसके पीछे सुरक्षा कारणों का हवाला दिया है और कहा है कि यह रोक अगले आदेश तक लागू रहेगी। इससे पहले त्रिपुरा की राजधानी अगरतला स्थित बांग्लादेश कॉन्सुलेट भी वीजा सेवाओं पर रोक लगा चुका है। इस कदम से दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही और कूटनीतिक माहौल पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

भारत और बांग्लादेश, दोनों तरफ वीजा सेवाओं पर असर

इससे पहले भारत ने भी सुरक्षा हालात को देखते हुए चटगांव स्थित अपने असिस्टेंट हाई कमीशन में वीजा सेवाएं बंद कर दी थीं। यह फैसला हाल ही में हुए भारत-विरोधी प्रदर्शनों और हिंसक घटनाओं के बाद लिया गया। भारतीय वीजा आवेदन केंद्र ने स्पष्ट किया है कि 21 दिसंबर से अगली सूचना तक वीजा से जुड़ा कोई काम नहीं होगा। दोनों देशों की ओर से उठाए गए इन कदमों को राजनयिक स्तर पर असामान्य स्थिति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

चटगांव और अन्य शहरों में भारत विरोधी प्रदर्शन

बीते दिनों चटगांव में हालात उस वक्त तनावपूर्ण हो गए, जब एक बड़ी भीड़ भारतीय असिस्टेंट हाई कमिश्नर के आवास के पास पहुंच गई और वहां पथराव की घटना हुई। इसके अलावा खुलना, राजशाही और ढाका में भी भारतीय दफ्तरों के बाहर बड़े पैमाने पर भारत विरोधी नारे लगाए गए। इन घटनाओं के बाद भारत ने अपने राजनयिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और एहतियातन वीजा सेवाओं पर रोक लगाने का फैसला किया।

दिल्ली में बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर प्रदर्शन

उधर, दो दिन पहले दिल्ली में बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर भी प्रदर्शन देखने को मिला। यह प्रदर्शन बांग्लादेश में एक हिंदू युवक की हत्या के विरोध में किया गया था। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह प्रदर्शन बेहद छोटा और शांतिपूर्ण था, जिसमें सिर्फ 20–25 लोग शामिल थे और इससे बांग्लादेश उच्चायोग की सुरक्षा को कोई खतरा नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्लादेश के कुछ मीडिया संस्थानों ने इस घटना को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया।

बांग्लादेश का पलटवार, भारत के बयान से असहमति

हालांकि, बांग्लादेश ने भारत के इस बयान को खारिज कर दिया। ढाका का कहना है कि स्थिति को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए था। बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार एम. तौहीद हुसैन ने सवाल उठाया कि 25–30 लोगों का समूह इतने संवेदनशील कूटनीतिक क्षेत्र तक कैसे पहुंच गया। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान सिर्फ हत्या के विरोध तक सीमित नारे नहीं लगे और बांग्लादेशी मीडिया की रिपोर्टिंग भ्रामक नहीं थी।

हादी हत्याकांड और आरोपी को लेकर बयान

इस पूरे विवाद के बीच बांग्लादेश के गृह मंत्रालय ने यह भी साफ किया है कि इंकलाब मंच के संयोजक शरीफ उस्मान बिन हादी की हत्या के मुख्य आरोपी के भारत में शरण लेने की कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बांग्लादेश के आईजी रफीकुल इस्लाम ने कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों के पास आरोपी फैसल करीम मसूद के ठिकाने को लेकर कोई ठोस सूचना नहीं है। हाल के प्रदर्शनों में यह आरोप लगाया गया था कि भारत हत्याकांड के आरोपी को पनाह दे रहा है।

शेख हसीना का यूनुस सरकार पर हमला

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश में बढ़ते भारत विरोधी माहौल के लिए अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि यह दुश्मनी आम लोगों की नहीं, बल्कि उन कट्टरपंथी ताकतों की देन है जिन्हें मौजूदा सरकार ने संरक्षण दिया है। शेख हसीना ने आरोप लगाया कि राजनयिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के बजाय उपद्रवियों को छूट दी जा रही है, जो हालात को और बिगाड़ रहा है।

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल

बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की हत्या के बाद अल्पसंख्यक समुदाय में भय का माहौल है। ढाका के नेशनल प्रेस क्लब के सामने हुए प्रदर्शनों में आरोप लगाया गया कि धार्मिक पहचान के आधार पर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस साल अब तक 50 से ज्यादा गैर-मुस्लिमों की हत्या हो चुकी है। बांग्लादेशी सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि दीपू दास के खिलाफ ईशनिंदा के आरोपों के कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं और मामले में 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

बढ़ता तनाव और अनिश्चित भविष्य

भारत और बांग्लादेश के बीच वीजा सेवाओं पर रोक, परस्पर आरोप-प्रत्यारोप और सड़कों पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों ने दोनों देशों के रिश्तों में नई जटिलता पैदा कर दी है। कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं संभाले गए, तो इसका असर न केवल द्विपक्षीय संबंधों पर बल्कि आम नागरिकों की आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।

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Author: THE CG NEWS

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