JNU में विवादित नारेबाजी से सियासी घमासान: मोदी–शाह के खिलाफ नारे, प्रशासन सख्त; FIR के साथ सस्पेंशन की तैयारी

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दिल्ली की प्रतिष्ठित Jawaharlal Nehru University एक बार फिर राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गई है। सोमवार रात कैंपस में कुछ छात्रों द्वारा प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाए जाने का मामला सामने आया है। करीब 35 सेकेंड का एक वीडियो मंगलवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें छात्र “मोदी–शाह की कब्र खुदेगी, जेएनयू की धरती पर” जैसे नारे लगाते और गाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आते ही इसे लेकर देशभर में तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई हैं।

इस नारेबाजी को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ा रुख अपनाया है। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने दावा किया कि यह प्रदर्शन दिल्ली दंगों के आरोपी Umar Khalid और Sharjeel Imam के समर्थन में किया गया। भंडारी ने कहा कि यह केवल विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि राष्ट्रविरोधी विचारधारा का खुला प्रसार है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। भाजपा नेताओं का कहना है कि JNU लगातार ऐसे तत्वों का अड्डा बनता जा रहा है, जो संवैधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ माहौल बनाते हैं।

वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी इस मामले में सख्त रुख अपनाया है। JNU प्रबंधन ने साफ कहा कि इस तरह के नारे लोकतांत्रिक विरोध की सीमा से बाहर हैं और विश्वविद्यालय के कोड ऑफ कंडक्ट का सीधा उल्लंघन करते हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कैंपस को नफरत फैलाने की प्रयोगशाला नहीं बनने दिया जाएगा। मामले में पहले ही FIR दर्ज कर ली गई है और जिन छात्रों की पहचान वीडियो के आधार पर की जा रही है, उनके खिलाफ सस्पेंशन सहित कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि हिंसा, गैरकानूनी आचरण या राष्ट्रीय एकता को कमजोर करने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला भी अहम माना जा रहा है। दरअसल, एक दिन पहले ही Supreme Court of India ने 2020 दिल्ली दंगों की कथित साजिश से जुड़े मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया था। दोनों पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत गंभीर आरोप हैं। कोर्ट के फैसले के बाद से ही देश के कई हिस्सों में इस पर राजनीतिक और वैचारिक बहस तेज हो गई थी, जिसका असर JNU कैंपस में भी देखने को मिला।

JNU छात्रसंघ की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने इस नारेबाजी को लेकर अलग पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि हर साल 5 जनवरी को छात्र 2020 में कैंपस में हुई हिंसा की बरसी पर विरोध प्रदर्शन करते हैं। उनके अनुसार, उस दौरान लगाए गए नारे वैचारिक थे और किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ व्यक्तिगत हमले के रूप में नहीं देखे जाने चाहिए। मिश्रा ने यह भी दावा किया कि नारे किसी को धमकी देने या हिंसा भड़काने के इरादे से नहीं लगाए गए थे।

हालांकि प्रशासन इस तर्क से सहमत नहीं दिख रहा। मंगलवार दोपहर JNU प्रशासन ने वसंत कुंज पुलिस को पत्र लिखकर साबरमती हॉस्टल के बाहर नारेबाजी के मामले में FIR दर्ज करने की मांग की। अपने आधिकारिक बयान में विश्वविद्यालय ने कहा कि नारे स्पष्ट रूप से सुनाई दे रहे थे, जानबूझकर लगाए गए और बार-बार दोहराए गए, जिससे यह साफ होता है कि यह सोच-समझकर किया गया कृत्य था। इससे कैंपस की शांति, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान पहुंच सकता है।

इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हैं। कांग्रेस नेताओं ने इसे फैसले के खिलाफ गुस्सा जाहिर करने का तरीका बताया है। कांग्रेस का कहना है कि लोकतंत्र में असहमति जताने का अधिकार होना चाहिए, हालांकि भाषा और तरीके को लेकर संयम जरूरी है। दूसरी ओर भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने इस नारेबाजी को देशविरोधी मानसिकता करार दिया है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

गौरतलब है कि 5 जनवरी 2020 को JNU कैंपस में भीषण हिंसा हुई थी, जब नकाबपोश लोगों ने हॉस्टलों में घुसकर छात्रों पर हमला किया था। उस घटना में कई छात्र घायल हुए थे और तब से ही JNU राष्ट्रीय राजनीति का संवेदनशील केंद्र बना हुआ है। मौजूदा नारेबाजी की घटना ने एक बार फिर कैंपस की राजनीति, अभिव्यक्ति की आज़ादी और उसकी सीमाओं को लेकर बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई पर टिकी है, जिससे यह तय होगा कि आगे इस विवाद का क्या अंजाम होता है।

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Author: THE CG NEWS

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