मिट्टी, चॉक या बर्फ खाने का मन करता है? यह कोई शौक नहीं, गंभीर बीमारी का हो सकता है संकेत

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कई लोगों को अचानक मिट्टी, चॉक, कागज, साबुन या बर्फ खाने की तीव्र इच्छा होने लगती है। अक्सर इसे बचपन की आदत, अजीब शौक या स्वाद से जुड़ा मामला समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन मेडिकल साइंस में इस व्यवहार को एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जोड़ा जाता है, जिसे पाइका डिसऑर्डर कहा जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक यह सिर्फ आदत नहीं, बल्कि शरीर में पोषण की कमी और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा संकेत हो सकता है।

क्या है पाइका डिसऑर्डर

पाइका एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति ऐसी चीजें खाने की इच्छा करता है, जो खाने योग्य नहीं होतीं। इसमें मिट्टी, चॉक, कागज, साबुन, बर्फ, राख, बाल या मिट्टी के बर्तन तक शामिल हो सकते हैं। यह समस्या बच्चों, गर्भवती महिलाओं और एनीमिया से पीड़ित लोगों में ज्यादा देखी जाती है। डॉक्टरों के अनुसार अगर यह आदत कुछ दिनों या हफ्तों तक बनी रहे, तो इसे गंभीरता से लेना जरूरी होता है।

शरीर में किस कमी से होती है यह समस्या

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पाइका डिसऑर्डर का सबसे बड़ा कारण शरीर में आयरन की कमी यानी एनीमिया होता है। इसके अलावा जिंक और कैल्शियम की कमी भी इस अजीब craving को बढ़ा सकती है। खासतौर पर बर्फ खाने की इच्छा, जिसे मेडिकल भाषा में पैगोफैगिया कहा जाता है, अक्सर आयरन की कमी से जुड़ी होती है। शरीर जब जरूरी मिनरल्स नहीं पा पाता, तो दिमाग गलत संकेत भेजने लगता है, जिससे ऐसी असामान्य इच्छाएं पैदा होती हैं।

गर्भावस्था और बच्चों में ज्यादा खतरा

डॉक्टर बताते हैं कि गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलाव और बढ़ी हुई पोषण जरूरतों के कारण महिलाओं में पाइका के लक्षण उभर सकते हैं। इसी तरह बच्चों में यह समस्या तब दिखती है, जब उनकी डाइट में जरूरी पोषक तत्वों की कमी होती है या वे किसी मानसिक तनाव से गुजर रहे होते हैं। अगर समय पर ध्यान न दिया जाए, तो यह आदत आगे चलकर गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है।

क्या हो सकते हैं इसके खतरे

मिट्टी या चॉक जैसी चीजें खाने से शरीर में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। मिट्टी में मौजूद बैक्टीरिया और परजीवी पेट से जुड़ी बीमारियों का कारण बन सकते हैं। चॉक और केमिकल युक्त चीजें पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकती हैं और आंतों में रुकावट पैदा कर सकती हैं। लंबे समय तक ऐसा करने से लीवर, किडनी और दांतों पर भी बुरा असर पड़ सकता है।

मानसिक स्वास्थ्य से भी है संबंध

पाइका सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य से भी जुड़ा माना जाता है। कुछ मामलों में यह ऑब्सेसिव-कंपल्सिव डिसऑर्डर, ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर या स्ट्रेस और एंग्जायटी से जुड़ा हो सकता है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार non-food चीजें खाने की इच्छा दिमाग में किसी गहरे असंतुलन की ओर इशारा कर सकती है।

कब जरूरी है डॉक्टर से मिलना

अगर किसी व्यक्ति को बार-बार मिट्टी, चॉक या बर्फ खाने की इच्छा हो और वह इसे कंट्रोल न कर पा रहा हो, तो डॉक्टर से मिलना जरूरी है। खून की जांच के जरिए आयरन, जिंक और अन्य मिनरल्स की कमी का पता लगाया जा सकता है। इसके साथ ही डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य का आकलन भी कर सकते हैं, ताकि समस्या की जड़ तक पहुंचा जा सके।

इलाज और बचाव के तरीके

पाइका का इलाज उसकी वजह पर निर्भर करता है। अगर समस्या पोषण की कमी से जुड़ी है, तो सही डाइट और सप्लीमेंट से इसे कंट्रोल किया जा सकता है। आयरन, जिंक और कैल्शियम से भरपूर भोजन जैसे हरी सब्जियां, दालें, गुड़, फल और दूध उत्पाद फायदेमंद माने जाते हैं। मानसिक कारणों की स्थिति में काउंसलिंग और बिहेवियर थेरेपी मददगार हो सकती है।

नजरअंदाज न करें चेतावनी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मिट्टी या चॉक खाने की इच्छा को मजाक या शौक समझकर टालना खतरनाक हो सकता है। यह शरीर के अंदर चल रही किसी गंभीर कमी या बीमारी का संकेत हो सकता है। समय रहते जांच और इलाज से न सिर्फ इस आदत से छुटकारा पाया जा सकता है, बल्कि भविष्य में होने वाली बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से भी बचा जा सकता है।

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Author: THE CG NEWS

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