रिपोर्ट: ग्रीनलैंड पर कब्जे की तैयारी में ट्रम्प? स्पेशल कमांडो को जिम्मेदारी, NATO संकट की आशंका गहराई

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि वे ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए सैन्य योजना बनवाने पर जोर दे रहे हैं। ब्रिटिश मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ने अमेरिका की जॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड को इस संबंध में संभावित विकल्पों पर काम करने का निर्देश दिया है। हालांकि अमेरिकी सेना और वरिष्ठ जनरल इस विचार से असहज बताए जा रहे हैं और इसे कानूनी व कूटनीतिक रूप से खतरनाक मान रहे हैं।

घरेलू राजनीति से जुड़ा माना जा रहा है दांव

रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रम्प की ग्रीनलैंड में दिलचस्पी केवल रणनीतिक नहीं, बल्कि घरेलू राजनीति से भी जुड़ी हो सकती है। अमेरिका में इस साल के अंत में मिड-टर्म चुनाव होने हैं और रिपब्लिकन पार्टी को संसद पर अपनी पकड़ कमजोर होने का डर है। ऐसे में ट्रम्प कोई बड़ा और आक्रामक कदम उठाकर महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक दबाव जैसे मुद्दों से जनता का ध्यान हटाना चाहते हैं। यही वजह मानी जा रही है कि ग्रीनलैंड जैसे संवेदनशील मुद्दे को बार-बार हवा दी जा रही है।

जनरलों की नाराज़गी, ‘पांच साल के बच्चे जैसी जिद’

डेली मेल को एक राजनयिक सूत्र ने बताया कि अमेरिकी सैन्य अधिकारी ट्रम्प की ग्रीनलैंड योजना को अव्यावहारिक और गैरकानूनी मानते हैं। सूत्र के मुताबिक कई जनरलों का कहना है कि राष्ट्रपति की जिद से निपटना “पांच साल के बच्चे” को समझाने जैसा हो गया है। उनका मानना है कि नाटो के ही एक सदस्य देश डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र पर कब्जे की सोच अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग कर सकती है।

NATO के लिए बड़ा संकट बन सकता है मामला

अगर अमेरिका ग्रीनलैंड पर किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई करता है, तो इससे NATO के भीतर अभूतपूर्व संकट पैदा हो सकता है। ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है और डेनमार्क खुद NATO का सदस्य है। ऐसे में अमेरिका का कदम सीधे तौर पर अपने ही सहयोगियों के खिलाफ माना जाएगा। यूरोपीय नेताओं को डर है कि इससे NATO गठबंधन टूटने की कगार पर पहुंच सकता है और अमेरिका-यूरोप रिश्तों में गहरी दरार आ सकती है।

MAGA गुट और NATO को कमजोर करने की थ्योरी

कुछ यूरोपीय अधिकारियों का मानना है कि ट्रम्प के आसपास मौजूद कट्टरपंथी MAGA गुट का असली मकसद NATO को अंदर से कमजोर करना है। चूंकि अमेरिकी संसद ट्रम्प को सीधे NATO से बाहर निकलने की अनुमति नहीं देगी, इसलिए ग्रीनलैंड जैसे विवाद खड़े कर यूरोपीय देशों को खुद गठबंधन छोड़ने के लिए मजबूर किया जा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि NATO को तोड़ने के लिए यह ट्रम्प के लिए सबसे आसान रास्ता साबित हो सकता है।

NATO से ट्रम्प की पुरानी नाराजगी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रम्प लंबे समय से NATO को अमेरिका के लिए अनुचित और बोझ मानते रहे हैं। उनका तर्क है कि अमेरिका इस गठबंधन में सबसे ज्यादा पैसा और सैन्य संसाधन खर्च करता है, जबकि कई यूरोपीय देश अपने GDP का 2 प्रतिशत रक्षा पर खर्च करने के लक्ष्य को पूरा नहीं करते। अपने पहले कार्यकाल में भी ट्रम्प ने NATO सहयोगियों को चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने रक्षा खर्च नहीं बढ़ाया तो अमेरिका उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी नहीं लेगा।

रूस को खुली चेतावनी वाला बयान

2024 के चुनाव अभियान के दौरान ट्रम्प का एक बयान काफी विवादित रहा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि जो NATO देश पर्याप्त रक्षा खर्च नहीं करते, उन पर रूस जो चाहे कर सकता है। इस बयान ने यूरोप में चिंता बढ़ा दी थी। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प “अमेरिका फर्स्ट” नीति के तहत विदेशी सुरक्षा पर खर्च कम करना चाहते हैं और यूरोप को अपनी रक्षा खुद करने के लिए मजबूर करना चाहते हैं।

ग्रीनलैंड पर कब्जा क्यों जरूरी, ट्रम्प की दलील

ट्रम्प ने हाल ही में व्हाइट हाउस में कहा था कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर कब्जा नहीं किया, तो रूस और चीन वहां अपनी पकड़ मजबूत कर लेंगे। उन्होंने इसे जमीन खरीदने का मामला नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा सवाल बताया। ट्रम्प के मुताबिक ग्रीनलैंड के पास रूसी और चीनी नौसैनिक गतिविधियां बढ़ रही हैं, जिनमें डिस्ट्रॉयर और पनडुब्बियां शामिल हैं।

‘मालिक बनेंगे तभी रक्षा होगी’

जब उनसे पूछा गया कि अमेरिका का वहां पहले से सैन्य अड्डा होने के बावजूद कब्जे की जरूरत क्यों है, तो ट्रम्प ने कहा कि लीज काफी नहीं होती। उनका तर्क था कि जब कोई देश मालिक होता है, तभी वह क्षेत्र की सही तरीके से रक्षा करता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर ग्रीनलैंड को “आसान तरीके” से हासिल नहीं किया गया, तो “सख्त विकल्प” भी अपनाए जा सकते हैं।

डेनमार्क और ग्रीनलैंड का सख्त रुख

डेनमार्क ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी विदेशी हमले की स्थिति में उसकी सेना बिना आदेश के तुरंत जवाबी कार्रवाई करेगी। यह नियम 1952 से लागू है। वहीं ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने कहा है कि उनका देश बिकाऊ नहीं है और अमेरिकी बयानों को उन्होंने ग्रीनलैंड के लोगों के प्रति अनादर बताया।

कुल मिलाकर, ग्रीनलैंड को लेकर ट्रम्प के तेवर न केवल अमेरिका की विदेश नीति, बल्कि वैश्विक सुरक्षा संतुलन और NATO के भविष्य के लिए भी गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। आने वाले समय में यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय राजनीति में और बड़ा रूप ले सकता है।

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Author: THE CG NEWS

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