
कर्नाटक की राजनीति में मुख्यमंत्री पद को लेकर एक बार फिर खींचतान खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर चल रहा असमंजस अब सार्वजनिक बयानबाजी तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने साफ तौर पर कहा है कि राज्य में मुख्यमंत्री पद को लेकर हर दिन भ्रम की स्थिति बन रही है और ऐसे में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। सिद्धारमैया का यह बयान ऐसे समय आया है, जब डिप्टी मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में राहुल गांधी के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार की मौजूदगी में नेतृत्व का मुद्दा उठा। इसी के बाद सिद्धारमैया ने संकेत दिए कि वह कैबिनेट विस्तार करना चाहते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी असमंजस के कारण निर्णय लेने में दिक्कत हो रही है। उन्होंने कहा कि जब तक शीर्ष नेतृत्व स्थिति स्पष्ट नहीं करता, तब तक सरकार के भीतर भी अनिश्चितता बनी रहेगी।
डीके शिवकुमार की पोस्ट से बढ़ी हलचल
इसी बीच बुधवार को डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “भले ही कोशिश नाकाम हो जाए, लेकिन प्रार्थना नाकाम नहीं होती।” इस एक लाइन के संदेश को कांग्रेस के अंदरूनी सत्ता संघर्ष से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह पोस्ट सीधे तौर पर मुख्यमंत्री पद से जुड़ी उनकी आकांक्षाओं की ओर इशारा करती है। हालांकि, शिवकुमार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक सफाई नहीं दी गई है।
दरअसल, राहुल गांधी 13 जनवरी को मैसूरु पहुंचे थे। इस दौरान एयरपोर्ट पर डीके शिवकुमार ने राहुल गांधी से कुछ देर अकेले में बातचीत की थी। इस मुलाकात के बाद से ही कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज हो गई हैं। पार्टी के भीतर यह चर्चा फिर से जोर पकड़ने लगी है कि क्या कांग्रेस हाईकमान कर्नाटक में सत्ता संतुलन को लेकर कोई बड़ा फैसला लेने वाला है।
2.5 साल के फॉर्मूले से जुड़ा विवाद
कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर मौजूदा विवाद की जड़ 2023 में कांग्रेस सरकार बनने के समय किए गए कथित समझौते से जुड़ी है। डीके शिवकुमार समर्थक विधायकों का दावा है कि उस वक्त 2.5 साल–2.5 साल का पावर शेयरिंग फॉर्मूला तय हुआ था, जिसके तहत आधा कार्यकाल सिद्धारमैया और आधा कार्यकाल शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनना था। वहीं सिद्धारमैया समर्थक इस तरह के किसी भी औपचारिक समझौते से इनकार करते रहे हैं।
कांग्रेस सरकार ने 20 नवंबर 2025 को अपना 2.5 साल का कार्यकाल पूरा किया। इसके बाद से ही सत्ता संतुलन और नेतृत्व परिवर्तन को लेकर बयानबाजी तेज हो गई। शिवकुमार समर्थक कई विधायक दिल्ली जाकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से भी मिले थे, जिससे यह संकेत मिला कि पार्टी के भीतर दबाव बढ़ रहा है।
कैबिनेट विस्तार बनाम नेतृत्व परिवर्तन
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया कैबिनेट फेरबदल और विस्तार के पक्ष में नजर आ रहे हैं। उनका मानना है कि इससे सरकार की कार्यक्षमता बढ़ेगी और प्रशासनिक स्थिरता बनी रहेगी। दूसरी ओर, डीके शिवकुमार खेमा चाहता है कि पार्टी पहले नेतृत्व के मुद्दे पर स्पष्ट फैसला करे। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि अगर हाईकमान कैबिनेट विस्तार को हरी झंडी देता है, तो इसे इस संकेत के तौर पर देखा जाएगा कि सिद्धारमैया पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा कर सकते हैं। इससे शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की संभावनाएं कमजोर पड़ सकती हैं।
बीते महीनों की घटनाओं ने बढ़ाया तनाव
पिछले कुछ महीनों में दोनों नेताओं के बयानों और घटनाओं ने इस विवाद को और हवा दी है। नवंबर में सिद्धारमैया ने दिल्ली जाकर खड़गे से मुलाकात की थी और मंत्रिमंडल विस्तार पर चर्चा की थी। वहीं डीके शिवकुमार ने यह कहकर संकेत दिए थे कि वह हमेशा प्रदेश अध्यक्ष पद पर नहीं रहेंगे। इसके बाद उनके करीबी विधायकों का दिल्ली पहुंचना, बीजेपी द्वारा शिवकुमार पर तंज कसता AI वीडियो जारी करना और दोनों नेताओं की सोशल मीडिया पोस्ट ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया।
हालांकि, पार्टी आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद दोनों नेताओं ने साथ बैठकर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश भी की थी। इसके बावजूद ताजा घटनाक्रम से साफ है कि कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर असमंजस अब भी खत्म नहीं हुआ है।
कुल मिलाकर, सिद्धारमैया के बयान और डीके शिवकुमार की हालिया पोस्ट ने यह संकेत दे दिया है कि कर्नाटक में कांग्रेस नेतृत्व का सवाल अभी पूरी तरह सुलझा नहीं है। अब सबकी नजर राहुल गांधी और पार्टी हाईकमान पर टिकी है, जो आने वाले दिनों में इस सियासी उलझन को सुलझाने के लिए कोई स्पष्ट संकेत देते हैं या नहीं।
Author: THE CG NEWS
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