
छत्तीसगढ़ कांग्रेस में एक बार फिर संगठनात्मक असंतोष खुलकर सामने आ गया है। सूरजपुर जिले में ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर जिला कांग्रेस अध्यक्ष शशि सिंह ने खुला विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज को पत्र लिखकर मौजूदा ब्लॉक अध्यक्ष की नियुक्ति पर गंभीर सवाल उठाए हैं और इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है। यह मामला अब सिर्फ स्थानीय असहमति नहीं रह गया है, बल्कि संगठन के भीतर नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया को लेकर गहराते मतभेदों का संकेत माना जा रहा है।
शहर अध्यक्ष अलग होने के बावजूद शहरी ब्लॉक अध्यक्ष पर सवाल
जिला अध्यक्ष शशि सिंह ने अपने पत्र में सबसे बड़ा सवाल यही उठाया है कि जब सूरजपुर शहर कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति पहले ही अलग से की जा चुकी है, तो फिर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष का चयन शहरी क्षेत्र से क्यों किया गया। उन्होंने लिखा है कि यह फैसला न सिर्फ संगठनात्मक संतुलन के खिलाफ है, बल्कि इससे जमीनी कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी भी फैली हुई है। पत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि ब्लॉक संगठन का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को मजबूत करना होता है, ऐसे में शहरी चेहरा थोपना गलत संदेश देता है।
ग्रामीण-आदिवासी बहुल ब्लॉक में शहरी नेतृत्व पर आपत्ति
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि सूरजपुर ब्लॉक के अंतर्गत करीब 100 पंचायतें आती हैं और यह प्रेमनगर तथा भटगांव विधानसभा क्षेत्रों में फैला हुआ है। इन इलाकों की लगभग 95 प्रतिशत आबादी ग्रामीण है, जिसमें आदिवासी वर्ग की भागीदारी सबसे ज्यादा है। इसके बावजूद ब्लॉक अध्यक्ष का चयन शहरी क्षेत्र से किए जाने को जिला कांग्रेस नेतृत्व और कार्यकर्ताओं ने पूरी तरह असंगत बताया है। शशि सिंह ने इसे क्षेत्र की सामाजिक संरचना और राजनीतिक वास्तविकता के खिलाफ करार दिया है।
जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप
जिला अध्यक्ष के पत्र में संकेतों में यह आरोप भी लगाया गया है कि ब्लॉक अध्यक्ष की नियुक्ति में जमीनी कार्यकर्ताओं की भावना और मेहनत को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने लिखा है कि संगठन को मजबूत करने के लिए ऐसे चेहरों को आगे लाना चाहिए, जो पंचायत स्तर तक सक्रिय रहे हों और जिनकी स्वीकार्यता व्यापक हो। पत्र में यह भी कहा गया है कि युवा और ऊर्जावान कार्यकर्ता संतोष पावले इस पद के लिए सर्वमान्य और उपयुक्त नाम हैं, लेकिन उनकी अनदेखी की गई।
प्रदेश नेतृत्व पर बढ़ता दबाव
शशि सिंह का यह पत्र अब सिर्फ संगठनात्मक सुझाव नहीं रह गया है, बल्कि प्रदेश नेतृत्व की निर्णय प्रक्रिया पर सीधा सवाल बनता जा रहा है। पत्र के जरिए यह मांग की गई है कि पार्टी हित में मौजूदा ब्लॉक अध्यक्ष की नियुक्ति पर पुनर्विचार किया जाए और संगठनात्मक संतुलन को ध्यान में रखते हुए नया नाम तय किया जाए। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब कांग्रेस पहले ही संगठनात्मक पुनर्गठन और आगामी राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रही है।
शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचा मामला
इस पत्र की प्रतिलिपि केवल प्रदेश अध्यक्ष तक सीमित नहीं रखी गई है। इसे राष्ट्रीय महासचिव, प्रदेश प्रभारी, सह-प्रभारी, नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश महामंत्री संगठन को भी भेजा गया है। इससे साफ है कि जिला कांग्रेस नेतृत्व इस मुद्दे को गंभीरता से उठाना चाहता है और इसे उच्चतम स्तर तक पहुंचाने की रणनीति अपनाई गई है।
जिलाध्यक्ष का पक्ष सामने नहीं आया
पूरे मामले को लेकर जब जिलाध्यक्ष शशि सिंह से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो खबर लिखे जाने तक उनका आधिकारिक बयान सामने नहीं आ सका। हालांकि उनके पत्र की भाषा और उसमें उठाए गए मुद्दे संगठन के भीतर गहरे असंतोष की ओर इशारा कर रहे हैं।
पहले भी दिख चुकी है संगठन में खींचतान
यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस के भीतर इस तरह की असहमति सार्वजनिक हुई हो। इससे पहले जिलाध्यक्षों की चयन प्रक्रिया के दौरान भी संगठन में खींचतान सामने आई थी। 15 अक्टूबर को NSUI और यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने रायपुर जिले के पर्यवेक्षक पर लॉबिंग के आरोप लगाए थे। उस समय भी संगठन के भीतर गुटबाजी और प्रभाव के आरोप चर्चा में रहे थे।
सोशल मीडिया तक पहुंची नाराजगी
कांग्रेस के भीतर असंतोष का असर सोशल मीडिया पर भी दिख चुका है। कुछ समय पहले कांग्रेस नेता शिव सिंह ठाकुर ने शहर अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर सोशल मीडिया पर नाराजगी जाहिर की थी। हालांकि बाद में उन्होंने अपनी पोस्ट हटा ली और राजनीति छोड़ने से इनकार किया, लेकिन यह घटनाक्रम भी संगठन के भीतर असंतुलन का संकेत माना गया।
संगठन के लिए चेतावनी की घंटी
सूरजपुर में ब्लॉक अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर उठा विवाद कांग्रेस संगठन के लिए एक चेतावनी की तरह देखा जा रहा है। लगातार सामने आ रही अंदरूनी कलह यह सवाल खड़ा कर रही है कि क्या पार्टी जमीनी कार्यकर्ताओं की भावना और क्षेत्रीय संतुलन को नजरअंदाज कर रही है। अब निगाहें प्रदेश नेतृत्व के फैसले पर टिकी हैं कि वह इस विवाद को कैसे सुलझाता है और संगठन में भरोसा बहाल करने के लिए क्या कदम उठाता है।
Author: THE CG NEWS
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