
अगर आप घर से बाहर निकलते ही इस चिंता में आ जाते हैं कि वॉशरूम मिलेगा या नहीं, या फिर पब्लिक टॉयलेट इस्तेमाल करने का ख्याल आते ही बेचैनी बढ़ने लगती है, तो यह सिर्फ आदत नहीं बल्कि एक मानसिक स्थिति हो सकती है। साइकोलॉजिस्ट इसे वॉशरूम एंग्जाइटी या टॉयलेट एंग्जाइटी कहते हैं। यह समस्या आज के शहरी जीवन में तेजी से बढ़ रही है, लेकिन लोग इसे शर्म या झिझक की वजह से खुलकर स्वीकार नहीं करते।
वॉशरूम एंग्जाइटी क्या होती है
वॉशरूम एंग्जाइटी एक तरह की एंग्जाइटी डिसऑर्डर से जुड़ी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को सार्वजनिक शौचालय का उपयोग करने में डर, तनाव या असहजता महसूस होती है। कुछ लोगों को डर होता है कि वे ठीक से रिलैक्स नहीं कर पाएंगे, तो कुछ को साफ-सफाई, बदबू, कीटाणु या दूसरों की मौजूदगी से परेशानी होती है।
साइकोलॉजिस्ट बताते हैं कि यह समस्या केवल फिजिकल नहीं बल्कि पूरी तरह मानसिक होती है, जिसमें दिमाग शरीर को लगातार अलर्ट मोड में रखता है।
इसके आम लक्षण क्या हैं
वॉशरूम एंग्जाइटी से जूझ रहे लोगों में कई तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। पब्लिक प्लेस पर जाते ही पेट में भारीपन महसूस होना, पसीना आना, दिल की धड़कन तेज होना, बार-बार वॉशरूम की चिंता करना या जरूरत होने के बावजूद खुद को रोकना इसके आम संकेत हैं।
कुछ मामलों में लोग यात्रा से पहले खाना-पीना कम कर देते हैं, लंबी दूरी की ट्रैवलिंग से बचते हैं या सामाजिक कार्यक्रमों में जाने से कतराने लगते हैं। धीरे-धीरे यह समस्या व्यक्ति के आत्मविश्वास और सोशल लाइफ को भी प्रभावित करने लगती है।
वॉशरूम एंग्जाइटी क्यों होती है
साइकोलॉजिस्ट के अनुसार, इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। बचपन में किसी सार्वजनिक शौचालय से जुड़ा खराब अनुभव, साफ-सफाई को लेकर अत्यधिक चिंता, जर्म फोबिया, सामाजिक शर्मिंदगी का डर या परफॉर्मेंस एंग्जाइटी इसकी वजह बन सकते हैं।
इसके अलावा, जिन लोगों को पहले से एंग्जाइटी डिसऑर्डर, ओसीडी या पैनिक अटैक की समस्या रही हो, उनमें वॉशरूम एंग्जाइटी होने की संभावना ज्यादा होती है। दिमाग लगातार संभावित खतरे की कल्पना करता रहता है, जिससे शरीर स्वाभाविक प्रक्रिया भी ठीक से नहीं कर पाता।
क्या यह कोई गंभीर बीमारी है
विशेषज्ञों का कहना है कि वॉशरूम एंग्जाइटी जानलेवा बीमारी नहीं है, लेकिन अगर समय रहते इसे मैनेज न किया जाए, तो यह व्यक्ति की दिनचर्या, कामकाज और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकती है। लंबे समय तक जरूरत को रोकने से यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन, कब्ज और पेट से जुड़ी दूसरी समस्याएं भी हो सकती हैं।
साइकोलॉजिस्ट से जानिए मैनेजमेंट टिप्स
साइकोलॉजिस्ट बताते हैं कि वॉशरूम एंग्जाइटी को सही तरीके से मैनेज किया जा सकता है। सबसे पहले जरूरी है कि व्यक्ति इस समस्या को स्वीकार करे और खुद को दोष न दे। यह समझना जरूरी है कि यह कमजोरी नहीं, बल्कि एक मानसिक प्रतिक्रिया है।
धीरे-धीरे खुद को पब्लिक बाथरूम के माहौल के संपर्क में लाना मददगार हो सकता है। शुरुआत में कम भीड़ वाले साफ स्थान चुनें और समय के साथ अपने कम्फर्ट जोन को बढ़ाएं। गहरी सांस लेने की तकनीक और माइंडफुलनेस एक्सरसाइज दिमाग को शांत करने में मदद करती हैं।
साइकोलॉजिस्ट यह भी सलाह देते हैं कि जरूरत से ज्यादा इंटरनेट सर्च या नेगेटिव सोच से बचें। साफ-सफाई को लेकर बेसिक सावधानी रखें, लेकिन ओवरथिंकिंग न करें। अगर समस्या ज्यादा गंभीर हो, तो काउंसलिंग या कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी से काफी राहत मिल सकती है।
कब लेनी चाहिए प्रोफेशनल मदद
अगर वॉशरूम एंग्जाइटी की वजह से आपकी रोजमर्रा की जिंदगी, ट्रैवलिंग या कामकाज प्रभावित होने लगे, तो साइकोलॉजिस्ट या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना जरूरी है। समय पर मदद लेने से यह समस्या पूरी तरह कंट्रोल में लाई जा सकती है।
जरूरी संदेश
मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य। वॉशरूम एंग्जाइटी जैसी समस्याओं पर खुलकर बात करना और सही जानकारी लेना ही पहला कदम है। सही समझ और छोटे–छोटे बदलावों से इस डर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
Author: THE CG NEWS
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