
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि दुनिया में अमेरिका के दबदबे वाली वैश्विक व्यवस्था अब समाप्त हो चुकी है और यह मान लेना गलत होगा कि पुराना सिस्टम फिर से लौट आएगा। स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में बोलते हुए कार्नी ने वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में हो रहे बदलावों पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि दुनिया किसी क्रमिक बदलाव की नहीं, बल्कि टूटन की ओर बढ़ रही है और यह स्थिति आने वाले वर्षों में और गहरी हो सकती है।
कार्नी ने कहा कि जिस नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की बात लंबे समय से की जाती रही है, वह व्यवहार में कभी पूरी तरह लागू नहीं रही। उनके अनुसार, दुनिया हमेशा ताकत और राष्ट्रीय हितों के आधार पर संचालित होती रही है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पुराने वैश्विक सिस्टम से कनाडा जैसे देशों को लाभ मिला, लेकिन अब यह व्यवस्था टिकाऊ नहीं रह गई है और नए हालात इसकी सीमाएं उजागर कर रहे हैं।
टैरिफ को हथियार बनाने का आरोप
प्रधानमंत्री कार्नी ने कहा कि मौजूदा दौर की सच्चाई यह है कि ताकतवर देश आर्थिक रिश्तों को दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि टैरिफ को हथियार बनाया जा रहा है, वित्तीय प्रणालियों के जरिए देशों पर दबाव डाला जा रहा है और सप्लाई चेन की कमजोरियों का रणनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है। उनके मुताबिक, हाल के वर्षों में आए आर्थिक और राजनीतिक संकटों ने यह साफ कर दिया है कि अत्यधिक वैश्विक निर्भरता किसी भी देश के लिए जोखिम भरी हो सकती है।
कार्नी ने कहा कि कोविड महामारी, भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक टकरावों ने यह दिखा दिया है कि जब आपूर्ति श्रृंखलाएं बाधित होती हैं, तो देशों की आर्थिक और सामाजिक स्थिरता पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में अब केवल खुले बाजार और मुक्त व्यापार पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है।
कनाडा को नीति में बदलाव की जरूरत
अपने संबोधन में कार्नी ने चेतावनी दी कि यह मान लेना अब गलत है कि पुराने गठबंधन ही किसी देश की सुरक्षा और समृद्धि की गारंटी हैं। उन्होंने कहा कि जब आपसी जुड़ाव ही किसी देश को दूसरे के दबाव में ले आता है, तो आपसी फायदे के भ्रम में जीना खतरनाक हो सकता है। उनके अनुसार, कनाडा को ऐसी नीति अपनानी होगी जो सिद्धांतों पर आधारित होने के साथ-साथ व्यावहारिक भी हो।
कार्नी ने घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि कनाडा को ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और रणनीतिक उद्योगों में आत्मनिर्भरता बढ़ानी होगी। इसके साथ ही, किसी एक देश पर निर्भरता कम करने के लिए व्यापारिक साझेदारों में विविधता लाना समय की जरूरत है।
वैश्विक संस्थाओं की कमजोरी पर चिंता
कनाडाई प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्व व्यापार संगठन और संयुक्त राष्ट्र जैसी बहुपक्षीय संस्थाएं पहले जैसी प्रभावी नहीं रहीं। ऐसे में देशों को अब अपनी सुरक्षा, ऊर्जा और खाद्य जरूरतों के लिए खुद तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि जो देश खुद को खिला नहीं सकता, ऊर्जा नहीं दे सकता और अपनी रक्षा नहीं कर सकता, उसके पास अंतरराष्ट्रीय मंच पर बहुत सीमित विकल्प बचते हैं।
कार्नी ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल नियमों का पालन करने से अब सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती। मौजूदा वैश्विक माहौल में शक्ति संतुलन और रणनीतिक तैयारी पहले से कहीं ज्यादा अहम हो गई है।
फ्रांस ने भी जताई चिंता
कार्नी के बयान से पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में इसी तरह की चिंता जाहिर की थी। मैक्रों ने कहा कि दुनिया ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है, जहां अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनदेखी हो रही है और ताकतवर देशों की मनमानी बढ़ती जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह स्थिति खतरनाक है, क्योंकि इससे कमजोर देशों पर दबाव बढ़ता है और वैश्विक अस्थिरता को बढ़ावा मिलता है।
मैक्रों ने अमेरिका की व्यापार नीतियों पर भी सवाल उठाए और कहा कि ये नीतियां यूरोप को कमजोर करने और क्षेत्रीय संप्रभुता के खिलाफ काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया आज सुरक्षा और अर्थव्यवस्था, दोनों ही मोर्चों पर अस्थिर होती जा रही है।
WEF 2026 का महत्व
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 का आयोजन 19 से 23 जनवरी तक दावोस में हो रहा है। इस साल का विषय ‘संवाद की भावना’ रखा गया है। बैठक में 130 से अधिक देशों के करीब 3,000 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें 60 से ज्यादा देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख, G7 देशों के नेता और सैकड़ों वैश्विक कंपनियों के प्रमुख शामिल हैं।
इस बार दावोस की बैठक इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि दुनिया एक साथ युद्ध, टैरिफ वॉर, वैश्विक मंदी की आशंका, जलवायु संकट और तकनीकी बदलावों जैसे कई संकटों से जूझ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यहां होने वाली चर्चाओं का असर आने वाले वर्षों की वैश्विक नीतियों और बाजारों पर साफ दिखाई देगा।
Author: THE CG NEWS
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