
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद बुधवार शाम रायपुर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया। लगभग 379 दिन जेल में रहने के बाद बाहर आए लखमा का कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने फूल-मालाओं से स्वागत किया। रिहाई के बाद वे सबसे पहले महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने पहुंचे और फिर अपने निवास के लिए रवाना हो गए। जेल परिसर के बाहर बड़ी संख्या में समर्थकों की भीड़ जुटने से जेल रोड पर लंबा जाम लग गया और यातायात प्रभावित रहा।
रिहाई के दौरान उनके बेटे हरीश लखमा, विधायक विक्रम मंडावी, सावित्री मंडावी, पूर्व विधायक विकास उपाध्याय, कांग्रेस नेता गिरीश देवांगन, प्रमोद दुबे और संतराम नेताम मौजूद रहे। समर्थकों के बीच लखमा वाहन की बोनट पर सवार होकर निकले, जिससे राजनीतिक माहौल गर्म रहा।
न्यायपालिका पर भरोसा जताया
जेल से बाहर आने के बाद कवासी लखमा ने कहा कि उन्हें देश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और आने वाले समय में सच्चाई सामने आएगी। उन्होंने कहा कि वे बस्तर के जल-जंगल-जमीन के मुद्दों को उठाते रहे हैं और आगे भी आदिवासियों की आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, चरणदास महंत और टीएस सिंहदेव सहित पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त किया।
लखमा ने कहा कि जेल में रहते हुए उन्होंने देखा कि राज्य के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने सार्वजनिक रूप से उनके समर्थन में बयान दिया, जिसके लिए वे उनका धन्यवाद करते हैं। उन्होंने विधानसभा में अपनी बात रखने की इच्छा भी जताई।
लखमा की पत्नी बुधरी ने कहा कि रिहाई की चिंता में उनका स्वास्थ्य गिर गया था और अब राहत महसूस हो रही है। बेटे हरीश लखमा ने इसे सत्य की जीत बताया।
भाजपा ने उठाए सवाल
लखमा की रिहाई के बाद भाजपा ने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा। भाजपा प्रवक्ता अमित चिमनानी ने कहा कि जमानत पर रिहा होने के बावजूद कांग्रेस के शीर्ष नेता जेल पहुंचकर उनका स्वागत करने नहीं आए। उन्होंने कहा कि न दीपक बैज, न भूपेश बघेल, न चरणदास महंत और न ही टीएस सिंहदेव वहां पहुंचे, जिससे कांग्रेस की अंदरूनी स्थिति स्पष्ट होती है।
इस बयान के बाद मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।
जमानत की शर्तें और गिरफ्तारी
कवासी लखमा को प्रवर्तन निदेशालय ने 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था। सात दिन की पूछताछ के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था और तब से वे रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दी है, लेकिन शर्तों के साथ। उन्हें छत्तीसगढ़ से बाहर रहना होगा और केवल कोर्ट पेशी के दौरान राज्य में आ सकेंगे। साथ ही पासपोर्ट जमा करना और वर्तमान पता व मोबाइल नंबर संबंधित थाने में दर्ज कराना अनिवार्य किया गया है।
सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने जांच एजेंसी से लंबित जांच पर सवाल भी पूछे थे और जांच अधिकारी से व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने को कहा था।
क्या है शराब घोटाला मामला
प्रवर्तन निदेशालय और आर्थिक अपराध शाखा छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले की जांच कर रही है, जिसमें दो हजार करोड़ रुपए से अधिक की अनियमितता का आरोप है। जांच एजेंसियों के अनुसार एक कथित सिंडिकेट के जरिए शराब नीति में बदलाव, कमीशन वसूली और अवैध बिक्री का नेटवर्क संचालित किया गया।
जांच में आरोप लगाया गया कि डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी कमीशन लिया गया, नकली होलोग्राम लगाकर शराब सरकारी दुकानों से बेची गई और सप्लाई एरिया में फेरबदल कर धन उगाही की गई। एजेंसियों का दावा है कि इससे सरकारी राजस्व को नुकसान हुआ और अवैध कमाई सिंडिकेट के पास पहुंची। मामले में आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय में विचाराधीन है।
कवासी लखमा की रिहाई के साथ एक ओर उनके समर्थक इसे राहत मान रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे केवल जमानत बताते हुए राजनीतिक हमले कर रहा है। ऐसे में कानूनी लड़ाई के साथ यह मुद्दा राज्य की राजनीति में आगे भी प्रमुख बना रहने की संभावना है।
Author: THE CG NEWS
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