
केंद्र सरकार के चार नए लेबर कोड के विरोध में 12 फरवरी को बुलाए गए राष्ट्रव्यापी भारत बंद का छत्तीसगढ़ में मिला-जुला असर देखने को मिला। जहां एक ओर रायगढ़ और कोरबा जैसे औद्योगिक और खनन क्षेत्रों में कोयला उत्पादन और परिवहन प्रभावित रहा, वहीं रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग सहित कई बड़े शहरों में व्यापारिक गतिविधियां सामान्य रहीं। चैंबर ऑफ कॉमर्स और प्रमुख व्यापारिक संगठनों के समर्थन नहीं मिलने से शहरी बाजारों में बंद का व्यापक असर नहीं दिखा।
खनन क्षेत्रों में उत्पादन प्रभावित
रायगढ़ जिले के छाल कोल खदान के पास ट्रेड यूनियन के सदस्यों ने सुबह से धरना-प्रदर्शन शुरू किया। हड़ताल के चलते जिले की चार कोयला खदानों में कामकाज बंद रहा और कोयला परिवहन पूरी तरह ठप हो गया। यूनियन नेताओं का कहना है कि नए श्रम कानून मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करेंगे और कार्य अवधि 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे तक की जा सकती है। उन्होंने फिक्स टर्म रोजगार व्यवस्था पर भी आपत्ति जताई, जिसे वे स्थायी नौकरियों के लिए खतरा मानते हैं।
कोरबा जिले में दीपका, कुसमुंडा और मानिकपुर खदानों में भी एकदिवसीय प्रदर्शन के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ। श्रमिक संगठनों के साथ कांग्रेस नेताओं ने भी खदान क्षेत्रों में पहुंचकर हड़ताल का समर्थन किया। नेताओं ने इसे श्रमिक सम्मान और अधिकारों की लड़ाई बताया।
मनेन्द्रगढ़ की हल्दीबाड़ी भूमिगत कोयला खदान में भी कामकाज आंशिक रूप से प्रभावित रहा। एचएमएस, एटक, इंटक और सीटू सहित कई संगठनों ने प्रदर्शन किया और चारों लेबर कोड को वापस लेने की मांग दोहराई। एचएमएस के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो भविष्य में अनिश्चितकालीन हड़ताल की जा सकती है।
शहरी बाजारों में बंद बेअसर
राजधानी रायपुर में बंद का असर सीमित रहा। चैंबर ऑफ कॉमर्स और अन्य व्यापारिक संगठनों ने हड़ताल का समर्थन नहीं किया, जिसके कारण प्रमुख बाजार खुले रहे। मालवीय रोड, एमजी रोड, सदर बाजार, पंडरी कपड़ा मार्केट और लाखे नगर जैसे प्रमुख बाजारों में सामान्य दिनों की तरह खरीदारी होती रही। सड़कों पर यातायात भी सामान्य रहा और पेट्रोल पंप, स्कूल-कॉलेज तथा अन्य शैक्षणिक संस्थान खुले रहे।
बिलासपुर में भी बंद का खास असर नहीं दिखा। गोल बाजार, सदर बाजार और बुधवारी सहित अन्य प्रमुख बाजारों में व्यापार सामान्य रूप से चलता रहा। हालांकि ट्रेड यूनियन से जुड़े संगठनों ने नेहरू चौक पर प्रदर्शन किया और ज्ञापन सौंपा। जांजगीर-चांपा जिले में भी दुकानें खुली रहीं, जबकि ट्रेड यूनियन ने एसडीएम कार्यालय तक रैली निकालकर अपनी मांगों का ज्ञापन दिया।
दुर्ग और भिलाई में भी बाजार खुले रहे, लेकिन भिलाई स्टील प्लांट के मुख्य द्वार के बाहर ट्रेड यूनियन नेताओं और सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए श्रम कानूनों को मजदूर विरोधी बताया।
यूनियनों की प्रमुख मांगें
संयुक्त ट्रेड यूनियन मंच ने चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने की मांग की है। इसके अलावा ड्राफ्ट सीड बिल, बिजली संशोधन विधेयक और कुछ अन्य प्रस्तावित कानूनों को भी वापस लेने की मांग उठाई गई। संगठनों का कहना है कि नए प्रावधानों से श्रमिकों की सुरक्षा, रोजगार स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
रायपुर में आयोजित सभा में संयुक्त मंच के संयोजक धर्मराज महापात्र ने कहा कि नए लेबर कोड से श्रमिकों के अधिकार सीमित हो सकते हैं और निजीकरण की प्रक्रिया तेज हो सकती है। उन्होंने प्रदेश के श्रमिकों से एकजुट होकर आंदोलन को मजबूत करने की अपील की।
आर्थिक गतिविधियों पर सीमित प्रभाव
व्यापार और सेवा क्षेत्र में बंद का व्यापक असर नहीं होने से राज्य की कुल आर्थिक गतिविधियों पर प्रभाव सीमित रहा। हालांकि खनन और औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन और परिवहन बाधित रहने से संबंधित क्षेत्रों में अल्पकालिक असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में हड़ताल लंबी अवधि तक चलती है, तो कोयला आपूर्ति और बिजली उत्पादन पर प्रभाव दिख सकता है।
कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ में भारत बंद का असर क्षेत्रवार अलग-अलग रहा—खनन क्षेत्रों में गतिविधियां प्रभावित हुईं, जबकि प्रमुख शहरों में व्यापारिक जीवन लगभग सामान्य बना रहा।
Author: THE CG NEWS
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