
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कहा है कि भारत अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का केवल उपभोक्ता नहीं रहेगा, बल्कि निर्माता के रूप में उभरेगा। उनका लक्ष्य 2047 तक भारत को दुनिया की टॉप-3 एआई महाशक्तियों में शामिल करना है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि एआई नौकरियां खत्म नहीं करेगा, बल्कि युवाओं की क्षमता बढ़ाकर नए रोजगार अवसर पैदा करेगा।
प्रधानमंत्री ने यह बातें ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के दौरान न्यूज एजेंसी ANI को दिए इंटरव्यू में कहीं। यह समिट 16 फरवरी से नई दिल्ली के Bharat Mandapam में आयोजित हो रही है और 20 फरवरी तक चलेगी। पीएम मोदी ने समिट का औपचारिक उद्घाटन किया।
युवाओं के रोजगार को लेकर भरोसा
युवाओं में यह आशंका है कि एआई उनकी नौकरियां छीन लेगा। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि इस डर का सबसे अच्छा इलाज तैयारी है। सरकार स्किलिंग और री-स्किलिंग पर बड़ा निवेश कर रही है। उन्होंने कहा कि तकनीक इतिहास में कभी भी रोजगार पूरी तरह खत्म नहीं करती, बल्कि काम का स्वरूप बदलती है और नए अवसर पैदा करती है।
प्रधानमंत्री ने एआई को ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ बताया, जो डॉक्टरों, शिक्षकों और वकीलों जैसे पेशेवरों की क्षमता बढ़ाकर उन्हें अधिक लोगों की मदद करने में सक्षम बनाएगा। उन्होंने कहा कि स्टैनफोर्ड ग्लोबल एआई इंडेक्स 2025 में भारत तीसरे स्थान पर है, जो देश की तेज प्रगति को दर्शाता है।
सुरक्षा और नियमन पर जोर
एआई के दुरुपयोग और डीपफेक जैसे मामलों पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि तकनीक एक शक्तिशाली उपकरण है, लेकिन उसका इस्तेमाल इंसानी नीयत पर निर्भर करता है। उन्होंने एआई पर वैश्विक स्तर पर एक समझौते की जरूरत बताई, जिसमें मानव निगरानी, डिजाइन से सुरक्षा और आतंकवाद या डीपफेक जैसे दुरुपयोग पर सख्त प्रतिबंध शामिल हों।
भारत ने जनवरी 2025 में ‘इंडिया एआई सेफ्टी इंस्टीट्यूट’ की स्थापना की है, जो महिलाओं को निशाना बनाने वाले डीपफेक, बच्चों की सुरक्षा और बुजुर्गों पर प्रभाव जैसे जोखिमों पर काम करेगा। डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के जरिए डेटा सुरक्षा को भी मजबूत किया गया है।
आईटी सेक्टर के लिए अवसर
प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई आईटी सेक्टर के लिए चुनौती के साथ-साथ बड़ा अवसर भी है। 2030 तक भारत का आईटी सेक्टर 400 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। सामान्य एआई टूल्स भले ही आम हो गए हों, लेकिन जटिल बिजनेस समस्याओं के समाधान में आईटी कंपनियों की भूमिका अहम बनी रहेगी।
सरकार के ‘इंडिया एआई मिशन’ के तहत हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जीपीयू क्षमता का लक्ष्य पार कर लिया गया है और हेल्थकेयर, कृषि तथा शिक्षा में चार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए हैं।
‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ का मंत्र
समिट का मोटो ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ रखा गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई का उद्देश्य केवल नवाचार नहीं, बल्कि उसका सकारात्मक प्रभाव सुनिश्चित करना है। तकनीक का मकसद इंसान की मदद करना होना चाहिए, न कि उसे प्रतिस्थापित करना।
विकसित भारत 2047 में एआई की भूमिका
प्रधानमंत्री ने ‘विकसित भारत 2047’ के विजन में एआई को केंद्रीय भूमिका दी। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य क्षेत्र में टीबी और डायबिटीज जैसी बीमारियों की शुरुआती पहचान में एआई मदद कर रहा है। शिक्षा में ग्रामीण बच्चों को उनकी भाषा में एआई आधारित सहायता मिल रही है।
कृषि और डेयरी क्षेत्र में भी एआई का उपयोग बढ़ रहा है। अमूल जैसी संस्थाएं लाखों महिला किसानों को पशु स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दे रही हैं। मौसम और फसल संबंधी सटीक सलाह देने के लिए भी एआई आधारित प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और एआई का संगम
प्रधानमंत्री ने कहा कि आधार और यूपीआई जैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के साथ एआई का मेल सार्वजनिक सेवाओं को अधिक कुशल बनाएगा। इससे कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचाने और धोखाधड़ी रोकने में मदद मिलेगी।
आत्मनिर्भर एआई का विजन
प्रधानमंत्री का कहना है कि आत्मनिर्भर भारत के लिए एआई निर्माण पर जोर जरूरी है। उनका विजन संप्रभुता, समावेशिता और नवाचार पर आधारित है। भारत अपने एआई मॉडल विकसित करेगा, जो भारतीय भाषाओं में अरबों लोगों की सेवा कर सकें।
उन्होंने कहा कि भारत एआई क्रांति का केवल सहभागी नहीं, बल्कि उसे आकार देने वाला देश बनेगा। उनका लक्ष्य है कि भारत 2047 तक एआई निर्माण में वैश्विक शीर्ष तीन देशों में शामिल हो और लाखों रोजगार सृजित करे।
Author: THE CG NEWS
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