जहरीली हवा से अल्जाइमर का खतरा बढ़ रहा है: पौने तीन करोड़ लोगों पर रिसर्च में बड़ा खुलासा

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हाल के वैज्ञानिक अध्ययन में यह स्पष्ट हो गया है कि प्रदूषित हवा केवल फेफड़ों और हृदय के लिए ही खतरनाक नहीं है, बल्कि यह दिमागी स्वास्थ्य को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। एक व्यापक अध्ययन में पौने तीन करोड़ लोगों के डेटा का विश्लेषण किया गया, जिसमें जहरीली हवा के संपर्क में रहने से अल्जाइमर रोग और डिमेंशिया जैसी न्यूरोडीजनेरेटिव बीमारियों के जोखिम को बढ़ता पाया गया है। यह शोध स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन गया है और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में सख्त नीतियों की जरूरत को और अधिक बल देता है।

रिसर्च का दायरा और निष्कर्ष

हाल ही में प्रकाशित अध्ययन में लगभग 29.5 मिलियन (पौने तीन करोड़) प्रतिभागियों को शामिल किया गया। शोध का लक्ष्य यह समझना था कि पर्यावरणीय कारक, विशेष रूप से वायु प्रदूषण, अल्जाइमर और संबंधित डिमेंशिया जोखिम को कैसे प्रभावित करते हैं। शोधकर्ताओं ने अध्ययन में वायु प्रदूषण के प्रमुख तत्वों जैसे पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5 और PM10), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) और ओज़ोन की अधिकता को मापा और प्रतिभागियों के स्वास्थ्य परिणामों की तुलना की।

निष्कर्ष बताते हैं कि जिन क्षेत्रों में वायु प्रदूषण के स्तर अधिक थे, वहां रहने वाले लोगों में अल्जाइमर और डिमेंशिया का जोखिम स्पष्ट रूप से बढ़ा हुआ पाया गया। अध्ययन के मुताबिक, PM2.5 जैसी सूक्ष्म कणीय प्रदूषकों से लगातार प्रभावित होने पर अल्जाइमर का जोखिम लगभग 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। वहीं NO2 और ओज़ोन का अतिरिक्त प्रभाव भी न्यूरोडीजनेरेटिव बदलावों को बढ़ावा दे सकता है।

कैसे होती है दिमाग पर असर

शोध के अनुसार, जहरीली हवा के कण सीधे दिमाग तक पहुँच सकते हैं। छोटे प्रदूषक कण (PM2.5) जब फेफड़ों में प्रवेश करते हैं, तो वे रक्त प्रवाह में मिल सकते हैं और रक्त–मस्तिष्क बाधा को पार कर दिमाग तक पहुँच सकते हैं। इससे सूजन, ऑक्सीडेटिव तनाव और न्यूरोनल नुकसान जैसे जैविक बदलाव होते हैं, जो अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी स्थितियों को बढ़ा सकते हैं।

डॉ. नीलम वर्मा, न्यूरोलॉजिस्ट और अध्ययन से जुड़ी एक विशेषज्ञ, कहती हैं कि प्रदूषण के कारण होने वाली सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव सीधे मस्तिष्क के हिस्सों पर असर डालते हैं जो याददाश्त और संज्ञानात्मक क्षमता से जुड़े होते हैं। समय के साथ, यह प्रभाव न्यूरोडीजनेरेटिव प्रक्रियाओं को तेज कर सकता है, जिससे अल्जाइमर जैसी बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।

दुनियाभर में बढ़ता प्रदूषण और अल्जाइमर

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, वायु प्रदूषण मानव स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा जोखिम कारक है। वर्ष 2024 की रिपोर्ट बताती है कि विश्व भर में लगभग 99 प्रतिशत आबादी ऐसे स्थानों पर रहती है जहां वायु प्रदूषण के स्तर WHO की सुरक्षित सीमाओं से ऊपर हैं। इससे कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों, सांस की बीमारियों और अब न्यूरोडीजनेरेटिव रोगों का बढ़ता खतरा जुड़ा हुआ है।

शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि शहरों में रहने वाले बुज़ुर्ग आबादी, विशेषकर उच्च यातायात और औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोग, अधिक प्रभावित होते हैं। इन इलाकों में हवा में अधिक NO2 और PM2.5 के स्तर अल्जाइमर जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

बचाव और समुचित उपायों की जरूरत

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों के जोखिम को कम करने के लिए सख्त सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों की जरूरत है। निम्नलिखित सुझाव विशेषज्ञों द्वारा दिए जा रहे हैं:

1. वायु गुणवत्ता मानकों को कड़ा बनाना:

सरकारों को प्रदूषण नियंत्रण के नियमों को और मजबूत करना चाहिए और उद्योगों, वाहनों और निर्माण गतिविधियों से निकलने वाले प्रदूषकों को नियंत्रित करना चाहिए।

2. हरित आवागमन को बढ़ावा:

साइकिलिंग, चलना और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाने से प्रदूषण कम हो सकता है। इलेक्ट्रिक वाहन नीति को तेजी से लागू करना जरूरी है।

3. हरित क्षेत्र बढ़ाने की पहल:

शहरों में हरित क्षेत्रों, पार्कों और वृक्षारोपण को बढ़ावा देने से हवा में प्रदूषण घटता है और वातावरण साफ होता है।

4. व्यक्तिगत सावधानियाँ:

लंबे समय तक बाहरी प्रदूषण में रहने से बचें, मास्क का उपयोग करें और घर के अंदर एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के आसपास।

तैयारी और समय रहते चेतना

विशेषज्ञों का मानना है कि अल्जाइमर जैसे रोग का जोखिम केवल उम्र या आनुवंशिकता से नहीं जुड़ा है, बल्कि पर्यावरणीय कारक भी इसे प्रभावित करते हैं। पौने तीन करोड़ लोगों पर आधारित यह शोध साफ संकेत देता है कि जहरीली हवा न केवल फेफड़ों और दिल को प्रभावित करती है, बल्कि दिमाग की कार्यक्षमता और दीर्घकालिक मानसिक स्वास्थ्य को भी कमजोर कर सकती है।

स्वास्थ्य जगत अब प्रदूषण और न्यूरोलॉजिकल रोगों के बीच इस मजबूत संबंध को पहचान रहा है। समय रहते चेतना और क़दम उठाने से हम न केवल आज की पीढ़ी को सुरक्षित रख सकते हैं, बल्कि भविष्य में आने वाली चुनौतियों से भी बेहतर तरीके से निपट सकते हैं।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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