घर के आसपास स्ट्रीट फूड की भरमार से बढ़ सकता है शुगर और मोटापे का खतरा: स्टडी में खुलासा

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शोध में सामने आया—फूड एनवायरनमेंट बदलता है खानपान; विशेषज्ञों ने दी आदत सुधारने की सलाह

घर के आसपास स्ट्रीट फूड की आसान उपलब्धता आपकी खानपान की आदतों और स्वास्थ्य पर सीधा असर डाल सकती है। हाल ही में प्रकाशित एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में पाया गया है कि जिन इलाकों में तली-भुनी और प्रोसेस्ड फूड की दुकानें ज्यादा होती हैं, वहां रहने वाले लोगों में मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और उच्च रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) का जोखिम अधिक देखा गया। शोधकर्ताओं के अनुसार, “फूड एनवायरनमेंट” यानी आसपास उपलब्ध खाने के विकल्प व्यक्ति की रोजमर्रा की डाइट को प्रभावित करते हैं।

अध्ययन में शहरी बस्तियों के हजारों प्रतिभागियों के डेटा का विश्लेषण किया गया। जिन लोगों के घर के 500 मीटर के दायरे में फास्ट फूड और स्ट्रीट फूड की दुकानों की संख्या अधिक थी, उनमें उच्च कैलोरी, ज्यादा नमक और चीनी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन अधिक पाया गया। परिणामस्वरूप, उनके बॉडी मास इंडेक्स (BMI) और ब्लड शुगर स्तर औसतन अधिक थे। विशेषज्ञों का कहना है कि सुविधा और सस्ती कीमत के कारण लोग बार-बार बाहर का खाना चुनते हैं, जिससे दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिम बढ़ता है।

क्यों बढ़ता है जोखिम?

स्ट्रीट फूड में अक्सर परिष्कृत आटा, ट्रांस-फैट, ज्यादा नमक और शुगर का इस्तेमाल होता है। बार-बार सेवन से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ सकती है, जो आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज का कारण बनती है। साथ ही, हाई-कैलोरी फूड नियमित रूप से लेने से वजन बढ़ना और पेट के आसपास चर्बी जमा होना आम है। पोषण विशेषज्ञ बताते हैं कि “कैलोरी-डेंस, न्यूट्रिएंट-पुअर” फूड यानी जिनमें कैलोरी ज्यादा और पोषक तत्व कम हों, वे लंबे समय में मेटाबॉलिक सिंड्रोम का जोखिम बढ़ाते हैं।

बच्चों और युवाओं पर असर

अध्ययन में यह भी सामने आया कि स्कूल और कॉलेज के पास जंक फूड की उपलब्धता बच्चों और युवाओं के खानपान को अधिक प्रभावित करती है। कम उम्र में अस्वास्थ्यकर आदतें बन जाने से आगे चलकर मोटापा और शुगर का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों ने माता-पिता और स्कूल प्रशासन से स्वस्थ विकल्प बढ़ाने की अपील की है।

फूड हैबिट सुधारने के 11 व्यावहारिक टिप्स

1.घर का बना खाना प्राथमिकता दें – सप्ताह की मील-प्लानिंग करें और अधिकतर भोजन घर पर तैयार करें।

2.हेल्दी स्नैक साथ रखें – बाहर निकलते समय फल, नट्स या रोस्टेड चना रखें ताकि अचानक भूख में जंक फूड न चुनें।

3.लेबल पढ़ने की आदत डालें – पैकेज्ड फूड खरीदते समय शुगर, सोडियम और ट्रांस-फैट की मात्रा देखें।

4.तला हुआ कम, भुना/उबला ज्यादा – पकाने की विधि बदलें; एयर-फ्राइंग, स्टीमिंग और ग्रिलिंग अपनाएं।

5.शुगर ड्रिंक्स से दूरी – सोडा और मीठे पेयों की जगह पानी, नारियल पानी या बिना शक्कर की चाय लें।

6.पोर्टियन कंट्रोल – प्लेट छोटी रखें और मात्रा नियंत्रित करें; दोबारा सर्विंग से बचें।

7.प्रोटीन और फाइबर बढ़ाएं – दाल, अंकुरित अनाज, अंडा, पनीर और सब्जियां शामिल करें; ये देर तक तृप्त रखते हैं।

8.नियमित समय पर भोजन – अनियमित खाने से ओवरईटिंग बढ़ती है; तय समय पर खाना खाएं।

9.साप्ताहिक ‘आउटिंग फूड’ सीमा तय करें – बाहर खाने की संख्या सीमित करें, जैसे सप्ताह में एक बार।

10.शारीरिक गतिविधि बढ़ाएं – रोज 30–45 मिनट तेज चाल से चलना या व्यायाम वजन नियंत्रण में मदद करता है।

11.माइंडफुल ईटिंग – टीवी/मोबाइल देखते हुए खाने से बचें; धीरे-धीरे और ध्यान से खाएं।

सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी नियोजन में स्वस्थ फूड विकल्पों को बढ़ावा देना जरूरी है—जैसे ताजे फल-सब्जियों की दुकानों की उपलब्धता, स्कूलों के आसपास जंक फूड पर नियंत्रण और पोषण संबंधी जागरूकता अभियान।

निष्कर्ष स्पष्ट है: केवल इच्छाशक्ति ही नहीं, बल्कि आसपास का फूड एनवायरनमेंट भी हमारे स्वास्थ्य को आकार देता है। यदि घर के पास स्ट्रीट फूड की भरमार है, तो सजग रहना और स्वस्थ विकल्प चुनना पहले से कहीं अधिक जरूरी है। छोटीछोटी आदतों में बदलाव लंबे समय में शुगर और मोटापे के जोखिम को कम कर सकता है।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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