
होलिका दहन से रंगोत्सव तक, बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश
भारत में होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व इस वर्ष देशभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। होली से एक दिन पहले होलिका दहन की परंपरा निभाई जाती है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भक्त प्रह्लाद की भक्ति और भगवान विष्णु की कृपा से होलिका का दहन हुआ था। इसी घटना की स्मृति में हर वर्ष होलिका दहन किया जाता है।
होलिका दहन का धार्मिक महत्व
होलिका दहन को ‘छोटी होली’ भी कहा जाता है। इस दिन शाम के समय शुभ मुहूर्त में लकड़ी और उपलों से सजाई गई होलिका में अग्नि प्रज्वलित की जाती है। श्रद्धालु अग्नि की परिक्रमा कर परिवार की सुख-समृद्धि और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति की कामना करते हैं। कई स्थानों पर गेहूं की बालियां और चने भूनकर प्रसाद के रूप में वितरित किए जाते हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, होलिका की अग्नि में अन्न की आहुति देने से रोग और दोष दूर होते हैं।
रंगों का उत्सव और सामाजिक समरसता
होलिका दहन के अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है। यह दिन आपसी मनमुटाव भूलकर गले मिलने और भाईचारे का संदेश देने का अवसर होता है। उत्तर भारत में विशेष रूप से ब्रज क्षेत्र की लठमार होली, बरसाने और नंदगांव की परंपराएं, तथा वृंदावन की फूलों वाली होली विश्वभर में प्रसिद्ध हैं। वहीं, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में फगुआ गीतों की धूम रहती है।
धार्मिक दृष्टि से होली को भगवान श्रीकृष्ण से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि श्रीकृष्ण ने राधा और गोपियों के साथ रंग खेलकर इस परंपरा की शुरुआत की थी। यही कारण है कि मथुरा-वृंदावन में होली कई दिनों तक विभिन्न स्वरूपों में मनाई जाती है।
मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना
देश के प्रमुख मंदिरों में होली के अवसर पर विशेष पूजा और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। श्रद्धालु भगवान को गुलाल और अबीर अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। कई स्थानों पर भंडारे और धार्मिक शोभायात्राएं भी निकाली जाती हैं। मंदिर समितियों ने सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
पर्यावरण और स्वास्थ्य का ध्यान
हाल के वर्षों में पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए प्राकृतिक रंगों से होली खेलने पर जोर दिया जा रहा है। केमिकल युक्त रंगों से त्वचा और आंखों को नुकसान हो सकता है। धार्मिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने लोगों से अपील की है कि वे हर्बल गुलाल और फूलों की होली को बढ़ावा दें। साथ ही, पानी की बचत और स्वच्छता बनाए रखने की भी सलाह दी जा रही है।
प्रशासन की तैयारियां
त्योहार को शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से मनाने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। प्रमुख शहरों में पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई है और संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने भी आपातकालीन सेवाओं को अलर्ट पर रखा है।
सांस्कृतिक और आर्थिक पहलू
होली का त्योहार स्थानीय बाजारों के लिए भी महत्वपूर्ण होता है। मिठाइयों, रंगों और पिचकारियों की बिक्री से व्यापार में रौनक आती है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोकगीत, ढोल-मांदर और पारंपरिक नृत्य से उत्सव का माहौल बनता है। यह पर्व सामाजिक दूरी को कम कर आपसी प्रेम और सद्भाव को मजबूत करता है।
संदेश
होली हमें यह सिखाती है कि जीवन में चाहे कितनी भी चुनौतियां आएं, अंततः सत्य और भक्ति की जीत होती है। होलिका दहन हमें अहंकार और बुराई से दूर रहने का संदेश देता है, जबकि रंगों की होली आपसी प्रेम और एकता का प्रतीक है।
इस वर्ष भी देशभर में होली को आस्था, उत्साह और सामाजिक समरसता के साथ मनाने की तैयारियां जोरों पर हैं। धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए, पर्यावरण और स्वास्थ्य का ध्यान रखकर इस पर्व को सुरक्षित और आनंदमय बनाने की अपील की जा रही है।
Author: THE CG NEWS
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