छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर समेत 5 को हाईकोर्ट से जमानत, DMF केस के चलते दो आरोपी फिलहाल जेल में ही रहेंगे

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छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 3200 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाला मामले में राज्य हाईकोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा और कारोबारी अनवर ढेबर समेत पांच आरोपियों को जमानत दे दी है। जस्टिस अरविंद्र वर्मा की सिंगल बेंच ने सुनवाई के दौरान ट्रायल में हो रही देरी को जमानत का प्रमुख आधार माना। हालांकि, जमानत मिलने के बावजूद अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर को फिलहाल जेल में ही रहना होगा, क्योंकि वे कथित 550 करोड़ रुपये के डीएमएफ (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन) घोटाले में भी आरोपी हैं और उस मामले में उन्हें राहत नहीं मिली है।

ट्रायल में देरी बना जमानत का आधार

हाईकोर्ट में आरोपियों की ओर से दलील दी गई कि वे करीब 22 महीने से जेल में बंद हैं और अब तक ट्रायल शुरू नहीं हो पाया है। बचाव पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि लंबी न्यायिक हिरासत न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, यश पुरोहित, नितेश पुरोहित और दीपेंद्र चावला की जमानत याचिका मंजूर कर ली। हालांकि डीएमएफ मामले में अलग से दर्ज प्रकरण के चलते टुटेजा और ढेबर की रिहाई फिलहाल संभव नहीं है, जबकि अन्य तीन आरोपी जेल से बाहर आ सकेंगे।

सुप्रीम कोर्ट से मिली थी दोबारा याचिका की छूट

इससे पहले विशेष अदालत और हाईकोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। शीर्ष अदालत ने जमानत याचिका खारिज करते हुए पांच महीने बाद दोबारा हाईकोर्ट में आवेदन करने की छूट दी थी। उसी के बाद पुनः दायर याचिका पर अब यह आदेश आया है।

क्या है 3200 करोड़ का कथित घोटाला

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में सामने आया कि राज्य में पिछली सरकार के दौरान आबकारी नीति में बदलाव और कथित नकली होलोग्राम के जरिए शराब की अवैध बिक्री कर राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया। आरोप है कि विशेष सप्लायर्स और आबकारी विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर एक सिंडिकेट बनाया गया, जिसने सरकारी दुकानों के माध्यम से कथित तौर पर नकली होलोग्राम लगी शराब बेची। जांच एजेंसियों के अनुसार, इससे हजारों करोड़ रुपये का अवैध लाभ अर्जित किया गया।

ईडी की रिपोर्ट के आधार पर आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने भी मामला दर्ज किया। इस प्रकरण में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, कारोबारी अनवर ढेबर, सौम्या चौरसिया समेत कई अधिकारियों और कारोबारियों को आरोपी बनाया गया है।

A, B और C कैटेगरी में कथित अनियमितताएं

जांच एजेंसियों के अनुसार, कथित घोटाले को तीन स्तरों पर अंजाम दिया गया। पहले स्तर पर डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी कमीशन लेने का आरोप है। दूसरे स्तर पर नकली होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों से शराब बेचने और टैक्स चोरी करने की बात सामने आई। तीसरे स्तर पर डिस्टलरीज के सप्लाई जोन में बदलाव कर अवैध वसूली का आरोप लगाया गया। जांच में यह भी दावा किया गया कि लाखों पेटी शराब बिना शुल्क अदा किए बाजार में बेची गई।

राजनीतिक असर और आगे की प्रक्रिया

इस मामले ने राज्य की राजनीति में भी बड़ा असर डाला है। विपक्ष लगातार इसे पिछली सरकार के दौरान हुआ बड़ा घोटाला बता रहा है, जबकि आरोपियों की ओर से सभी आरोपों को निराधार बताया गया है। फिलहाल हाईकोर्ट के जमानत आदेश के बाद भी कानूनी लड़ाई जारी रहेगी। ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होने और साक्ष्यों की जांच के बाद ही मामले में अंतिम निर्णय सामने आएगा।

हाईकोर्ट का यह आदेश फिलहाल आरोपियों के लिए आंशिक राहत माना जा रहा है, लेकिन डीएमएफ प्रकरण के चलते दो प्रमुख आरोपी अभी भी जेल में रहेंगे। आगे की सुनवाई और जांच इस बहुचर्चित मामले की दिशा तय करेगी।

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Author: THE CG NEWS

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