
कर्नाटक सरकार ने बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लेने की घोषणा की है। राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के उपयोग पर रोक लगाने की योजना बनाई जा रही है। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने शुक्रवार को 2026-27 के राज्य बजट भाषण के दौरान इस प्रस्ताव की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में बच्चों और किशोरों के बीच मोबाइल फोन और सोशल मीडिया का उपयोग तेजी से बढ़ा है, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई और व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। सरकार का मानना है कि इस प्रवृत्ति को नियंत्रित करना जरूरी हो गया है।
देश का पहला राज्य बनने की तैयारी
अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो कर्नाटक बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर रोक लगाने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने कहा कि सरकार फिलहाल इस योजना को लागू करने के लिए कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर काम कर रही है। राज्य सरकार का उद्देश्य बच्चों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुष्प्रभावों से बचाना और सुरक्षित ऑनलाइन वातावरण सुनिश्चित करना है।
सरकार इस नीति को भारत के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 और पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन रूल्स 2025 के अनुरूप लागू करने की योजना बना रही है। इन कानूनों का मुख्य उद्देश्य नागरिकों के निजी डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना है और खासतौर पर बच्चों के डिजिटल अधिकारों की रक्षा करना भी इसमें शामिल है।
अकाउंट बनाने से पहले पैरेंट्स की अनुमति जरूरी
सरकार के प्रस्ताव के अनुसार यदि कोई बच्चा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अकाउंट बनाना चाहता है, तो उसके लिए माता-पिता की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही बच्चे की उम्र की पुष्टि भी जरूरी होगी। इसके लिए सरकारी पहचान प्रणाली या डिजिटल लॉकर जैसी डिजिटल पहचान व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा सकता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छोटे बच्चे बिना अभिभावकों की जानकारी और अनुमति के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल न कर सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर अनियंत्रित पहुंच बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा और ऑनलाइन शोषण जैसे जोखिमों को बढ़ा सकती है।
आंध्र प्रदेश में भी इसी तरह की योजना पर विचार
कर्नाटक के इस कदम के बाद अन्य राज्यों में भी इसी तरह की पहल पर चर्चा शुरू हो गई है। आंध्र प्रदेश सरकार को भी बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर नियंत्रण के संबंध में सुझाव मिला है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने शुक्रवार को विधानसभा में बताया कि राज्य में 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया गया है।
हालांकि आंध्र प्रदेश में अभी इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन सरकार इस मुद्दे का अध्ययन कर रही है। यदि यह नीति लागू होती है तो बच्चों के डिजिटल उपयोग को लेकर देश में व्यापक बहस और नीति निर्माण की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
शैक्षणिक संस्थानों में नशे के खिलाफ अभियान
कर्नाटक सरकार ने बजट भाषण के दौरान शिक्षा संस्थानों में बढ़ती नशे की समस्या को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने कहा कि स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय छात्रों के व्यक्तित्व विकास और भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए इन संस्थानों में नशे और नशीले पदार्थों के प्रसार को रोकना जरूरी है।
सरकार ने इसके लिए जागरूकता अभियान चलाने, सख्त अनुशासनात्मक नियम लागू करने और छात्रों के लिए काउंसलिंग तथा सहायता केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई है। इन कदमों का उद्देश्य छात्रों को स्वस्थ और सकारात्मक वातावरण प्रदान करना है।
डेटा प्रोटेक्शन कानून से जुड़ी अहम बातें
डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 के तहत कंपनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म को नागरिकों के डेटा के उपयोग के लिए स्पष्ट अनुमति लेनी होगी। किसी भी कंपनी या ऐप को व्यक्तिगत जानकारी एकत्र करने से पहले यह बताना होगा कि डेटा का उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जाएगा। बिना अनुमति के डेटा संग्रह करना या उसका दुरुपयोग करना कानून के तहत अपराध माना जाएगा।
इस कानून के तहत नागरिकों को अपने डेटा पर नियंत्रण का अधिकार भी दिया गया है। लोग अपनी जानकारी को देख सकते हैं, उसमें सुधार कर सकते हैं, उसे अपडेट कर सकते हैं या पूरी तरह हटाने की मांग भी कर सकते हैं। कंपनियों को ऐसे अनुरोधों का अधिकतम 90 दिनों के भीतर जवाब देना होगा।
डेटा लीक होने पर तुरंत सूचना देना जरूरी
यदि किसी कंपनी के पास मौजूद व्यक्तिगत डेटा में किसी तरह की चोरी या लीक की घटना होती है, तो कंपनी को प्रभावित लोगों को तुरंत इसकी जानकारी देनी होगी। उन्हें सरल भाषा में बताया जाएगा कि डेटा लीक कैसे हुआ, इससे क्या जोखिम हो सकते हैं और सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाने चाहिए।
इसके अलावा नागरिकों को शिकायत दर्ज कराने के लिए डिजिटल डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड का सहारा लेने का अधिकार होगा। यह पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म होगा, जहां लोग ऑनलाइन या मोबाइल ऐप के जरिए शिकायत दर्ज कर सकेंगे और उसकी स्थिति को ट्रैक भी कर पाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि कर्नाटक का प्रस्ताव बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर देश में नई नीति की दिशा तय कर सकता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह योजना किस तरह लागू होती है और अन्य राज्य भी इस दिशा में क्या कदम उठाते हैं।
Author: THE CG NEWS
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