बच्चा घर में तेज लेकिन लोगों के सामने चुप क्यों हो जाता है: 6 साल के बच्चों की शर्मीलापन की समस्या और उसे दूर करने के तरीके

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कई माता-पिता यह महसूस करते हैं कि उनका बच्चा घर में बहुत समझदार, सक्रिय और बातूनी होता है, लेकिन जैसे ही वह स्कूल, रिश्तेदारों या किसी सार्वजनिक जगह पर जाता है, वह एकदम चुप हो जाता है। खासतौर पर 5 से 7 साल की उम्र के बच्चों में यह समस्या काफी सामान्य देखी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह व्यवहार अक्सर शर्मीलापन, सामाजिक झिझक या आत्मविश्वास की कमी के कारण होता है।

मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि यह जरूरी नहीं है कि ऐसा बच्चा कमजोर हो या उसमें कोई कमी हो। कई बार ऐसे बच्चे बेहद संवेदनशील, बुद्धिमान और गहराई से सोचने वाले होते हैं, लेकिन भीड़ या नए माहौल में उन्हें खुद को व्यक्त करने में समय लगता है। ऐसे में माता-पिता का धैर्य और सही मार्गदर्शन बच्चे के आत्मविश्वास को विकसित करने में अहम भूमिका निभाता है।

शर्मीलापन क्यों होता है

बच्चों में शर्मीलापन कई कारणों से विकसित हो सकता है। कुछ बच्चों का स्वभाव ही स्वाभाविक रूप से शांत और अंतर्मुखी होता है। वहीं कुछ बच्चों में यह समस्या तब बढ़ती है जब वे नए लोगों या नई जगहों के बीच असहज महसूस करते हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक कई बार बच्चे यह सोचकर भी चुप हो जाते हैं कि कहीं वे कुछ गलत न बोल दें या लोग उनका मजाक न बना दें। इसके अलावा यदि परिवार में हमेशा यह कहा जाए कि बच्चा बहुत शर्मीला है, तो वह खुद भी यही मानने लगता है और धीरे-धीरे यह व्यवहार उसकी आदत बन जाता है।

बच्चे को समय और सुरक्षा का एहसास दें

मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि शर्मीले बच्चों के साथ सबसे जरूरी चीज धैर्य और सकारात्मक माहौल है। बच्चे को यह महसूस होना चाहिए कि वह सुरक्षित है और अगर वह बोलता है तो उसकी बात सुनी जाएगी।

माता-पिता को बच्चे पर यह दबाव नहीं डालना चाहिए कि वह तुरंत सबके सामने बात करे। इसके बजाय धीरे-धीरे उसे सामाजिक माहौल में सहज होने का मौका देना चाहिए। उदाहरण के लिए परिवार के छोटे-छोटे कार्यक्रमों या परिचित लोगों के बीच बच्चे को बातचीत के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।

छोटे-छोटे कदमों से बढ़ाएं आत्मविश्वास

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए उन्हें छोटी-छोटी जिम्मेदारियां देना फायदेमंद होता है। जैसे मेहमानों को पानी देना, किसी रिश्तेदार से नमस्ते कहना या स्कूल में टीचर से सवाल पूछना।

जब बच्चा ऐसा करता है तो उसकी प्रशंसा जरूर करनी चाहिए। इससे उसे महसूस होता है कि वह अच्छा कर रहा है और धीरे-धीरे उसका डर कम होने लगता है।

तुलना करने से बचें

अक्सर माता-पिता अपने बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से करने लगते हैं, जो कि गलत तरीका है। “देखो वो बच्चा कितना खुलकर बोलता है” जैसी बातें बच्चे के आत्मविश्वास को और कम कर सकती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार हर बच्चे का स्वभाव अलग होता है। इसलिए बच्चे को उसी के स्वभाव के अनुसार आगे बढ़ने का मौका देना चाहिए।

रोल प्ले और गेम्स भी हो सकते हैं मददगार

बच्चों के शर्मीलापन को दूर करने के लिए रोल प्ले और इंटरैक्टिव गेम्स भी काफी प्रभावी माने जाते हैं। माता-पिता घर पर ही ऐसे खेल खेल सकते हैं, जिनमें बच्चे को बोलना या अभिनय करना पड़े।

उदाहरण के लिए बच्चे को दुकान वाला बनाकर खुद ग्राहक बनना या टीचर-स्टूडेंट का खेल खेलना। इससे बच्चे की झिझक धीरे-धीरे कम होने लगती है और वह संवाद करने में सहज महसूस करता है।

शिक्षक से संवाद भी जरूरी

अगर बच्चा स्कूल में भी बहुत ज्यादा चुप रहता है तो माता-पिता को शिक्षक से बात करनी चाहिए। कई बार शिक्षक बच्चे को क्लास एक्टिविटी, ग्रुप डिस्कशन या स्टेज एक्टिविटी में शामिल करके उसका आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

स्कूल और घर दोनों जगह सहयोग मिलने से बच्चा धीरे-धीरे अपने डर से बाहर निकल सकता है।

कब लें विशेषज्ञ की सलाह

अगर बच्चा लंबे समय तक बिल्कुल भी बातचीत नहीं करता, स्कूल में भी चुप रहता है या लोगों से मिलने से डरता है, तो मनोवैज्ञानिक से सलाह लेना बेहतर हो सकता है। कई मामलों में यह समस्या सोशल एंग्जायटी या सिलेक्टिव म्यूटिज्म से भी जुड़ी हो सकती है।

हालांकि अधिकांश मामलों में यह केवल एक अस्थायी व्यवहार होता है, जो सही माहौल और प्रोत्साहन मिलने पर धीरे-धीरे खत्म हो जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को समझना और उन्हें बिना दबाव के प्रोत्साहित करना ही शर्मीलापन दूर करने का सबसे प्रभावी तरीका है। जब बच्चा महसूस करता है कि उसे स्वीकार किया जा रहा है, तब उसका आत्मविश्वास स्वाभाविक रूप से बढ़ने लगता है और वह धीरेधीरे लोगों के बीच खुलकर बात करना सीख जाता है।

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Author: THE CG NEWS

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