
देश में डिजिटल पेमेंट सिस्टम को और अधिक सुरक्षित और यूजर-फ्रेंडली बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। प्रमुख निजी बैंक और टेलीकॉम कंपनियां मिलकर ‘साइलेंट ऑथेंटिकेशन’ नामक नई तकनीक पर काम कर रही हैं, जिसके लागू होने के बाद ऑनलाइन पेमेंट के लिए वन-टाइम पासवर्ड (OTP) की आवश्यकता खत्म हो सकती है। यह तकनीक बैकग्राउंड में ही यूजर की पहचान और डिवाइस को वेरिफाई करेगी, जिससे ट्रांजैक्शन ज्यादा तेज और सुरक्षित हो जाएगा।
कैसे काम करेगा साइलेंट ऑथेंटिकेशन सिस्टम
नई तकनीक के तहत, जब भी कोई यूजर ऑनलाइन पेमेंट करेगा, तो सिस्टम अपने आप यह जांच करेगा कि बैंक एप में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और फोन में मौजूद सिम कार्ड आपस में मेल खाते हैं या नहीं। यदि दोनों में कोई भी असंगति पाई जाती है, तो ट्रांजैक्शन तुरंत रोक दिया जाएगा।
इस प्रक्रिया में यूजर को कोई OTP डालने या अतिरिक्त कदम उठाने की जरूरत नहीं होगी। यह पूरी तरह बैकग्राउंड में काम करेगा, जिससे न केवल समय बचेगा बल्कि उपयोगकर्ता का अनुभव भी बेहतर होगा। खास बात यह है कि यह तकनीक ई-सिम (eSIM) पर भी प्रभावी ढंग से काम करेगी, जिससे सिम क्लोनिंग और ई-सिम स्वैप जैसे साइबर फ्रॉड को रोकने में मदद मिलेगी।
बैंक और टेलीकॉम कंपनियों के बीच सहयोग
एक्सिस बैंक के डिजिटल बिजनेस हेड समीर शेट्टी के अनुसार, इस तकनीक को लागू करने के लिए बैंक और टेलीकॉम कंपनियां मिलकर कई पायलट प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि यदि कोई यूजर बैंक एप में लॉग-इन है, लेकिन उसका मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड नंबर से मेल नहीं खाता, तो टेलीकॉम नेटवर्क तुरंत इसकी जानकारी बैंक को देगा।
इससे संभावित धोखाधड़ी को बिना ग्राहक को परेशान किए पहले ही पहचान लिया जाएगा और ट्रांजैक्शन को रोका जा सकेगा। इससे डिजिटल पेमेंट सिस्टम में भरोसा और सुरक्षा दोनों बढ़ेंगे।
सुरक्षा को और मजबूत बनाने की तैयारी
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक OTP आधारित सुरक्षा प्रणाली अब पहले जितनी सुरक्षित नहीं रह गई है, क्योंकि इसे कई तरीकों से हैक किया जा सकता है। PWC इंडिया के साइबर लीडर सुंदरेश्वर कृष्णमूर्ति के मुताबिक, नई तकनीक में वेरिफिकेशन को नेटवर्क के कोर सिस्टम में शिफ्ट किया जा रहा है, जिससे इसे हैक करना बेहद कठिन हो जाएगा।
इसके साथ ही, सुरक्षा के लिए फेस आईडी, बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन और एप के भीतर ही कोड जनरेट करने जैसे विकल्प भी जोड़े जा रहे हैं। इससे मल्टी-लेयर सिक्योरिटी सिस्टम तैयार होगा, जो यूजर की जानकारी को और सुरक्षित बनाएगा।
RBI के नियम और डिजिटल ट्रांजैक्शन की दिशा
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पहले ही डिजिटल लेन-देन के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) अनिवार्य कर रखा है। इसमें पासवर्ड या पिन के साथ OTP या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन शामिल होता है। हालांकि, नई तकनीक के आने के बाद OTP पर निर्भरता कम हो सकती है, लेकिन इसे पूरी तरह समाप्त नहीं किया जाएगा।
RBI बैंकों को आधुनिक और सुरक्षित तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है, ताकि डिजिटल ट्रांजैक्शन अधिक सुरक्षित और तेज हो सकें।
व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर OTP की सुविधा
नए बदलावों के तहत अब बैंक OTP भेजने के लिए व्हाट्सएप जैसे थर्ड-पार्टी प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल कर सकेंगे। अनुमान है कि भारत में हर महीने करीब 1000 करोड़ ट्रांजैक्शनल मैसेज भेजे जाते हैं, ऐसे में यह बदलाव ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने में मदद करेगा।
क्लाउड कम्युनिकेशन कंपनी के विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई व्यवस्था से ट्रांजैक्शन फेल होने की दर घटेगी और डिजिटल पेमेंट की प्रक्रिया अधिक सहज होगी। इससे ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा और डिजिटल भुगतान का उपयोग और तेजी से बढ़ेगा।
डिजिटल पेमेंट के भविष्य की दिशा
‘साइलेंट ऑथेंटिकेशन’ तकनीक डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। इससे न केवल साइबर फ्रॉड पर लगाम लगेगी, बल्कि यूजर्स को तेज, सुरक्षित और बिना झंझट के पेमेंट करने का अनुभव मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम और अधिक उन्नत और सुरक्षित होगा, जिससे देश में डिजिटल इकोनॉमी को भी मजबूती मिलेगी।
Author: THE CG NEWS
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