
रायपुर में तापमान बढ़ने के साथ ही चलती और खड़ी गाड़ियों में आग लगने की घटनाएं तेजी से सामने आ रही हैं। पिछले एक महीने में शहर के अलग-अलग इलाकों में 6 से अधिक ऐसे मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें वाहन देखते ही देखते आग का गोला बन गए। हालांकि राहत की बात यह रही कि अधिकांश घटनाओं में समय रहते लोग सुरक्षित बाहर निकल गए और कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन कई वाहन पूरी तरह जलकर खाक हो गए। इन घटनाओं ने वाहन चालकों और आम लोगों के बीच चिंता बढ़ा दी है।
हाल के हादसों ने बढ़ाई चिंता
हाल ही में रिंग रोड-2 पर 3 अप्रैल 2026 को एक चलती टाटा एस में अचानक आग लग गई। वाहन से धुआं और लपटें उठने लगीं, जिसके बाद चालक ने तुरंत सूझबूझ दिखाते हुए गाड़ी रोकी और बाहर निकल गया। कुछ ही मिनटों में पूरी गाड़ी आग की चपेट में आ गई। सूचना मिलते ही दमकल टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक वाहन पूरी तरह जल चुका था।
इसी तरह 24 फरवरी को कलेक्ट्रेट के पास खड़ी एक कार में अचानक आग लग गई। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत सूचना दी, जिसके बाद आग पर समय रहते नियंत्रण पा लिया गया। वहीं खमतराई इलाके में दो महीने पहले एक चलती स्कॉर्पियो में आग लगने की घटना भी सामने आई थी, जिसमें सवार चार लोगों ने समय रहते बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। अवंति विहार में भी एक कार अचानक आग का गोला बन गई थी, जिसे बुझाने में फायर ब्रिगेड को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
एक्सपर्ट्स बोले- मेंटेनेंस की कमी सबसे बड़ी वजह
ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का कहना है कि इन घटनाओं के पीछे सबसे बड़ी वजह लापरवाही और समय पर वाहन का मेंटेनेंस न होना है। मैक मोटर्स के संचालक अमित के अनुसार, अधिकांश मामलों में वाहन की छोटी-छोटी तकनीकी समस्याओं को नजरअंदाज किया जाता है, जो बाद में बड़ी दुर्घटना का कारण बनती हैं। नियमित सर्विसिंग, वायरिंग की जांच और इंजन की देखभाल से इन घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
कैपिटल मोटर के संचालक दीपक चावला बताते हैं कि गर्मियों में कार के अंदर का तापमान 60 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इससे इंजन, बैटरी और फ्यूल सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। अधिक गर्मी के कारण फ्यूल तेजी से वाष्पित होता है और इलेक्ट्रिकल सिस्टम पर असर पड़ता है, जिससे शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ जाता है।
गर्मी में आग लगने के मुख्य कारण
विशेषज्ञों के अनुसार ओवरहीटिंग, फ्यूल लीकेज, बैटरी की खराबी और इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट आग लगने के प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा कार में रखी ज्वलनशील वस्तुएं जैसे परफ्यूम, सैनिटाइजर या गैस से जुड़े सामान भी खतरे को कई गुना बढ़ा देते हैं। लंबे समय तक धूप में खड़ी गाड़ियां भी अधिक जोखिम में रहती हैं।
पुराने वाहनों पर बढ़ता खतरा
पुराने वाहनों में यह खतरा और अधिक बढ़ जाता है। सरकारी नियमों के अनुसार 20 साल पुरानी निजी गाड़ियों और 15 साल पुराने व्यावसायिक वाहनों को फिटनेस टेस्ट पास करना अनिवार्य है। अगर वाहन इस टेस्ट में फेल हो जाता है, तो उसे स्क्रैप किया जा सकता है। ऐसे में खराब स्थिति में चल रहे पुराने वाहन न सिर्फ कानूनी रूप से बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी खतरनाक साबित हो सकते हैं।
CNG और इलेक्ट्रिक कारों को लेकर क्या कहते हैं विशेषज्ञ
विशेषज्ञों का कहना है कि CNG या इलेक्ट्रिक कारों में आग लगने का खतरा सामान्य वाहनों की तुलना में अधिक नहीं होता, बशर्ते उनकी फिटिंग और सर्विसिंग सही तरीके से की जाए। खासकर CNG किट अगर अधिकृत केंद्र से नहीं लगाई गई हो, तो खतरा बढ़ सकता है। वहीं इलेक्ट्रिक वाहनों में बैटरी सिस्टम की नियमित जांच जरूरी होती है।
सावधानी ही बचाव का सबसे बड़ा उपाय
विशेषज्ञों का मानना है कि थोड़ी सी सावधानी से इन घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। नियमित सर्विसिंग, कूलिंग सिस्टम की जांच, वायरिंग की देखभाल और ज्वलनशील वस्तुओं को कार में न रखना बेहद जरूरी है। इसके अलावा वाहन में फायर एक्सटिंग्विशर रखना और किसी भी असामान्य गंध या धुएं को नजरअंदाज न करना भी सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
गर्मी के इस मौसम में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। यदि वाहन मालिक समय पर रखरखाव और सावधानी बरतें, तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है और जान-माल की हानि से बचा जा सकता है।
Author: THE CG NEWS
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