गंगा दशहरा 2025: पुण्य स्नान और श्रद्धा का पर्व, घाटों पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

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आज देशभर में गंगा दशहरा का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया। इस अवसर पर लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा नदी के विभिन्न घाटों पर पुण्य स्नान कर अपने पापों के प्रायश्चित और मोक्ष की कामना की।

गंगा दशहरा का महत्व और तिथि

गंगा दशहरा, जिसे गंगावतरण भी कहा जाता है, हर वर्ष ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व गंगा माता के पृथ्वी पर अवतरण की स्मृति में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से दस प्रकार के पापों का नाश होता है और व्यक्ति को आध्यात्मिक शुद्धि प्राप्त होती है।

इस वर्ष, गंगा दशहरा का शुभ मुहूर्त 5 जून को प्रातः 5:25 बजे से 7:40 बजे तक रहा। इस अवधि में गंगा स्नान, दान-पुण्य और पूजा-अर्चना का विशेष महत्व रहा। 

प्रमुख तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़

गंगा दशहरा के अवसर पर हरिद्वार, वाराणसी, प्रयागराज, ऋषिकेश और गढ़मुक्तेश्वर जैसे तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।

  • हरिद्वार: हर की पौड़ी घाट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। गंगा आरती के दौरान दीपों की रोशनी और मंत्रोच्चारण से वातावरण भक्तिमय हो गया।
  • वाराणसी: दशाश्वमेध घाट पर हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया और गंगा आरती में भाग लिया। घाटों पर विशेष सजावट और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
  • प्रयागराज: त्रिवेणी संगम पर लाखों श्रद्धालुओं ने स्नान कर पूजा-अर्चना की। स्थानीय प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की थी।

 

पूजा विधि और धार्मिक अनुष्ठान

गंगा दशहरा के दिन श्रद्धालु प्रातःकाल उठकर गंगा स्नान करते हैं। इसके बाद गंगा माता की पूजा, दीपदान, पुष्प अर्पण और मंत्रोच्चारण करते हैं। दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है; लोग अन्न, वस्त्र, जल से भरे घड़े और दक्षिणा का दान करते हैं।

जो श्रद्धालु गंगा तट पर नहीं जा सके, उन्होंने घर पर ही गंगा जल से स्नान कर या मानसिक स्नान (मानसिक रूप से गंगा में स्नान की कल्पना) कर पूजा-अर्चना की।

धार्मिक मान्यताएं और आध्यात्मिक लाभ

हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, गंगा दशहरा के दिन गंगा में स्नान करने से व्यक्ति के दस प्रकार के पापों का नाश होता है। यह दिन आत्मशुद्धि, मोक्ष प्राप्ति और पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

सुरक्षा और प्रशासनिक प्रबंध

प्रमुख तीर्थस्थलों पर स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा, चिकित्सा और भीड़ नियंत्रण के विशेष प्रबंध किए थे। पुलिस बल, स्वयंसेवक और स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती की गई थी ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

गंगा दशहरा की झलकियाँ

  • हरिद्वार में हर की पौड़ी पर दीपों की रोशनी से सजी गंगा आरती।
  • वाराणसी में गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ और भव्य सजावट।
  • प्रयागराज में त्रिवेणी संगम पर स्नान करते श्रद्धालु।

गंगा दशहरा 2025 का यह पर्व श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक बनकर आया। लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर अपने पापों का प्रायश्चित किया और मोक्ष की कामना की।

 

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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