
छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच लगातार तेज़ होती जा रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री कवासी लखमा तथा उनके बेटे हरीश लखमा की करीब ₹6 करोड़ की अचल संपत्तियां अटैच कर दी हैं।
क्या है मामला?
छत्तीसगढ़ में यह शराब घोटाला वर्ष 2019 से 2023 के बीच कथित रूप से हुआ, जब सरकार की देखरेख में शराब की खरीदी-बिक्री और ठेकों के आवंटन में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए।
ED का आरोप है कि शराब ठेकेदारों, अधिकारियों और नेताओं के गठजोड़ से अवैध रूप से करोड़ों रुपये की कमाई की गई, जिसमें हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आर्थिक अपराध शामिल हैं।
कवासी लखमा पर आरोप
जनजातीय क्षेत्र बस्तर से आने वाले कांग्रेस नेता कवासी लखमा को जनवरी 2025 में गिरफ्तार किया गया था।
ED के मुताबिक, कवासी लखमा की राजनीतिक हैसियत का इस्तेमाल कर शराब घोटाले में प्रमुख भूमिका निभाई गई। इस दौरान लखमा और उनके बेटे के नाम पर कई बेनामी संपत्तियों की खरीद की गई, जिसमें भूमि, मकान और अन्य अचल परिसंपत्तियां शामिल हैं।
इन्हीं संपत्तियों की कड़ी जांच के बाद अब ED ने ₹6 करोड़ से अधिक मूल्य की संपत्तियों को अटैच कर दिया है।
ED की कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय ने कहा है कि उन्हें मनी-लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत लखमा परिवार द्वारा की गई संपत्ति की खरीद में काले धन के उपयोग के पुख्ता सबूत मिले हैं।
ED अधिकारियों के अनुसार, इन संपत्तियों की खरीद में वास्तविक स्रोत छिपाए गए और संपत्ति को वैध दिखाने के लिए कई परतों में लेन-देन किया गया।
ED की जांच में यह भी सामने आया कि कई बेनामी संपत्तियां लखमा के करीबियों के नाम पर पंजीकृत की गई थीं।
कांग्रेस का पलटवार
कांग्रेस पार्टी ने इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की है। पार्टी प्रवक्ता ने कहा, “यह पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध है। कवासी लखमा एक जनप्रिय आदिवासी नेता हैं, जिन्हें झूठे मामलों में फंसाया गया है। सरकार विपक्ष की आवाज़ को दबाने के लिए ED जैसी एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है।”
वहीं लखमा के वकीलों ने भी अदालत में याचिका दायर कर कहा है कि ED की कार्रवाई पूर्वाग्रही है और इसका कोई ठोस आधार नहीं है।
जनता की प्रतिक्रिया और राजनीतिक असर
यह मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर गर्मी ला चुका है।
जहां विपक्ष भाजपा ने राज्य सरकार और कांग्रेस नेताओं पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं, वहीं कांग्रेस इसे लोकतंत्र और आदिवासी नेतृत्व पर हमला बता रही है।
विशेष रूप से बस्तर जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में इस मुद्दे ने नया राजनीतिक माहौल बना दिया है, जहां लखमा का खासा प्रभाव माना जाता है।
आगे की राह
ED ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में और कई नेताओं, अधिकारियों और शराब कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार, ED की टीम ने हाल ही में रायपुर, जगदलपुर, दुर्ग, और बिलासपुर में कई स्थानों पर छापेमारी की है और डिजिटल सबूत जुटाए हैं।
संभावना है कि जल्द ही इस मामले में कुछ और नामों का खुलासा होगा और पूछताछ का दायरा भी बढ़ाया जाएगा।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला केवल आर्थिक भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि राज्य की राजनीतिक साख और प्रशासनिक नैतिकता पर भी सवाल खड़ा कर रहा है। ED की ताज़ा कार्रवाई ने जहां जांच को तेज़ किया है, वहीं यह भी साफ है कि आने वाले महीनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति और विधानसभा की गतिविधियों में प्रमुख रहेगा।
Author: THE CG NEWS
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