
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। साल भर में 24 एकादशियाँ आती हैं, जिनमें से योगिनी एकादशी का अपना खास आध्यात्मिक और धार्मिक महत्त्व है। इस एकादशी का व्रत मन, शरीर और आत्मा की शुद्धि के साथ-साथ धन, सुख और समृद्धि प्रदान करने वाला माना जाता है। इस बार योगिनी एकादशी 29 जून 2025, शनिवार को मनाई जाएगी।
योगिनी एकादशी का महत्व
योगिनी एकादशी को पापों के नाशक और मोक्षदायिनी एकादशी कहा जाता है। ऐसा विश्वास है कि जो व्यक्ति श्रद्धा एवं नियमपूर्वक इस व्रत का पालन करता है, उसे सभी पापों से मुक्ति मिलती है और उसके जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। इसके अतिरिक्त, इस दिन व्रत करने से रोग, दरिद्रता और मानसिक परेशानियों का भी नाश होता है।
पुराणों के अनुसार, योगिनी एकादशी का व्रत करने से 88,000 ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। यह व्रत विशेष रूप से रोगों से मुक्ति और कार्यों में सफलता के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।
व्रत और पूजा की विधि
योगिनी एकादशी व्रत का पालन करने के लिए भक्तों को दशमी तिथि से ही नियमों का पालन करना चाहिए। दशमी की रात सात्विक भोजन ग्रहण कर, ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है।
एकादशी के दिन प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करें। विष्णु भगवान को तुलसी, पीले फूल, धूप, दीप, नैवेद्य और पंचामृत अर्पित करें। साथ ही ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें। दिनभर व्रत रहकर, शाम को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना भी विशेष फलदायी माना जाता है।
द्वादशी के दिन व्रत का पारण कर जरूरतमंदों को दान करना चाहिए।
योगिनी एकादशी की पौराणिक कथा
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, एक समय अलकापुरी के यक्ष हेममाली कुबेर का सेवक था। उसकी पत्नी विशालाक्षी अत्यंत सुंदर थी। हेममाली प्रतिदिन मानसरोवर से फूल लाकर भगवान शिव की पूजा के लिए देता था, लेकिन एक दिन वह अपनी पत्नी के साथ समय बिताने में इतना लीन हो गया कि पूजा के लिए समय पर फूल नहीं पहुँचा पाया।
कुबेर ने उसे शाप दे दिया और वह कोढ़ (कुष्ठ रोग) से पीड़ित होकर धरती पर गिर पड़ा। कई वर्षों तक वह दुख भोगता रहा। अंततः वह महर्षि मार्कंडेय के पास पहुँचा और अपनी पीड़ा सुनाई। महर्षि ने उसे योगिनी एकादशी व्रत करने की सलाह दी।
हेम्माली ने विधिपूर्वक व्रत रखा, जिससे वह न केवल अपने पापों से मुक्त हो गया, बल्कि उसके शरीर का रोग भी समाप्त हो गया।
योगिनी एकादशी पर करें ये विशेष उपाय
- तुलसी पर जल चढ़ाएं: इस दिन तुलसी को जल अर्पित करना और उसके समीप दीपक जलाना विशेष लाभकारी होता है। इससे आर्थिक समस्याएँ दूर होती हैं।
- विष्णु मंत्र का जाप: ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का 108 बार जाप करने से मानसिक शांति और सफलता प्राप्त होती है।
- व्रत का पालन: पूर्ण श्रद्धा से व्रत कर, दिनभर सात्विक आहार लेना और कथा श्रवण करना जीवन में शुभता लाता है।
- दान करें: इस दिन जरूरतमंदों को वस्त्र, अन्न, और धन का दान करना अक्षय पुण्य का कारण बनता है।
- दीपदान करें: सूर्यास्त के समय तुलसी और भगवान विष्णु के समक्ष घी का दीपक जलाना विशेष शुभ माना जाता है।
निष्कर्ष
योगिनी एकादशी का व्रत न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धि के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। जो लोग इस व्रत को पूरी श्रद्धा और विधिपूर्वक करते हैं, उनके जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि का वास होता है। यदि आप भी अपने जीवन में उन्नति और पापों से मुक्ति चाहते हैं, तो इस योगिनी एकादशी पर अवश्य व्रत करें और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करें।
Author: THE CG NEWS
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