
ईरान एक बार फिर से अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर दुनिया भर की सुर्खियों में है। इस बार खबर यह है कि ईरान अपने नए परमाणु अड्डे को ज़मीन की सतह से लगभग 295 फीट (करीब 90 मीटर) नीचे बना रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस अड्डे को नष्ट करना बेहद कठिन होगा, यहां तक कि आधुनिक बंकर-भेदी बम भी इस ठिकाने को नुकसान नहीं पहुंचा पाएंगे। यह ईरान की रणनीति का एक ऐसा कदम है, जिसने अमेरिका, इजराइल और पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ा दी है।
जमीन के नीचे मजबूत सुरक्षा
ईरान जिस परमाणु अड्डे का निर्माण कर रहा है, वह पहाड़ के अंदर स्थित है और इसे जानबूझकर जमीन से काफी नीचे बनाया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस अड्डे की गहराई करीब 295 फीट है, जो इसे हवाई हमलों और मिसाइल हमलों से लगभग अप्रभावित बना देती है। ईरान का यह कदम संकेत देता है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को किसी भी बाहरी हस्तक्षेप से बचाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
क्यों है यह अड्डा इतना खास?
इस परमाणु अड्डे को इतना गहराई में बनाने का मुख्य कारण यह है कि आधुनिक युद्धक विमानों और मिसाइलों से भी इसे नष्ट करना मुश्किल होगा। अमेरिका के पास “बंकर बस्टर” नामक बम जरूर हैं, लेकिन यह बम भी अधिकतम 200 फीट गहराई तक प्रभावी माने जाते हैं। ईरान का नया परमाणु केंद्र 295 फीट नीचे बनाया जा रहा है, जिससे इसे बंकर बस्टर से भी बचाया जा सकता है। यही वजह है कि कई सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि इस अड्डे को सैन्य हमले से तबाह करना लगभग असंभव है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती चिंता
ईरान का यह कदम अमेरिका, इजराइल और अन्य पश्चिमी देशों के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। अमेरिका लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने की कोशिश करता रहा है। इजराइल भी इस मुद्दे पर हमेशा आक्रामक रुख अपनाता है, लेकिन अब जब ईरान ने अपने परमाणु ठिकानों को इतनी गहराई में ले जाकर सुरक्षित कर लिया है, तो उन पर हमला करना या उन्हें नष्ट करना बेहद मुश्किल हो गया है।
इसके अलावा, यह भी आशंका जताई जा रही है कि ईरान इस अड्डे का इस्तेमाल यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) के लिए कर सकता है, जो परमाणु हथियार बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। इससे पश्चिमी देशों और ईरान के बीच तनाव और भी बढ़ सकता है।
ईरान का रुख
ईरान हमेशा से अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण उद्देश्य वाला बताता रहा है। उसका कहना है कि उसका यह कार्यक्रम सिर्फ ऊर्जा उत्पादन और चिकित्सा के क्षेत्र में उपयोग के लिए है। लेकिन पश्चिमी देशों को शक है कि ईरान गुपचुप तरीके से परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ईरान की सरकार फिलहाल इस अड्डे पर कोई खुला बयान नहीं दे रही है, लेकिन निर्माण कार्य तेजी से जारी है, जिसकी पुष्टि सैटेलाइट तस्वीरों से हो चुकी है।
अब आगे क्या?
सवाल यह उठता है कि अगर यह अड्डा इतनी गहराई में है तो अमेरिका या इजराइल जैसे देश इसे कैसे रोकेंगे? क्या राजनयिक तरीके से ईरान को मनाने की कोशिश होगी या सैन्य विकल्पों पर विचार किया जाएगा? फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील है और भविष्य में इस पर कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय विवाद खड़ा हो सकता है।
ईरान का यह 295 फीट गहरा परमाणु अड्डा पूरी दुनिया के लिए एक नई चुनौती बन चुका है। इसे नष्ट करना अब सिर्फ तकनीक का ही नहीं, बल्कि कूटनीति और धैर्य का भी सवाल है।
Author: THE CG NEWS
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