
ओडिशा सरकार ने अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा हाल ही में जारी की गई ट्रैवल एडवाइजरी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें ओडिशा को यौन अपराधों और माओवादी गतिविधियों के संदर्भ में असुरक्षित बताया गया है। राज्य सरकार ने इस सलाह को ‘गैर-जिम्मेदाराना’ और ‘तथ्यहीन’ करार देते हुए कहा कि इस प्रकार की सूचनाएं न केवल राज्य की सकारात्मक छवि को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि ओडिशा में हो रहे आर्थिक विकास और पर्यटन को भी प्रभावित कर सकती हैं।
राज्य सरकार का कहना है कि अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा दी गई यह चेतावनी पुराने आंकड़ों पर आधारित है और वर्तमान स्थिति से बिल्कुल मेल नहीं खाती। ओडिशा ने न केवल माओवादी गतिविधियों पर कड़ा नियंत्रण पाया है, बल्कि महिला सुरक्षा के लिए भी कई अहम कदम उठाए गए हैं।
अमेरिकी ट्रैवल एडवाइजरी में क्या कहा गया?
संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने नागरिकों को ओडिशा की यात्रा के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है। अमेरिका के अनुसार, ओडिशा में महिलाओं के प्रति अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं और राज्य के कुछ इलाके अब भी माओवादी गतिविधियों के प्रभाव में हैं। सलाह में खास तौर पर ओडिशा के कुछ आदिवासी बहुल इलाकों का हवाला दिया गया, जिन्हें ‘रेड जोन’ कहा गया है।
इस एडवाइजरी में कहा गया है कि अमेरिकी नागरिक, खासकर महिला पर्यटक, ओडिशा की यात्रा करते समय सतर्क रहें और भीड़भाड़ से दूर स्थानों में अकेले न जाएं। अमेरिका ने यह भी कहा कि माओवादी हमलों का खतरा अभी भी कुछ ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में बना हुआ है।
ओडिशा सरकार का पलटवार: “राज्य अब सुरक्षित है”
ओडिशा सरकार ने अमेरिकी यात्रा चेतावनी को खारिज करते हुए कहा है कि यह रिपोर्ट पुरानी और भ्रामक सूचनाओं पर आधारित है। राज्य के गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा,
“पिछले कुछ वर्षों में ओडिशा पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के संयुक्त प्रयासों से राज्य में माओवादी गतिविधियों में भारी गिरावट आई है। आज ओडिशा माओवादी हिंसा से लगभग मुक्त हो चुका है।”
सरकार ने यह भी कहा कि यौन अपराधों के मामलों में भी राज्य ने तेजी से सुधार किया है। महिला सुरक्षा के लिए विशेष हेल्पलाइन, पिंक पेट्रोलिंग यूनिट, फास्ट ट्रैक कोर्ट और कड़ी कानूनी कार्रवाई जैसे उपाय लागू किए गए हैं।
ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने मीडिया से बातचीत में कहा,
“ओडिशा एक शांतिपूर्ण और पर्यटकों के लिए सुरक्षित राज्य है। इस तरह की रिपोर्टें न केवल राज्य की साख को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि यह विदेशी निवेशकों और पर्यटकों को भी भ्रमित करती हैं। हमारी सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।”
माओवादी खतरे की सच्चाई: आंकड़े क्या कहते हैं?
ओडिशा पुलिस के मुताबिक, वर्ष 2010 में जहां राज्य में माओवादी हिंसा की 80 से ज्यादा घटनाएं दर्ज हुई थीं, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर 12 रह गई है। माओवाद प्रभावित जिलों की संख्या भी 15 से घटकर मात्र 4 रह गई है।
माओवादियों के बड़े गुट या तो आत्मसमर्पण कर चुके हैं या सुरक्षा बलों के अभियानों में खत्म हो चुके हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ओडिशा में माओवादी गतिविधियां अब सीमित हो गई हैं और उनका नेटवर्क कमजोर पड़ चुका है। राज्य में सरकार द्वारा चलाए गए विकास कार्यों और सड़क निर्माण परियोजनाओं ने माओवादी प्रभाव को और कमजोर किया है।
अमेरिका को कूटनीतिक आपत्ति: विदेश मंत्रालय भी सक्रिय
ओडिशा सरकार ने अमेरिकी दूतावास को कूटनीतिक स्तर पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने भी अमेरिका से इस यात्रा सलाह की पुनर्समीक्षा करने का आग्रह किया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा,
“ओडिशा समेत भारत के अधिकांश राज्य विदेशी नागरिकों के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं। किसी भी देश को ऐसी सलाह जारी करने से पहले नवीनतम तथ्यों और आधिकारिक आंकड़ों का अध्ययन करना चाहिए।”
इस विवाद के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिका से औपचारिक स्पष्टीकरण भी मांगा है और उम्मीद जताई है कि अमेरिका जल्द ही इस एडवाइजरी को संशोधित करेगा।
राजनीतिक प्रतिक्रिया: राज्य सरकार को मिला व्यापक समर्थन
इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ बीजू जनता दल (BJD) के अलावा विपक्षी दलों ने भी ओडिशा सरकार का समर्थन किया है। कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्य नेताओं ने भी कहा है कि ओडिशा की वर्तमान स्थिति को बदनाम करने वाली ऐसी रिपोर्टें दुर्भाग्यपूर्ण हैं।
बीजेपी के वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र प्रधान ने कहा,
“राज्य के माओवादी इलाके अब काफी हद तक नियंत्रण में हैं। सरकार ने माओवादी हिंसा पर प्रभावी तरीके से अंकुश लगाया है। अमेरिका को भारत की जमीनी सच्चाई को समझना चाहिए।”
निष्कर्ष
ओडिशा सरकार का मानना है कि अमेरिकी यात्रा सलाह बिना समुचित तथ्यों के जारी की गई है और इसका राज्य के पर्यटन और निवेश पर गलत प्रभाव पड़ सकता है। अब भारत सरकार भी इस मुद्दे को कूटनीतिक स्तर पर उठाने में जुट गई है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिका अपनी इस सलाह में कोई संशोधन करता है या नहीं।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वैश्विक शक्तियां किसी देश की छवि को बिना पूरी जानकारी के प्रभावित करने का अधिकार रखती हैं? ओडिशा अब इस सलाह को चुनौती देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
Author: THE CG NEWS
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