हिमाचल में बादल फटने से तबाही, 10 की मौत और 35 लापता; वाराणसी में गंगा उफान पर, 20 मंदिर जलमग्न

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हिमाचल में बादल फटा, 100 गांवों में बिजली बंद, राहत कार्य जारी

हिमाचल प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर कहर बरपाया है। सोमवार रात को मंडी, कुल्लू और चंबा जिलों में बादल फटने की घटनाओं से तबाही मच गई। मंडी जिला सबसे अधिक प्रभावित हुआ है जहां ब्यास और पार्वती नदी में जलस्तर तेजी से बढ़ने के बाद कई गांवों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई। घरों में पानी भर गया, कई मकान मलबे में दब गए और सड़कें पूरी तरह अवरुद्ध हो गईं।

अब तक 10 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और 35 लोग लापता बताए जा रहे हैं। बचाव दल लगातार मलबे में दबे लोगों की तलाश में जुटे हैं। सैकड़ों ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर बह जाने के कारण करीब 100 गांवों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप है।

राज्य सरकार ने युद्धस्तर पर राहत अभियान शुरू किया है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में तैनात की गई हैं। वहीं, ITBP के जवान भी दूरदराज के इलाकों में फंसे लोगों को निकालने में जुटे हैं। हेलीकॉप्टर की सहायता से दुर्गम पहाड़ियों में राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आपात बैठक कर केंद्र सरकार से अतिरिक्त सहायता मांगी है। उन्होंने मृतकों के परिवारों को ₹4 लाख मुआवजा और घायलों को ₹50,000 की राहत राशि देने की घोषणा की है। सरकार ने जिला प्रशासन को तत्काल पुनर्वास केंद्रों की संख्या बढ़ाने और राहत सामग्री की आपूर्ति तेज़ करने के निर्देश दिए हैं।

वाराणसी में गंगा खतरे के निशान से ऊपर, घाटों पर जलसंकट

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। गंगा अब मणिकर्णिका घाट तक पहुंच गई है, जिससे अंतिम संस्कार जैसी आवश्यक गतिविधियों पर भी असर पड़ा है। दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट और चेतसिंह घाट के निचले हिस्से पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। अब तक 20 से अधिक प्राचीन मंदिर गंगा के पानी में डूब चुके हैं, जिनमें कुछ 200 साल से भी पुराने हैं।

लगातार बारिश और उत्तराखंड से छोड़े गए अतिरिक्त पानी के कारण गंगा का स्तर हर घंटे बढ़ रहा है। जिला प्रशासन ने घाटों पर आम नागरिकों के जाने पर अस्थायी रोक लगा दी है और नाव संचालन पूरी तरह बंद कर दिया गया है। मुनादी कराकर लोगों को सतर्क किया जा रहा है, जबकि घाट किनारे बसे करीब 200 परिवारों को राहत शिविरों में स्थानांतरित किया गया है।

प्रशासन का कहना है कि अगर जलस्तर इसी गति से बढ़ता रहा, तो शहर के अन्य निचले हिस्सों में भी पानी भरने की आशंका है। नगर निगम और आपदा प्रबंधन दलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और लगातार निगरानी की जा रही है।

IMD की चेतावनी, केंद्र सरकार सतर्क

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने हिमाचल, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार में अगले 48 घंटे भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। बंगाल की खाड़ी से उठा सक्रिय मानसूनी सिस्टम उत्तर भारत के कई राज्यों को प्रभावित कर रहा है। मौसम विभाग ने कहा है कि कुछ स्थानों पर अति भारी वर्षा और भूस्खलन की आशंका बनी हुई है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि केंद्र सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त राहत बल तैनात किए जाएंगे। NDMA को सभी प्रभावित राज्यों से समन्वय बनाए रखने और तत्काल सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

आपदा प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन पर उठते सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि इन घटनाओं के पीछे तेजी से बदलते मौसम चक्र और जलवायु परिवर्तन की अहम भूमिका है। अंधाधुंध शहरीकरण, पर्वतीय क्षेत्रों में अवैज्ञानिक निर्माण, और नदी तटों पर अतिक्रमण से आपदाओं की तीव्रता बढ़ती जा रही है।

ऐसे हालात में जरूरी है कि आपदा प्रबंधन को आधुनिक तकनीकों से लैस किया जाए, मौसम पूर्वानुमानों को स्थानीय प्रशासन से बेहतर तरीके से साझा किया जाए और लोगों को समय रहते सतर्क किया जाए। केवल राहत के इंतजार में न रहकर दीर्घकालिक समाधान की दिशा में भी नीतिगत फैसले लिए जाने चाहिए।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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