कांवड़ रूट पर धर्म पूछे जाने को लेकर विवाद, मेरठ में हिंदू संगठन सक्रिय

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कांवड़ियों ने जताई नाराज़गी, कहा – श्रद्धा पर शक से आहत हैं भावनाएं

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में इस बार की कांवड़ यात्रा धार्मिक विवाद की चपेट में आ गई है। कांवड़ यात्रा के रूट पर QR कोड स्कैन करके श्रद्धालुओं से धर्म पूछे जाने की घटनाएं सामने आई हैं। इससे धार्मिक संगठनों और आम श्रद्धालुओं में गहरी नाराज़गी देखने को मिल रही है।

कांवड़ रूट पर लगाए गए थे QR कोड

मेरठ के लिसाड़ी गेट, दिल्ली रोड, परतापुर और कुछ अन्य क्षेत्रों में कांवड़ मार्ग पर QR कोड स्कैनिंग की व्यवस्था की गई थी। कांवड़ियों को शिविरों में प्रवेश करने या विश्राम के लिए QR कोड स्कैन करने को कहा गया। लेकिन कुछ कांवड़ियों ने आरोप लगाया कि स्कैनिंग के बाद उनसे नाम, पता और विशेष रूप से धर्म पूछा गया।

श्रद्धालुओं का कहना है कि ऐसा पूछताछ करना न केवल अनावश्यक था, बल्कि उनकी आस्था पर संदेह करने जैसा भी लगा। कई श्रद्धालु इस प्रक्रिया से असहज हो गए और उन्होंने इसे कांवड़ यात्रा की पवित्रता पर सवाल उठाने जैसा बताया।

श्रद्धालुओं की तीखी प्रतिक्रिया

कांवड़ लेकर हरिद्वार से लौट रहे बागपत निवासी एक कांवड़िए ने कहा, “हम गंगाजल लेकर पैदल भगवान शिव के मंदिर तक जाते हैं। हमारी आस्था को सम्मान मिलना चाहिए, न कि शक की निगाहों से देखा जाना चाहिए।”

कई अन्य यात्रियों ने भी यह अनुभव साझा किया कि धार्मिक आधार पर पूछताछ उन्हें अपमानजनक लगी और इससे कांवड़ यात्रा की पवित्र भावना पर चोट पहुंची है।

हिंदू संगठनों का आक्रोश

इस पूरे मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। संगठनों ने आरोप लगाया है कि यह प्रक्रिया जानबूझकर की जा रही है ताकि कुछ खास समुदायों की जांच या निगरानी की जा सके, जो कि एक धार्मिक यात्रा में स्वीकार्य नहीं है।

हिंदू संगठनों का कहना है कि कोई भी व्यक्ति जब कांवड़ यात्रा करता है, तो वह केवल एक भक्त होता है, न कि किसी धर्म या जाति का प्रतीक। ऐसे में धर्म पूछना अपवित्रता फैलाने की कोशिश मानी जानी चाहिए।

प्रशासन की सफाई: सुरक्षा के लिए की गई थी स्कैनिंग

मामला बढ़ता देख मेरठ प्रशासन ने सफाई दी है कि QR कोड स्कैनिंग की व्यवस्था भीड़ नियंत्रण, आपात स्थिति में मदद और सुरक्षा के उद्देश्य से की गई थी।

मेरठ पुलिस के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी को भी धर्म के आधार पर रोका नहीं गया और न ही किसी को भेदभाव का सामना करना पड़ा। हालांकि, उन्होंने माना कि अगर कुछ स्वयंसेवकों ने धर्म पूछने की मनमानी की है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

स्वयंसेवकों की भूमिका पर सवाल

कुछ रिपोर्टों के अनुसार, स्कैनिंग प्रक्रिया में लगे स्वयंसेवक किसी अधिकृत सरकारी संस्था से नहीं थे। उनके पास कोई पहचान पत्र या प्रशासनिक नियुक्ति नहीं थी। इससे यह आशंका भी जताई जा रही है कि कहीं कुछ असामाजिक तत्व कांवड़ यात्रा में घुसपैठ कर, उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने की कोशिश तो नहीं कर रहे हैं।

भक्ति और व्यवस्था के बीच संतुलन ज़रूरी

कांवड़ यात्रा भारतीय परंपरा की एक अनूठी मिसाल है, जिसमें हर साल लाखों लोग आस्था के साथ भाग लेते हैं। ऐसे में प्रशासन और सामाजिक संगठनों की यह जिम्मेदारी बनती है कि किसी भी भेदभाव या शक की भावना से बचा जाए।

भक्तों की भावनाओं का सम्मान करते हुए सुरक्षा व्यवस्था को संतुलित ढंग से लागू किया जाए, ताकि यात्रा शांतिपूर्ण, पवित्र और विवाद रहित बनी रहे।

निष्कर्ष: आस्था के आयोजन में सावधानी जरूरी

यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमारी सुरक्षा व्यवस्थाएं धार्मिक संवेदनशीलता के साथ मेल खा पा रही हैं? कांवड़ यात्रा न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है। ऐसे में जरूरत है कि सभी संबंधित पक्ष मिलकर इसका सम्मान करें और किसी भी अनुचित गतिविधि या जांच-पड़ताल के नाम पर आस्था को ठेस न पहुंचाई जाए।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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