260 करोड़ की गोल्ड स्मगलिंग का पर्दाफाश: दुबई से आया सोना छत्तीसगढ़ में बेचा गया, माफिया का नेटवर्क उजागर

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छत्तीसगढ़ में उजागर हुआ इंटरनेशनल गोल्ड स्मगलिंग रैकेट

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में 260 करोड़ रुपये के अवैध सोने की तस्करी से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। यह सोना दुबई से बांग्लादेश और फिर भारत-बांग्लादेश सीमा के जरिए देश में प्रवेश कराया जा रहा था। पुलिस और इनकम टैक्स विभाग की संयुक्त कार्रवाई में इस रैकेट के तार दुबई, कोलकाता, बांग्लादेश और छत्तीसगढ़ के कई जिलों से जुड़े पाए गए हैं।

इस पूरे रैकेट में राजनांदगांव एक सेफ ज़ोन की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था, जहां तस्कर न सिर्फ सोना छिपाते थे बल्कि उसे स्थानीय ज्वेलरों और व्यापारियों को खपाते भी थे।

कैसे होता था तस्करी का नेटवर्क?

सूत्रों के अनुसार, दुबई से सोने की ईंटें पहले बांग्लादेश भेजी जाती थीं। इसके बाद बांग्लादेश के खुलना, बेनापोल और सतखिरा ज़िलों से पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना, नादिया और मुर्शिदाबाद के सीमाई इलाकों तक सोना तस्करों द्वारा लाया जाता था।

इसके बाद कोरियर बॉय, दुपहिया चालकों और ट्रकों के ज़रिए सोने को कोलकाता से होते हुए ओडिशा और झारखंड के रास्ते छत्तीसगढ़ लाया जाता था। सोना आमतौर पर मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक सामान या कार के डैशबोर्ड में छिपाकर लाया जाता था।

राजनांदगांव इस पूरे नेटवर्क का ऐसा स्ट्रॉन्गहोल्ड बन गया था, जहां न तो पुलिस को शक होता था और न ही कोई बड़ी जांच होती थी।

कौन हैं इस रैकेट के मुख्य किरदार?

जांच में अब तक जो नाम सामने आए हैं, उनमें राजनांदगांव के एक प्रमुख ज्वेलरी कारोबारी, कोलकाता के दो एजेंट, और बांग्लादेश से जुड़े चार संदिग्ध तस्कर शामिल हैं। इनकम टैक्स विभाग के छापे में कई संदिग्ध लेन-देन, फर्जी GST बिल, और हवाला नेटवर्क के दस्तावेज़ भी बरामद किए गए हैं।

स्थानीय प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

इस रैकेट का इतना बड़ा नेटवर्क होने के बावजूद, स्थानीय पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी—या फिर जानबूझकर नजरअंदाजी की गई।
अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या स्थानीय अधिकारियों और नेताओं की भी इसमें मिलीभगत थी?

जांच एजेंसियों को संदेह है कि कुछ पुलिसकर्मी, टैक्स अधिकारी और राजनेता इस तस्करी रैकेट के पीछे की सुरक्षा परत बने हुए थे।

अब तक की कार्रवाई

इनकम टैक्स विभाग ने राजनांदगांव, दुर्ग और भिलाई के 8 ठिकानों पर छापेमारी की

कुल 47 किलो सोना, 1.3 करोड़ नगद, और 18 संदिग्ध बैंक खातों की पहचान हुई

3 मुख्य आरोपी गिरफ्तार, 6 अन्य की तलाश

फॉरेंसिक ऑडिट टीम द्वारा जब्त किए गए मोबाइल और कंप्यूटर की जांच जारी

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े तार

जांच में पता चला है कि इस रैकेट के कनेक्शन दुबई, बांग्लादेश और नेपाल तक फैले हैं। दुबई से सोना खरीदने के बाद उसे बांग्लादेश के रास्ते भारत भेजा जाता था, क्योंकि यह मार्ग कम सुरक्षा वाला और आसान तस्करी पथ माना जाता है।

तस्करों ने नकली पासपोर्ट, फर्जी ट्रैवल डॉक्यूमेंट, और बॉर्डर पार करने के अलग-अलग रूट बना रखे थे। सुरक्षा एजेंसियां अब इंटरपोल और सीमा सुरक्षा बल (BSF) की मदद से अंतरराष्ट्रीय कड़ियों की तलाश कर रही हैं।

निष्कर्ष

260 करोड़ के इस गोल्ड तस्करी रैकेट ने छत्तीसगढ़, खासकर राजनांदगांव जैसे शांत जिलों में फैले संगठित अपराध की परतें खोल दी हैं। यह मामला न सिर्फ तस्करी और आर्थिक अपराध का है, बल्कि इसमें अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट, हवाला नेटवर्क और स्थानीय तंत्र की मिलीभगत की भी झलक मिलती है।

अब देखना यह है कि जांच एजेंसियां इस पूरे रैकेट को जड़ से उखाड़ पाती हैं या नहीं, और क्या इसमें शामिल सफेदपोशों के नाम भी उजागर हो पाते हैं।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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