
पारंपरिक बचत के मुकाबले अब बढ़ रही है कर्ज पर निर्भरता, वित्तीय असंतुलन की ओर बढ़ रहे हैं लोग
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की ताज़ा फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट ने देश के परिवारों की आर्थिक स्थिति को लेकर एक गंभीर तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय परिवारों की शुद्ध वित्तीय बचत (Net Financial Savings) में लगातार गिरावट आ रही है, जबकि दूसरी ओर ऋण लेने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। वर्ष 2023-24 में घरेलू बचत GDP का सिर्फ 5.1% रही, जो दो साल पहले 7.2% थी। यह बदलाव न सिर्फ चिंता की बात है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के भविष्य के लिए खतरे की घंटी भी है।
बचत से ज्यादा खर्च और कर्ज का बोझ बन रहा नई पीढ़ी की आदत
RBI के अनुसार, परिवारों द्वारा लिए गए कर्ज की मात्रा अब GDP के 43% से ऊपर जा चुकी है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि आम आदमी अब भविष्य के लिए बचत करने की बजाय आज की जरूरतों को पूरा करने के लिए लोन और क्रेडिट कार्ड जैसे विकल्पों पर अधिक निर्भर हो चुका है। महामारी के बाद उत्पन्न हुई आर्थिक अस्थिरता, लगातार बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और आय में धीमी वृद्धि इसके पीछे के बड़े कारण हैं।
जहां पहले लोग छोटे खर्चों के लिए बचत से काम चला लेते थे, अब वही खर्च उन्हें कर्ज लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं। मेट्रो शहरों के साथ-साथ अब छोटे शहरों में भी पर्सनल लोन, BNPL (Buy Now Pay Later) और EMI पर खरीदारी जैसे ट्रेंड आम हो चुके हैं।
सार्वजनिक बैंकों की हिस्सेदारी घटी, निजी बैंकों पर बढ़ा भरोसा
एक और चौंकाने वाला पहलू यह है कि अब लोग सरकारी बैंकों की बजाय निजी बैंकों और एनबीएफसी (ग़ैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों) से ज्यादा कर्ज ले रहे हैं। जून 2024 में होम लोन के क्षेत्र में सार्वजनिक बैंकों की हिस्सेदारी केवल 2% थी, जबकि निजी और अन्य वित्तीय संस्थानों की हिस्सेदारी 98% से अधिक हो गई।
यह बदलाव दर्शाता है कि आम जनता अब तेजी से प्रोसेसिंग, डिजिटल एप्लिकेशन और कम कागज़ी प्रक्रिया वाले विकल्पों को प्राथमिकता दे रही है। हालांकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि निजी बैंकों के कर्ज की ब्याज दरें अक्सर अधिक होती हैं, जो आगे चलकर वित्तीय दबाव का कारण बन सकती हैं।
RBI की चेतावनी: उपभोग आधारित कर्ज देश की अर्थव्यवस्था के लिए खतरा
RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने हाल ही में बैंकों को चेतावनी दी है कि वे उपभोग आधारित कर्ज जैसे पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने कहा कि इस तरह के कर्ज की बढ़ती हिस्सेदारी बैंकिंग प्रणाली की स्थिरता को खतरे में डाल सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि लोगों की बचत दर में कमी और जमा में गिरावट से बैंकों के पास उधार देने के लिए संसाधन सीमित हो सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने बैंकों को सलाह दी कि वे कर्ज वितरण में विवेकपूर्ण निर्णय लें और जोखिम प्रबंधन को मजबूत बनाएं।
निष्कर्ष: क्या अब बचत की बजाय कर्ज ही बनेगा आम भारतीय की आदत?
भारत में एक समय था जब लोग हर महीने की आय से पहले बचत करते थे और फिर खर्च करते थे। लेकिन अब माहौल बदल चुका है। आज की पीढ़ी पहले खर्च कर रही है और बाद में उस पर ब्याज सहित भुगतान कर रही है। ऐसे में जरूरी है कि सरकार और RBI मिलकर वित्तीय साक्षरता बढ़ाएं, ताकि आम लोग समझ सकें कि कर्ज कब ज़रूरी है और कब नुकसानदेह।
यदि यह ट्रेंड इसी तरह चलता रहा, तो भविष्य में देश की घरेलू अर्थव्यवस्था, बैंकिंग सेक्टर और सामाजिक स्थिरता सभी पर बुरा असर पड़ सकता है। अब समय है चेतने का — वरना आने वाला समय केवल EMI में कटेगा, न कि FD में जुड़ेगा।
Author: THE CG NEWS
TheCGNews.in – छत्तीसगढ़ की सच्ची आवाज़ “TheCGNews.in” छत्तीसगढ़ का एक उभरता हुआ डिजिटल न्यूज़ पोर्टल है, जो प्रदेश की ज़मीन से जुड़ी, वास्तविक और निष्पक्ष खबरें लोगों तक पहुँचाने के मिशन के साथ कार्यरत है। इस पोर्टल की सबसे बड़ी ताकत है – स्थानीयता और विश्वसनीयता। TheCGNews.in का फोकस सिर्फ ब्रेकिंग न्यूज पर नहीं, बल्कि उन खबरों पर है जो आम लोगों के जीवन को प्रभावित करती हैं – गांव, कस्बों, पंचायत, युवाओं, शिक्षा, रोजगार, राजनीति, संस्कृति और जन-समस्याओं की सच्ची झलक यहाँ देखने को मिलती है। TheCGNews.in की खास बातें: • ✅ छत्तीसगढ़ की हर कोने से रिपोर्टिंग • ✅ सिर्फ सनसनी नहीं – समाधान की पत्रकारिता • ✅ युवाओं और किसानों की आवाज़ • ✅ भ्रष्टाचार, विकास और बदलाव की असली रिपोर्ट • ✅ हिंदी में सरल और स्पष्ट भाषा में खबरें







