11 जुलाई 2025 का पंचांग: पवित्र सावन मास की शुरुआत शुक्रवार से, जानें पूजा-पाठ का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

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हिंदू पंचांग के अनुसार, 11 जुलाई 2025, शुक्रवार से सावन महीने की शुरुआत हो रही है। यह महीना भगवान शिव की भक्ति का प्रतीक माना जाता है और पूरे देश में इसे विशेष श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। शुक्रवार को गुरुपूर्णिमा के ठीक बाद श्रावण मास का प्रथम दिन पड़ रहा है, जिससे इस बार यह और भी विशेष बन गया है।

उत्तर भारत में इस दिन से श्रावण मास के व्रत, पूजन और कांवड़ यात्रा की शुरुआत हो गई है। मंदिरों में विशेष तैयारियां की गई हैं और कांवड़ियों का सैलाब हरिद्वार, गंगोत्री, देवघर, उज्जैन और अन्य धार्मिक स्थलों की ओर बढ़ रहा है।

सूर्योदय-सूर्यास्त का समय

11 जुलाई को सूर्योदय सुबह 5:30 बजे और सूर्यास्त शाम 7:22 बजे होगा। चंद्रमा मिथुन राशि में रहेगा और दिन की शुरुआत कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होगी। नक्षत्र मृगशिरा रहेगा, जो रात 9:08 बजे तक रहेगा, उसके बाद आर्द्रा नक्षत्र शुरू होगा। दिन में धृति योग और बालव करण रहेगा।

प्रदोष योग में शिव पूजा का महत्व

11 जुलाई को सुबह के समय त्रयोदशी तिथि भी प्रभाव में रहेगी, जिससे प्रदोष योग का संयोग बन रहा है। यह संयोग शिव पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन भगवान शिव को जल, बेलपत्र, धतूरा, पंचामृत आदि से अभिषेक कर पूजा करेंगे।

विशेष रूप से शाम को प्रदोष काल में दीप-पूजन और शिव चालीसा पाठ का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और भक्तों के समस्त कष्ट दूर होते हैं।

सावन सोमवार व्रत की तिथियां

श्रावण मास में चार सोमवार होंगे, जिनका विशेष धार्मिक महत्व है। इन दिनों व्रत रखकर भगवान शिव की आराधना की जाती है। इस बार की सावन सोमवार व्रत तिथियां इस प्रकार हैं:

14 जुलाई – पहला सोमवार

21 जुलाई – दूसरा सोमवार

28 जुलाई – तीसरा सोमवार

4 अगस्त – चौथा सोमवार

इसके अतिरिक्त 10 अगस्त को रक्षाबंधन और सावन पूर्णिमा भी मनाई जाएगी, जो इस पवित्र मास का समापन है।

कांवड़ यात्रा की शुरुआत

सावन मास की शुरुआत के साथ ही देश के कई हिस्सों में कांवड़ यात्रा का शुभारंभ भी हो गया है। उत्तर भारत के प्रमुख तीर्थस्थलों जैसे हरिद्वार, ऋषिकेश, गंगोत्री और देवघर से लाखों श्रद्धालु गंगाजल भरकर पैदल अपने-अपने शहरों के शिव मंदिरों तक पहुंचने के लिए यात्रा पर निकल पड़े हैं।

दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में कांवड़ यात्रा को लेकर व्यापक इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन ने ट्रैफिक डायवर्जन, चिकित्सा शिविर, विश्राम केंद्र और सुरक्षा के लिए पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की है।

बाजारों और मंदिरों में रौनक

सावन की शुरुआत के साथ ही बाजारों में धार्मिक वस्तुओं की बिक्री बढ़ गई है। बेलपत्र, रुद्राक्ष, धूप, दीपक, पूजा सामग्री और भगवान शिव की तस्वीरें बड़ी संख्या में बिक रही हैं। मंदिरों में रंग-रोगन और सजावट की गई है। कई स्थानों पर भजन संध्या, शिव कथा और रुद्राभिषेक जैसे धार्मिक आयोजन भी शुरू हो चुके हैं।

धर्माचार्यों की राय

धर्माचार्यों के अनुसार सावन मास में संयम, भक्ति और सेवा का विशेष महत्व है। इस महीने में शिव की आराधना करने से मानसिक शांति, स्वास्थ्य और पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है। साथ ही इसे व्रत और दान का महीना भी माना गया है।

पूरे सावन महीने में हर सोमवार को व्रत रखने और शिव महिमा का श्रवण करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।

निष्कर्ष

11 जुलाई 2025 से शुरू हुआ श्रावण मास शिवभक्तों के लिए आस्था, भक्ति और समर्पण का पर्व बनकर आया है। मंदिरों में घंटियों की गूंज और कांवड़ियों के जयकारों से वातावरण शिवमय हो गया है। यह मास हर वर्ग के लोगों को संयम और साधना के साथ जीवन को सुधारने का अवसर देता है।

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Author: THE CG NEWS

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