इज़राइल में नेतन्याहू की सरकार पर संकट: दो दलों ने समर्थन वापस लिया, धार्मिक छात्रों की सैन्य छूट बना विवाद

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जेरूसलम। इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार गंभीर राजनीतिक संकट में है। धार्मिक छात्रों को सैन्य सेवा से छूट देने के मुद्दे पर उनकी गठबंधन सरकार टूटने की कगार पर पहुँच गई है। दो प्रमुख अल्ट्रा-ओर्थोडॉक्स पार्टियों—United Torah Judaism (UTJ) और Shas—ने समर्थन वापस ले लिया है, जिससे नेतन्याहू की बहुमत की स्थिति कमजोर हो गई है।

गठबंधन से समर्थन वापसी

UTJ ने हाल ही में संसद में पारित होने वाले विधेयक पर असहमति जताते हुए सरकार से समर्थन वापस ले लिया। यह विधेयक येशिवा छात्रों को सैन्य भर्ती से स्थायी छूट देने के लिए लाया गया था, लेकिन सरकार स्पष्ट समाधान नहीं दे पाई। इसके तुरंत बाद Shas पार्टी ने भी इस्तीफा दे दिया। इन दोनों पार्टियों के हटने के बाद नेतन्याहू की सीटें घटकर केवल 50 रह गई हैं, जबकि कनेसट में बहुमत के लिए 61 सीटें जरूरी हैं।

विवाद का कारण

इज़राइल में 1948 से अल्ट्रा-ओर्थोडॉक्स येशिवा छात्रों को सैन्य भर्ती से छूट दी जाती रही है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रावधान को असंवैधानिक करार देते हुए सेना को लगभग 54,000 येशिवा छात्रों की भर्ती का आदेश दिया। इससे अल्ट्रा-ओर्थोडॉक्स समुदाय और सरकार के बीच टकराव तेज हो गया। सरकार चाहती थी कि एक नया कानून बनाकर इस छूट को बनाए रखा जाए, लेकिन संसद में सहमति नहीं बन पाई।

राजनीतिक असर

इन दलों के समर्थन वापसी से नेतन्याहू की सरकार अल्पमत में आ गई है। इसका सीधा असर आगामी संसद सत्र में होने वाले विधेयकों और बजट पारित होने पर पड़ेगा। विश्लेषकों का कहना है कि अगर सरकार ने जल्दी कोई समाधान नहीं निकाला, तो देश में फिर से चुनाव कराने की नौबत आ सकती है।

सार्वजनिक प्रतिक्रिया और दबाव

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब इज़राइल सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। गाज़ा में लंबे समय से जारी संघर्ष और सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ते तनाव के बीच सेना को नए जवानों की जरूरत है। ऐसे में धार्मिक छात्रों को छूट देने के खिलाफ आम जनता में नाराज़गी बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि युद्ध के समय सभी नागरिकों को समान जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

आगे क्या?

संसद अगस्त में अवकाश पर जाएगी, जिससे सरकार को समाधान निकालने के लिए कुछ समय मिल सकता है। हालांकि, राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि बिना समझौते के नेतन्याहू की सरकार का बने रहना मुश्किल है। अगर हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले महीनों में इज़राइल में फिर से आम चुनाव हो सकते हैं।

निष्कर्ष

नेतन्याहू की सरकार धार्मिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों के बीच फंस गई है। यह संकट न केवल राजनीतिक स्थिरता बल्कि देश की रक्षा नीति के लिए भी चुनौतीपूर्ण है। आने वाले कुछ हफ्ते तय करेंगे कि सरकार बच पाएगी या इज़राइल को फिर से चुनाव की ओर बढ़ना होगा।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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