ED की छापेमारी पर भड़के पूर्व CM भूपेश बघेल, बोले – अडानी के लिए काटे जा रहे पेड़ों का मुद्दा उठाना था, इसलिए टारगेट किया गया

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रायपुर, 18 जुलाई 2025:

छत्तीसगढ़ की राजनीति आज एक बार फिर गरमा गई जब राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के रायपुर स्थित आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी की। यह कार्रवाई सुबह होते ही शुरू हुई और कई घंटे तक चली। इस बीच कांग्रेस पार्टी और बघेल समर्थकों में गहरा आक्रोश देखने को मिला। भूपेश बघेल ने खुद सामने आकर इस छापेमारी को राजनीतिक प्रतिशोध बताया और दावा किया कि वे अडानी ग्रुप के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले थे, जिससे घबरा कर यह कदम उठाया गया है।

क्या बोले भूपेश बघेल?

पूर्व मुख्यमंत्री ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि यह छापेमारी सिर्फ एक बहाना है, असली वजह है कि वे अडानी ग्रुप द्वारा छत्तीसगढ़ में हो रही पेड़ों की अवैध कटाई का मामला विधानसभा और सार्वजनिक मंचों पर उठाने वाले थे।

उन्होंने कहा,

“मैं अडानी के लिए काटे जा रहे हज़ारों पेड़ों की बात करने वाला था। यह छत्तीसगढ़ के जंगलों और हमारे आदिवासी भाइयों के अधिकारों का सवाल है। लेकिन जैसे ही मैंने इसके खिलाफ बोलने की तैयारी की, ED की टीम मेरे दरवाजे पहुंच गई। यह सीधा हमला है लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर।”

बेज का बयान – ‘विपक्ष का गला घोंटा जा रहा है’

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बेज ने इस कार्रवाई को “लोकतंत्र का गला घोंटने” वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि जब भी कोई विपक्षी नेता सरकार से कठिन सवाल पूछता है, तो उसे डराने-धमकाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जाता है।

“यह कोई संयोग नहीं है। जब भी विपक्ष सरकार से पर्यावरण, खनिजों की लूट, या कॉर्पोरेट की गलत हरकतों पर सवाल करता है, उसी समय ऐसे रेड्स डाली जाती हैं। ये कोशिश है सच्चाई को दबाने की।” – बेज

कौन सा है पेड़ों की कटाई का मामला?

बघेल जिस मुद्दे की बात कर रहे हैं, वह छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों में एक बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट को लेकर है, जिसे अडानी ग्रुप द्वारा संचालित किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट के तहत हज़ारों पेड़ों की कटाई की योजना है, जिससे पर्यावरणविद्, स्थानीय आदिवासी और सामाजिक कार्यकर्ता पहले से ही नाराज़ हैं।

बघेल का दावा है कि इस प्रोजेक्ट में जमीन अधिग्रहण में गड़बड़ी और पर्यावरण कानूनों की अनदेखी भी की गई है, जिसे लेकर वे आवाज़ उठाने वाले थे।

ED की कार्रवाई पर सरकार की चुप्पी

ED की छापेमारी को लेकर अभी तक केंद्र सरकार या छत्तीसगढ़ की वर्तमान सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। सूत्रों की मानें तो यह छापेमारी एक पुराने वित्तीय लेनदेन और संपत्ति से जुड़ी जांच के सिलसिले में की जा रही है, लेकिन इसके सटीक कारण की पुष्टि नहीं हुई है।

राजनीति या कानून का पालन – क्या है सच्चाई?

यह कोई पहला मौका नहीं है जब किसी विपक्षी नेता के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई हुई हो। पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न राज्यों के कई विपक्षी नेताओं के खिलाफ CBI और ED की कार्रवाइयाँ की गई हैं, जिन्हें विपक्ष ने हमेशा “राजनीतिक बदले” की भावना से प्रेरित बताया है।

वहीं, सत्ता पक्ष का तर्क रहता है कि “कानून अपना काम कर रहा है” और जो भी व्यक्ति दोषी है, उसे जांच का सामना करना होगा।

जनता की नजरें अब आगे की कार्रवाई पर

भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक मजबूत और मुखर चेहरा माने जाते हैं। उनकी ओर से लगाया गया यह आरोप कि उन्हें अडानी और पर्यावरण मुद्दे पर चुप कराने के लिए टारगेट किया गया, एक बड़ा राजनीतिक संदेश देता है।

अब जनता की नजर इस पर टिकी है कि क्या यह मामला यहीं रुकता है या फिर इसके और भी राजनीतिक और कानूनी आयाम सामने आते हैं।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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