ईरान ने 7 महीनों में 14 लाख अफगानों को जबरन निकाला: मानवाधिकारों का उल्लंघन और बढ़ता मानवीय संकट

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ईरान सरकार ने जनवरी 2025 से जुलाई 2025 के बीच लगभग 14 लाख अफगान नागरिकों को बलपूर्वक देश से निकाला है। यह निष्कासन प्रक्रिया आरोपों, हिंसा और मानवाधिकार हनन के गंभीर आरोपों से घिरी हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, अफगानों को न केवल मारा-पीटा गया, बल्कि उनके पैसे और पहचान पत्र भी छीन लिए गए। कई मामलों में नाबालिग बच्चों को उनके माता-पिता से अलग कर सीमा पार भेज दिया गया, जबकि कुछ पर जासूसी और आतंकवाद जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।

निष्कासन की पृष्ठभूमि और त्वरित कार्रवाई

ईरान ने मार्च 2025 में घोषणा की थी कि अवैध रूप से रह रहे सभी अफगानों को 6 जुलाई तक देश छोड़ना होगा। इसके बाद बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू हुई। खासकर ईरान-इज़राइल युद्ध के बाद अफगानों पर जासूसी का संदेह जताते हुए, 16 दिनों के भीतर करीब 5 लाख अफगानों को निकाला गया। रिपोर्टों के अनुसार, एक दिन में औसतन 30,000 से अधिक अफगानी नागरिकों को देश से निकाला गया।

जबरन निकासी और हिंसा के आरोप

वापसी करने वाले कई अफगानों ने बताया कि उन्हें पुलिस द्वारा बुरी तरह पीटा गया, उनकी संपत्ति जब्त की गई और परिवारों को एक-दूसरे से अलग कर दिया गया। बच्चों को बिना अभिभावक के सीमा पार भेजा गया, कई दिनों तक भोजन और पानी के बिना रखा गया। कुछ रिपोर्टों में बताया गया कि बच्चों को हिरासत में रखते समय उनके साथ मारपीट भी की गई।

महिलाओं और बच्चों पर विशेष प्रभाव

यूएन एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, हजारों महिलाओं और बच्चों को बिना किसी संरचना के अफगानिस्तान भेजा गया है। अकेले बच्चों की संख्या लगभग 5,000 बताई जा रही है। अफगानिस्तान में तालिबान शासन के तहत महिलाओं को शिक्षा, रोजगार और स्वतंत्रता जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित कर दिया गया है, जिससे उनके जीवन पर गहरा असर पड़ा है।

अंतरराष्ट्रीय संगठनों की प्रतिक्रिया

मानवाधिकार संगठनों ने ईरान की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। ‘नॉन-रिफाउलमेंट’ (non-refoulement) सिद्धांत के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को ऐसे देश में नहीं भेजा जा सकता जहां उसकी जान या स्वतंत्रता को खतरा हो। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों ने ईरान और पाकिस्तान से अपील की है कि वे निर्वासित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और उन्हें सम्मानजनक वापसी का अवसर दें।

अफगानिस्तान में बढ़ता संकट

तालिबान प्रशासन ने खुद स्वीकार किया है कि देश में इतनी बड़ी संख्या में लौट रहे लोगों को संभालने की क्षमता नहीं है। इससे बेरोजगारी, भोजन की कमी, और रहने की व्यवस्था जैसे बड़े मानवीय संकट उत्पन्न हो गए हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों पर भीड़ इतनी अधिक हो गई है कि राहत और पुनर्वास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

निष्कर्ष

ईरान की इस निष्कासन नीति ने लाखों अफगानी नागरिकों को जीवन के सबसे कठिन दौर में धकेल दिया है। जासूसी और सुरक्षा के नाम पर हो रही यह जबरन निकासी मानवीय दृष्टिकोण से बेहद चिंताजनक है। जब तक अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पर ठोस कदम नहीं उठाता, यह संकट और गहराता जाएगा।

मानवता के मूल सिद्धांतों की रक्षा के लिए यह आवश्यक है कि हर प्रवासी को गरिमा के साथ जीने का अधिकार मिले, और राजनीतिक कारणों से निर्दोष लोगों को बेघर न किया जाए।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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