
देश की प्रमुख बैंकिंग संस्था स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) और उसके प्रमोटर डायरेक्टर अनिल अंबानी के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाया है, जिसमें उसने RCom के लोन खाते को ‘फ्रॉड’ करार दे दिया है। सरकार द्वारा इस मामले में CBI शिकायत दाखिल करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इस कार्रवाई के मद्देनज़र, आज प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अनिल अंबानी की कंपनियों और आवासों पर एक व्यापक रेड की है।
SBI ने ‘फ्रॉड’ टैग क्यों लगाया?
SBI ने 13 जून 2025 को RCom के खाते को RBI के Fraud Risk Management निर्देशों और बैंक की फ्रॉड पॉलिसी के तहत ‘fraud’ घोषित किया था। इसके बाद 24 जून तक बैंक ने RBI को इस वर्गीकरण की सूचना भेज दी और CBI में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया कि SBI की कुल क्रेडिट एक्सपोज़र ₹2,227.64 करोड़ का है जबकि गैर-फंड आधारित बैंक गारंटी भी ₹786.52 करोड़ की है। RCom की कुल बैंकिंग उधार ₹31,580 करोड़ से अधिक बताई गई है। अनुसार रिसॉल्यूशन प्रोफेशनल ने 1 जुलाई को BSE को भी इस फ्रॉड टैग की जानकारी दी।
विवेचना में यह भी सामने आया कि लगभग 44% रक़म पुराने लोन चुकाने और 41% समूह की कनेक्टेड कंपनियों को राशि ट्रांसफर करने में लगाई गई थी। उदाहरण के लिए डेना बैंक का ₹250 करोड़ का लोन जो कर-देयता के लिए था, वो सीधे RCom समूह की एक अन्य कंपनी को इंटर-कार्पोरेट डेपॉजिट (ICD) के रूप में ट्रांसफर कर दिया गया था।
ED की रेड—कहां-कहां कार्रवाई हुई?
इसी मामले में Enforcement Directorate (ED) ने आज जवाहरलाल नेहरू मार्ग, मुंबई में स्थित अनिल अंबानी की न्यू वर्ल्ड और Reliance समूह की कम से कम 35 जगहों पर छापा मारा। ED की सूचना के अनुसार, यह मामला ₹3,000 करोड़ के Yes Bank कर्ज गैरव्यवहार और लान्डरिंग से जुड़ा हुआ है। इसमें समूह की लगभग 50 कंपनियाँ शामिल बताई गई हैं। यह रेड उस “well-planned scheme to siphon off public money” की जांच के हिस्से के रूप में की गई है, जिसमें कथित तौर पर रिश्वतखोरी (bribery) का एंगल भी सामने आया है।
मामला क्यों संवेदनशील माना जा रहा है?
यह कार्रवाई अनिल अंबानी की वित्तीय स्थिति पर नया दबाव डाल सकती है, विशेष रूप से ऐसे समय जब RCom दिवाला निवारण प्रक्रिया (CIRP) के तहत है और न्यायाधिकरण का निर्णय लंबित है। यदि CBI जांच में दोष प्रमाणित होता है, तो SBI और अन्य वितरक संस्थाएं उन्हें भविष्य में वित्तीय सहायता देने से वंचित कर सकते हैं, और 5 साल तक बैंकिंग से वंचित रख सकते हैं।
सूख विश्लेषण: RCom का कर्ज मापदंड
साल 2016 के बाद RCom ने विभिन्न बैंकों से ₹31,580 करोड़ से अधिक का लोन लिया था, जिसमें SBI की हिस्सेदारी ₹3,000 करोड़ से ऊपर थी। बैंक की जांच रिपोर्ट में उधार राशि के बड़े हिस्से को समूह की इंटर-कॉर्पोरेट ट्रांजेक्शन्स में इस्तेमाल करना और अनियमित संचालन संदिग्ध पाया गया। बैंक के Fraud Identification Committee ने स्पष्ट तौर पर कहा कि इस तरह की गतिविधियाँ सामान्य व्यापार नहीं बल्कि किताबों में हेरफेर की ओर इशारा करती हैं।
अनिल अंबानी और RCom पर पहले क्या हुई कार्रवाई?
यह पहला मौका नहीं है जब SBI ने Fr aud Classify किया हो। नवंबर 2020 में भी SBI ने एक बार इसे ‘fraud’ घोषित किया और CBI में शिकायत की थी। हालांकि दिल्ली हाई कोर्ट की रोक के कारण वह आदेश उलटा दिया गया। मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बैंक को सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य हो गया, और इसी प्रक्रिया को पूरा करते हुए जून 2025 में दोबारा Fr aud Classify कर दिया गया।
आगे क्या हो सकता है?
आरंभिक जानकारी के अनुसार, SBI ये कदम आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए मजबूत आधार तैयार करना चाहता है। यदि CBI जांच में त्रुटि पाई जाती है, तो निर्गत निर्देशों के तहत अनिल अंबानी चार्जशीट हो सकते हैं। NCLT में चल रही Insolvency प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। साथ ही, अगर कंपनियों पर प्रतिबंध लागू होते हैं, तो उनके Resolution Plan की स्वीकृति को रोक भी दिया जा सकता है।
निष्कर्ष
देश की सबसे बड़ी बैंक ने जिस ‘fraud’ टैग को RCom पर लगाया है, वह केवल एक बैंकिंग विवाद नहीं बल्कि देश में कॉरपोरेट गवर्नेंस, बैंकिंग मानकों और उच्चस्तरीय वित्तीय पारदर्शिता के सवाल को उठा रहा है। ED की रेड और CBI की संभावित कार्रवाई से अनिल अंबानी और उनके समूह की प्रतिष्ठा, कानूनी स्थिति और भविष्य की परियोजनाएं सभी प्रभावित हो सकती हैं।
यह मामला न सिर्फ एक उद्योगपति की कहानी है, बल्कि भारत के वित्तीय कानून और नियामक संस्थानों की क्षमता और प्रभाव की परीक्षा भी है।
Author: THE CG NEWS
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