
छत्तीसगढ़ में शनिवार को आयोजित आबकारी आरक्षक (Excise Constable) भर्ती परीक्षा में ड्रेस कोड और प्रवेश से जुड़े नियमों को लेकर कई अभ्यर्थियों ने नाराज़गी जताई। प्रदेशभर में परीक्षा के लिए लाखों उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, लेकिन कुछ परीक्षा केंद्रों से मिली रिपोर्टों के अनुसार कड़े नियमों के चलते कई उम्मीदवारों को असुविधा का सामना करना पड़ा।
दुपट्टा उतरवाने से महिला अभ्यर्थियों में नाराजगी
परीक्षा केंद्रों पर महिला अभ्यर्थियों को दुपट्टा हटाने को कहा गया। कई जगहों पर छात्राओं को प्रवेश से पहले गहन तलाशी दी गई, जिसमें उनके दुपट्टे उतरवाए गए और काले कपड़े पहनने पर ऐतराज जताया गया। कुछ छात्राओं ने मीडिया से बातचीत में बताया कि परीक्षा केंद्र पर उन्हें शर्मिंदगी महसूस हुई क्योंकि महिला चेकिंग स्टाफ की संख्या कम थी और खुलेआम उनकी तलाशी ली गई।
दो मिनट की देरी से छात्रा परीक्षा से वंचित
रायपुर के एक परीक्षा केंद्र पर एक छात्रा परीक्षा के निर्धारित समय से केवल दो मिनट देरी से पहुंची। कारण यह था कि वह नियमों के अनुसार हल्के रंग की टी-शर्ट पहनने के लिए बाहर गई थी। जब वह लौटी, तब तक केंद्र का मुख्य द्वार बंद हो चुका था। गेट पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने उसे अंदर जाने से रोक दिया, जिससे वह परीक्षा नहीं दे सकी। इस घटना को लेकर परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों ने कड़ी आपत्ति दर्ज की।
पुरुष अभ्यर्थियों के जूते और बेल्ट भी उतरवाए गए
परीक्षा केंद्रों पर पुरुष अभ्यर्थियों से भी कड़े नियमों का पालन करवाया गया। उन्हें अपने जूते, बेल्ट और घड़ी आदि प्रवेश से पहले उतारने को कहा गया। कई छात्रों ने बताया कि उन्हें फर्श पर नंगे पांव चलना पड़ा, जिससे उन्हें असुविधा हुई। कुछ जगहों पर उम्मीदवारों की लंबी कतारें लगी रहीं और गेट के बाहर ही गर्मी में घंटों खड़ा रहना पड़ा।
परीक्षा बोर्ड ने कहा— नकल रोकने के लिए आवश्यक कदम
परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था ने इन नियमों को लेकर सफाई दी है। परीक्षा बोर्ड के अनुसार, सभी दिशा-निर्देश पहले ही एडमिट कार्ड और वेबसाइट के माध्यम से जारी कर दिए गए थे। बोर्ड का कहना है कि नकल रोकने के लिए कड़े कदम उठाना जरूरी था और इन्हीं कारणों से जैमर, मेटल डिटेक्टर और अन्य सुरक्षा उपाय लागू किए गए थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ड्रेस कोड परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू किया गया था।
अभ्यर्थियों और विशेषज्ञों की राय
हालांकि, छात्रों और शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नियम लागू करने का तरीका लचीला और मानवीय होना चाहिए था। परीक्षार्थियों ने सुझाव दिया कि नियमों की जानकारी समय पर और सरल भाषा में दी जानी चाहिए थी, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र भी ठीक से समझ सकें। कई उम्मीदवारों का मानना है कि केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, उसे लागू करने का तरीका भी संवेदनशील होना चाहिए।
सोशल मीडिया पर भी उठे सवाल
परीक्षा के बाद सोशल मीडिया पर कई पोस्ट वायरल हुए, जिनमें अभ्यर्थियों ने अपनी आपबीती साझा की। खासकर महिला अभ्यर्थियों ने दुपट्टा उतरवाने और खुलेआम तलाशी के तरीके पर आपत्ति जताई। ट्विटर और फेसबुक पर हैशटैग्स के साथ बोर्ड से जवाब मांगने की मांग की गई।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ की आबकारी आरक्षक परीक्षा एक महत्वपूर्ण भर्ती प्रक्रिया थी, जिसमें लाखों युवाओं ने भाग लिया। लेकिन परीक्षा के दौरान लागू किए गए नियमों की सख्ती और उसके अमल के तरीके ने कई छात्रों के भविष्य पर असर डाला। परीक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत है ताकि पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ-साथ छात्र सम्मान भी बना रहे।
Author: THE CG NEWS
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