
भारत में थायराइड रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ताज़ा मेडिकल रिपोर्ट्स और हेल्थ सर्वे के अनुसार, देश में हर तीसरा व्यक्ति किसी न किसी प्रकार की थायराइड संबंधी समस्या से जूझ रहा है। यह स्थिति विशेष रूप से महिलाओं में अधिक देखने को मिल रही है, लेकिन पुरुष और बच्चे भी अब इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अनियमित जीवनशैली, खानपान की आदतें और जागरूकता की कमी इसके प्रमुख कारण हैं।
क्या है थायराइड और क्यों होता है?
थायराइड एक ग्रंथि है जो गर्दन में स्थित होती है और हार्मोन बनाकर शरीर की ऊर्जा, चयापचय और मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को नियंत्रित करती है। जब यह ग्रंथि या तो अधिक हार्मोन बनाने लगती है (हाइपरथायराइडिज्म) या बहुत कम (हाइपोथायराइडिज्म), तो शरीर में अनेक प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, आजकल महिलाओं में थायराइड असंतुलन की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, खासकर गर्भावस्था के दौरान या उसके बाद। वहीं पुरुषों में यह समस्या लंबे समय तक अनजानी बनी रहती है क्योंकि वे इसके लक्षणों को आम कमजोरी या तनाव समझ कर नजरअंदाज़ कर देते हैं।
पहचानें थायराइड के लक्षण
हाइपोथायराइडिज्म में व्यक्ति को थकावट, वजन बढ़ना, बाल झड़ना, ठंड अधिक लगना, कब्ज और अवसाद जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। वहीं हाइपरथायराइडिज्म में वजन घटना, अधिक पसीना आना, दिल की धड़कन तेज होना, बेचैनी और घबराहट जैसी स्थिति बनती है।
विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि लंबे समय तक इन लक्षणों की अनदेखी हृदय रोग, बांझपन, मानसिक असंतुलन और अन्य गंभीर रोगों में बदल सकती है।
युवाओं और बच्चों में भी बढ़ रहा खतरा
यह अब केवल वयस्कों तक सीमित नहीं रहा। हाल के वर्षों में बच्चों और किशोरों में भी थायराइड के मामले दर्ज किए जा रहे हैं। इसका मुख्य कारण अनियमित खानपान, अत्यधिक मोबाइल स्क्रीन टाइम, और मोटापा है। बच्चों में थायराइड के कारण उनकी ग्रोथ और एकेडमिक प्रदर्शन पर भी असर पड़ता है।
रोकथाम और इलाज
थायराइड की नियमित जांच (TSH, T3, T4) कराना सबसे अहम कदम है। एक बार बीमारी की पुष्टि हो जाए तो डॉक्टर की सलाह से नियमित दवा और संतुलित आहार से इसे पूरी तरह नियंत्रित रखा जा सकता है। आयोडीन युक्त नमक, हरी पत्तेदार सब्जियां, और पर्याप्त नींद व व्यायाम इसका असर कम करने में सहायक हैं।
योग, विशेषकर सर्वांगासन, उज्जायी प्राणायाम, और भ्रामरी प्राणायाम थायराइड ग्रंथि को सक्रिय बनाए रखने में मददगार माने गए हैं। साथ ही, तनाव से बचाव के लिए ध्यान और नियमित दिनचर्या अत्यंत आवश्यक है।
निष्कर्ष
थायराइड कोई लाइलाज बीमारी नहीं है, लेकिन यदि समय रहते इसकी पहचान न हो तो यह जीवनभर की जटिलताओं का कारण बन सकती है। सरकार और स्वास्थ्य संस्थानों को इस विषय पर अधिक जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है, ताकि लोग समय पर जांच करवाएं और इलाज शुरू करें।
समय रहते की गई एक सादा सी जाँच, आपकी जिंदगी को सालों आगे बढ़ा सकती है। थायराइड को नज़रअंदाज़ करना, अब एक बड़ा स्वास्थ्य जोखिम बन चुका है — इसे गंभीरता से लें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं।
Author: THE CG NEWS
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