
हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग से जुड़े कॉलेजों में अध्ययनरत ऐसे छात्र जो पहले सेमेस्टर की परीक्षा में किसी कारणवश शामिल नहीं हो पाए थे और अब प्राइवेट परीक्षा के माध्यम से परीक्षा देना चाहते हैं, उनके लिए अब पंजीयन कराना अनिवार्य कर दिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना पंजीयन के अब किसी भी छात्र को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिलेगी।
नई शिक्षा नीति के तहत बदलाव
यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत लागू किए गए हैं। नीति के अनुसार अब स्नातक पाठ्यक्रमों में पढ़ाई का पैटर्न बदला गया है और छात्रों को सेमेस्टर के अंत में दो बार आंतरिक मूल्यांकन में शामिल होना होगा। पहले की तरह वार्षिक परीक्षा प्रणाली को समाप्त कर अब सेमेस्टर सिस्टम लागू कर दिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि अब छात्रों को केवल परीक्षा के समय नहीं, बल्कि पूरे सत्र में सक्रिय भागीदारी दिखानी होगी।
पढ़ाई की नई व्यवस्था: तीन स्तरीय पाठ्यक्रम
नई व्यवस्था के अंतर्गत स्नातक स्तर की पढ़ाई को तीन कोर्स में विभाजित किया गया है:
1.डिसिप्लिनरी स्पेसिफिक कोर्स (DSC): इसमें छात्र अपने विषय से संबंधित मुख्य पेपर का अध्ययन करेंगे। प्रत्येक विषय में 4 से 6 पेपर होंगे। छात्र अपने पसंदीदा विषय के आधार पर इस कोर्स को चुन सकते हैं।
2.जनरिक एलेक्ट्रिव कोर्स (GEC): इसमें छात्र अपने विषय से अलग किसी अन्य विषय के इंटरडिसिप्लिनरी कोर्स को पढ़ सकते हैं। इसका उद्देश्य छात्रों को बहुविषयक शिक्षा देना है।
3.एप्लाइड स्किल बेस्ड कोर्स (AECC/SEC): इसके तहत छात्रों को कंप्यूटर स्किल्स, डेटा एनालिसिस, रचनात्मक लेखन, योग, संगीत, पर्यावरण अध्ययन जैसे व्यावहारिक और कौशल आधारित विषय पढ़ाए जाएंगे।
प्राइवेट परीक्षा के लिए दो मूल्यांकन अनिवार्य
प्राइवेट छात्रों को भी अब केवल लिखित परीक्षा नहीं बल्कि दो बार आंतरिक मूल्यांकन (Internal Assessment) में भाग लेना जरूरी होगा। कॉलेजों को निर्देश दिया गया है कि वे प्रत्येक प्राइवेट छात्र से दोनों मूल्यांकन करवाएं, नहीं तो वे फाइनल परीक्षा में बैठने के योग्य नहीं माने जाएंगे।
कुल 161 कॉलेजों में होगा यह नियम लागू
हेमचंद यादव विश्वविद्यालय से जुड़े कुल 161 कॉलेजों में यह नियम अनिवार्य रूप से लागू किया गया है। जिन छात्रों ने पहले परीक्षा नहीं दी है और अब निजी छात्र के रूप में परीक्षा देना चाहते हैं, उनके लिए यह नई व्यवस्था जरूरी हो गई है।
छात्रों के लिए चुनौतियां और दिशा
नए पद्धति से छात्रों को अपनी पढ़ाई और परीक्षा के प्रति अधिक सजग रहना होगा। केवल परीक्षा के समय उपस्थिति अब पर्याप्त नहीं होगी। आंतरिक मूल्यांकन, निरंतर अध्ययन और पंजीयन जैसी प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य है। इससे न केवल परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता आएगी बल्कि छात्रों की शैक्षणिक गुणवत्ता भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
Author: THE CG NEWS
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