
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक महत्वपूर्ण भाषण में दावा किया है कि जब भारत ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया, तब पाकिस्तान की सेना खुद पीछे हटने को मजबूर हो गई थी। उन्होंने कहा कि यह युद्ध कोई कूटनीतिक समझौते या अंतरराष्ट्रीय दबाव से नहीं, बल्कि भारत की ताकत से रुका। मोदी के मुताबिक, पाकिस्तान के डीजीएमओ (डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस) ने भारत से खुद अपील की थी कि अब बस करिए, क्योंकि पाकिस्तान के पास और मार सहने की ताकत नहीं बची है। यह बयान उन्होंने देशवासियों के सामने आत्मविश्वास और राष्ट्रीय गर्व को दर्शाते हुए दिया।
भारत की निर्णायक कार्रवाई का नतीजा
प्रधानमंत्री मोदी ने यह बात एक जनसभा को संबोधित करते हुए कही, जिसमें उन्होंने पूर्व सरकारों और वैश्विक नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले की सरकारें दुनिया के नेताओं से गुहार लगाती थीं कि जंग रुकवाओ, लेकिन अब दुनिया को समझ आ गया है कि भारत खुद अपनी सीमाओं की रक्षा करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि यह पहली बार हुआ जब पाकिस्तान की ओर से युद्धविराम की अपील की गई, वह भी भारत से सीधे तौर पर।
मोदी के मुताबिक, यह बदलाव देश की रक्षा नीति और भारतीय सेना के बढ़ते आत्मविश्वास का नतीजा है। उन्होंने 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 की एयर स्ट्राइक का भी जिक्र किया, और बताया कि कैसे भारत ने आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्यवाही कर दुनिया को दिखा दिया कि अब वह ‘नया भारत’ है।
‘नई सोच, नई नीति और नया आत्मविश्वास’
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का भारत पुराने भारत से बिल्कुल अलग है। अब हम सिर्फ सहन नहीं करते, बल्कि जवाब देते हैं — वह भी दुश्मन की भाषा में। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान के डीजीएमओ ने खुद हमारे डीजीएमओ को कॉल करके कहा- प्लीज अब बंद कीजिए, अब हम और नहीं झेल सकते। पहले दुनिया के नेता कॉल करते थे कि युद्ध रोक दो, अब दुश्मन की सेना खुद कहती है कि बस करो।”
यह बयान न केवल भारतीय सेना की मजबूती को रेखांकित करता है, बल्कि भारत की कूटनीति में आए बदलाव की भी झलक देता है, जहां अब देश की नीति ‘पहले चेतावनी, फिर कार्रवाई’ की ओर बढ़ रही है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान पर देशभर में तीखी राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। बीजेपी समर्थकों ने इसे राष्ट्रभक्ति और नेतृत्व की ताकत बताया है, वहीं विपक्षी दलों ने इसे चुनावी प्रोपेगेंडा करार दिया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि मोदी सरकार को ऐसे बयान देने से पहले तथ्य और समय की संवेदनशीलता का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि इससे सीमावर्ती इलाकों में तनाव और बढ़ सकता है।
वहीं, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने मोदी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि भारतीय सेना पूरी तरह सक्षम है और जरूरत पड़ने पर सीमा पर जवाब देने में संकोच नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का यह बयान सेना के साहस और नीतिगत परिवर्तन का प्रतीक है।
जनता में बढ़ा आत्मविश्वास
प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं तेजी से सामने आईं। कई नागरिकों ने इसे गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि भारत अब किसी पर निर्भर नहीं, बल्कि स्वयं की शक्ति से अपने हितों की रक्षा कर सकता है। ट्विटर और फेसबुक पर ‘#NayaBharat’ और ‘#ModiOnWar’ जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।
इस पूरी घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत की सुरक्षा नीति अब सिर्फ रक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि हमला करके रोकने की दिशा में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह बयान देश की सुरक्षा और विदेश नीति में आई बदलावों की पुष्टि करता है — एक ऐसा बदलाव जो भारत को वैश्विक मंच पर एक सशक्त राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करता है।
Author: THE CG NEWS
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