बिना दूध के बन रहा था पनीर, खाद्य विभाग की कार्रवाई से खुला बड़ा फर्जीवाड़ा

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राजधानी रायपुर और आसपास के क्षेत्रों में नकली पनीर बनाने और बेचने का गोरखधंधा बेकाबू होता जा रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा लगातार की जा रही छापेमारी और कार्रवाई के बावजूद इस काले कारोबार पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पा रहा है। विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, बीते 9 महीनों में रायपुर जिले में लगभग 8000 किलो से अधिक नकली पनीर जब्त किया जा चुका है। सबसे हैरानी की बात यह है कि इस दौरान 6 फैक्ट्रियों को सील कर दिया गया, लेकिन इसके बावजूद मिलावटी पनीर का कारोबार जारी है।

खाद्य विभाग की टीमें पिछले कई महीनों से लगातार नकली पनीर तैयार करने वाली इकाइयों पर कार्रवाई कर रही हैं। ये फैक्ट्रियां न तो किसी मान्यता प्राप्त संस्था से रजिस्टर्ड थीं, और न ही इनके पास वैध खाद्य निर्माण लाइसेंस थे। इसके बावजूद ये बड़े पैमाने पर मिलावटी पनीर का निर्माण कर रही थीं, जो बिना किसी गुणवत्ता जांच के शहर के बाजारों में बेचा जा रहा था।

केमिकल, सिंथेटिक दूध और घटिया फैट से बन रहा नकली पनीर

खाद्य निरीक्षकों ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इन फैक्ट्रियों में पनीर बनाने के लिए गाय-भैंस का दूध इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था। इसकी जगह सिंथेटिक दूध, रिफाइंड ऑयल, टॉयलेट क्लीनर जैसी केमिकल युक्त सामग्री और घटिया किस्म का फैट मिलाकर नकली पनीर तैयार किया जा रहा था। इस प्रक्रिया में उपयोग किए जा रहे रसायन शरीर में जाकर गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं — जिनमें गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संक्रमण, कैंसर और लिवर संबंधित समस्याएं शामिल हैं।

उरला, टाटीबंध, बीरगांव और देवपुरी में प्रमुख कार्रवाई

खाद्य विभाग की कार्रवाई के प्रमुख केंद्र उरला, टाटीबंध, बीरगांव और देवपुरी इलाके रहे, जहां बीते कुछ महीनों में कई छापेमारी की गई। 21 जुलाई को टाटीबंध क्षेत्र में एक गोदाम से 1500 किलो नकली पनीर जब्त किया गया था, जिसे शहर की होटलों और मिठाई दुकानों में भेजा जा रहा था। इसके कुछ ही दिन बाद 30 जुलाई को उरला में एक और अवैध फैक्ट्री पर कार्रवाई हुई, जहां बिना किसी दस्तावेज और लाइसेंस के नकली पनीर तैयार किया जा रहा था। विभाग ने मौके पर ही प्लांट को सील कर भारी मात्रा में केमिकल, फैट और तैयार पनीर जब्त किया।

फैक्ट्रियों की सीलिंग के बाद भी जारी रहा कारोबार

चौंकाने वाली बात यह है कि खाद्य विभाग द्वारा फैक्ट्रियों को सील किए जाने के बाद भी कुछ स्थानों पर नकली पनीर का निर्माण चोरी-छिपे जारी रहा। जांच में सामने आया कि कुछ कारोबारी सीलिंग के बावजूद नई जगहों पर दोबारा फैक्ट्री शुरू कर लेते हैं या रात के समय गुप्त रूप से उत्पादन करते हैं। यही कारण है कि विभाग की कार्रवाई होने के बावजूद इस व्यापार को जड़ से समाप्त नहीं किया जा सका है।

स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़, विभाग ने की जनता से अपील

खाद्य विभाग के अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे बाजार से पनीर खरीदते समय उसकी गुणवत्ता और स्रोत की जानकारी जरूर लें। अगर किसी दुकान पर संदिग्ध पनीर या बिना ब्रांड का पनीर बिकते देखा जाए, तो उसकी सूचना तुरंत खाद्य सुरक्षा नियंत्रण कक्ष में दें। विभाग अब इस दिशा में एफआईआर दर्ज कराने और अपराधियों के खिलाफ न्यायालयीन कार्रवाई की भी तैयारी कर रहा है।

विशेषज्ञों की चेतावनी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बिना दूध के रसायनों से बना नकली पनीर सीधे तौर पर किडनी, लीवर और आंतों को नुकसान पहुंचाता है। यह बच्चों और बुजुर्गों के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। लंबे समय तक इस तरह के खाद्य उत्पादों का सेवन गंभीर रोगों की वजह बन सकता है।

निष्कर्ष

रायपुर में नकली पनीर का यह नेटवर्क सिर्फ स्वास्थ्य नहीं, बल्कि पूरे खाद्य आपूर्ति तंत्र के लिए खतरा बन चुका है। खाद्य विभाग की कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन जब तक दोषियों पर कठोर सजा नहीं दी जाती और जनभागीदारी नहीं बढ़ती, तब तक इस मिलावटखोरी को पूरी तरह खत्म करना मुश्किल है।

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Author: THE CG NEWS

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