सावन का अंतिम सोमवार: भूतेश्वर नाथ मंदिर में आस्था का सैलाब, सुबह 4 बजे से श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक; यहां हर साल बढ़ता है शिवलिंग

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सावन मास का अंतिम सोमवार धार्मिक आस्था और भक्ति भाव से सराबोर रहा। देशभर के शिवालयों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी, लेकिन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध भूतेश्वर नाथ मंदिर। यहां हजारों श्रद्धालु सुबह 4 बजे से ही जलाभिषेक के लिए पहुंचने लगे। ‘दक्षिण का काशी’ कहलाने वाले इस प्राचीन मंदिर में सावन के आखिरी सोमवार पर दूर-दराज से आए भक्तों का तांता लगा रहा।

सुबह से ही लगी लंबी कतारें

भूतेश्वर नाथ मंदिर परिसर में तड़के से ही भक्तों की आवाजाही शुरू हो गई थी। कई श्रद्धालु रविवार रात से ही मंदिर परिसर और आस-पास के क्षेत्रों में ठहरे हुए थे, ताकि वे सुबह सबसे पहले बाबा भूतेश्वर नाथ का जलाभिषेक कर सकें। शिव भक्त गंगा जल, नर्मदा जल, दूध, बेलपत्र, भस्म और फूल-मालाएं लेकर लंबी कतारों में खड़े दिखाई दिए। मंदिर प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की थी, जिसमें बैरिकेडिंग, पेयजल और चिकित्सा सुविधाएं शामिल थीं।

हर साल बढ़ने वाला शिवलिंग

भूतेश्वर नाथ मंदिर की सबसे अनोखी और श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य कारण है यहां स्थित विशाल शिवलिंग, जिसके बारे में मान्यता है कि इसका आकार हर साल थोड़ा-थोड़ा बढ़ता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसे प्राकृतिक चट्टान का विस्तार माना जाता है, लेकिन भक्तों के लिए यह महादेव की अलौकिक शक्ति का प्रतीक है। स्थानीय पुजारियों के अनुसार, वर्षों से इस शिवलिंग का आकार बदलते हुए देखा गया है, जिसे लोग बाबा की दिव्य लीला मानते हैं।

सावन मास का धार्मिक महत्व

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय निकले विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया था, जिससे उनका कंठ नील हो गया और वे नीलकंठ कहलाए। इसीलिए सावन मास में शिव की विशेष पूजा और जलाभिषेक का महत्व बढ़ जाता है। अंतिम सोमवार को शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है और भक्त अपने मनोकामना पूर्ति के लिए व्रत रखते हैं।

भक्ति में डूबा माहौल

आज भूतेश्वर नाथ मंदिर में माहौल पूरी तरह भक्ति में रंगा हुआ था। मंदिर परिसर में हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारे गूंज रहे थे। ढोल-ढमाकों, शंख और घंटियों की ध्वनि से वातावरण शिवमय हो गया। भक्त जलाभिषेक के बाद प्रसाद वितरण और भजन-कीर्तन में शामिल हो रहे थे। कई श्रद्धालु पैदल और कांवड़ यात्रा कर यहां पहुंचे थे, जो रास्ते भर ‘जय शिव शंकर’ का जाप करते आए।

स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था

भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने पुलिस बल और स्वयंसेवकों को तैनात किया था। मंदिर परिसर में CCTV कैमरे लगाए गए थे और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास मार्ग बनाए गए। स्वास्थ्य विभाग की टीम भी मौके पर मौजूद रही ताकि किसी आपात स्थिति में तुरंत मदद की जा सके।

श्रद्धालुओं की आस्था और अनुभव

दूर-दराज से आए भक्तों ने भूतेश्वर नाथ के दर्शन को जीवन का सौभाग्य बताया। उत्तर प्रदेश से आए एक श्रद्धालु ने कहा, “सावन के अंतिम सोमवार को बाबा के दर्शन करना मेरे लिए बेहद पवित्र अवसर है। यहां आकर आत्मिक शांति मिलती है।” वहीं स्थानीय भक्तों का कहना था कि सावन का यह दिन साल भर का सबसे बड़ा धार्मिक पर्व है और बाबा का जलाभिषेक कर जीवन में नई ऊर्जा मिलती है।

सावन का यह अंतिम सोमवार इस बार विशेष रहा, क्योंकि श्रद्धालुओं की संख्या पिछले सालों के मुकाबले अधिक थी और मंदिर परिसर में आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। भूतेश्वर नाथ मंदिर में आज का दिन भक्तों के लिए भक्ति, श्रद्धा और आनंद से भरपूर रहा, जो उनकी स्मृतियों में लंबे समय तक रहेगा।

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Author: THE CG NEWS

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