
देश में शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांतिकारी पहल की जा रही है। अब छात्रों के लिए पारंपरिक क्लासरूम सेटअप यानी आगे की बेंच पर होनहार और पीछे की बेंच पर कमजोर छात्रों का जमावड़ा बीते ज़माने की बात बनने जा रही है। इस बदलाव की शुरुआत की है केरल राज्य ने, जहां अब स्कूलों में ‘सर्कुलर सीटिंग अरेंजमेंट’ को अपनाया जा रहा है। इस नई व्यवस्था के तहत कक्षा में अब छात्र गोल घेरों या समूहों में बैठेंगे, जिससे न केवल शिक्षक की पहुंच हर छात्र तक समान रूप से होगी बल्कि छात्रों में सहभागिता, सहयोग और संवाद का भी स्तर बढ़ेगा।
क्या है नई बैठने की व्यवस्था?
केरल सरकार की इस पहल के तहत पारंपरिक पंक्तियों वाली बेंच की जगह अब कक्षा में छात्र अर्धवृत्त या पूर्णवृत्त में बैठेंगे। यह व्यवस्था शिक्षण को एकतरफा लेक्चर से निकालकर संवादात्मक और सहभागी बनाएगी। अध्यापक अब केवल आगे की कतारों पर ध्यान केंद्रित नहीं करेंगे, बल्कि हर छात्र के साथ आँखों में आँखें डालकर संवाद कर पाएंगे। छात्रों को समूह में कार्य करने, आपसी चर्चा और टीमवर्क का अवसर मिलेगा। इससे एक ओर जहां शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आएगा, वहीं दूसरी ओर छात्रों का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।
पीछे की बेंच संस्कृति का अंत
भारत के स्कूलों में लंबे समय से यह धारणा रही है कि जो छात्र पढ़ाई में अच्छे होते हैं, वे आगे बैठते हैं और जो कमजोर होते हैं, वे पीछे। यह व्यवस्था छात्र के आत्मसम्मान पर असर डालती है और उनमें हीन भावना पैदा कर सकती है। नई प्रणाली में हर छात्र को बराबरी का अवसर मिलेगा और कोई भी ‘बैकबेंचर’ की छवि से नहीं पहचाना जाएगा। यह कदम शिक्षा में मानसिक और सामाजिक समानता को भी बढ़ावा देगा।
सरकार का उद्देश्य और तैयारी
केरल सरकार ने इस योजना को फिलहाल प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया है। सरकार का कहना है कि आने वाले समय में सभी सरकारी और निजी स्कूलों में इस मॉडल को अपनाया जाएगा। इसके लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, कक्षाओं की भौतिक बनावट को बदला जा रहा है और छात्रों के मनोविज्ञान को समझकर नई पद्धतियों को लागू किया जा रहा है।
शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने कहा, “हम छात्रों के समग्र विकास की दिशा में कार्य कर रहे हैं। बैठने की नई व्यवस्था न केवल शैक्षणिक विकास में मदद करेगी बल्कि छात्रों को सामाजिक रूप से भी बेहतर बनाएगी। अब हर छात्र के पास खुद को अभिव्यक्त करने का अवसर होगा।”
विशेषज्ञों की राय
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव है। शिक्षाशास्त्री प्रो. मेघा नायर कहती हैं, “पारंपरिक बैठने की व्यवस्था ने छात्रों के बीच भेदभाव को जन्म दिया है। नई प्रणाली छात्रों को समान स्तर पर लाने का प्रयास है। इससे छात्र सक्रिय रूप से क्लास में भाग लेंगे और उनका ध्यान केंद्रित रहेगा।”
भविष्य की ओर एक कदम
सिर्फ केरल ही नहीं, देश के अन्य राज्य भी इस पहल से प्रेरित होकर अपने-अपने स्कूलों में इसे लागू करने की दिशा में विचार कर रहे हैं। नई शिक्षा नीति 2020 में भी छात्र-केंद्रित और संवादात्मक शिक्षा पद्धति पर ज़ोर दिया गया है, जिसमें इस तरह की संरचनाएं फिट बैठती हैं। यदि इस मॉडल को राष्ट्रव्यापी रूप में लागू किया गया तो यह भारत की शिक्षा प्रणाली को एक नई दिशा दे सकता है।
निष्कर्ष
पारंपरिक क्लासरूम सिस्टम को बदलने की यह पहल छात्रों के विकास, आत्म-सम्मान और शिक्षा की गुणवत्ता में व्यापक सुधार ला सकती है। यह बदलाव न सिर्फ बैठने के तरीके तक सीमित रहेगा, बल्कि सोच, संवाद और सीखने के दृष्टिकोण को भी प्रभावित करेगा। यदि यह प्रयोग सफल रहा, तो आने वाले वर्षों में पूरे देश में क्लासरूम की तस्वीर ही बदल जाएगी — जहां कोई ‘बैकबेंचर’ नहीं होगा, बल्कि हर बच्चा शिक्षा के केंद्र में होगा।
Author: THE CG NEWS
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