सीबीएसई ने कक्षा 9वीं में ओपन बुक असेसमेंट को दी हरी झंडी, अगले सत्र से लागू होगी नई प्रणाली

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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने शिक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए कक्षा 9वीं के विद्यार्थियों के लिए ओपन बुक असेसमेंट (Open Book Assessment) को मंजूरी दे दी है। यह नई प्रणाली अगले शैक्षणिक सत्र से लागू होगी और इसका मुख्य उद्देश्य रटने की बजाय समझ एवं विश्लेषण पर जोर देना है। इस फैसले को शिक्षा विशेषज्ञों द्वारा एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, जिससे छात्रों में अवधारणा आधारित अध्ययन को बढ़ावा मिलेगा।

रटने की संस्कृति से छुटकारा

सीबीएसई के इस निर्णय का मकसद विद्यार्थियों को किताबों के पन्ने याद करने की बाध्यता से बाहर निकालना है। अब छात्र परीक्षा के दौरान किताब, नोट्स या अनुमोदित अध्ययन सामग्री का उपयोग कर सकेंगे। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को प्रश्नों के उत्तर सोच-समझकर लिखने और विषय की गहराई में जाने का मौका मिलेगा। बोर्ड का मानना है कि यह तरीका न केवल उनकी सोचने-समझने की क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि उन्हें वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान में भी मदद करेगा।

अगले सत्र से होगा लागू

सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि यह प्रणाली आगामी शैक्षणिक सत्र 2025-26 से कक्षा 9वीं में लागू होगी। शुरूआत में इसे कुछ विषयों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जाएगा और इसके परिणामों के आधार पर भविष्य में अन्य कक्षाओं में भी विस्तार किया जा सकता है। शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे ताकि वे छात्रों को ओपन बुक परीक्षा के पैटर्न के अनुरूप तैयार कर सकें।

कैसे होंगे प्रश्न और मूल्यांकन

ओपन बुक असेसमेंट में प्रश्न पत्र इस तरह से तैयार किए जाएंगे कि केवल रटकर उत्तर देना संभव न हो। इसमें केस स्टडी, परिस्थिति-आधारित प्रश्न और विश्लेषणात्मक सवाल शामिल होंगे, जिनके लिए विद्यार्थियों को विषय की गहरी समझ आवश्यक होगी। मूल्यांकन में भी इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि छात्र ने उत्तर में अपने विचार, तर्क और उचित उदाहरणों का इस्तेमाल किया है या नहीं।

शिक्षा जगत की प्रतिक्रिया

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारतीय शिक्षा व्यवस्था में एक अहम बदलाव साबित हो सकता है। दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ प्रोफेसर का कहना है कि “यह बदलाव छात्रों को किताबों को समझने, जानकारी को लागू करने और आलोचनात्मक सोच विकसित करने के लिए प्रेरित करेगा। हालांकि, इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि शिक्षक और छात्र इस नए पैटर्न को कितनी गंभीरता से अपनाते हैं।”

विद्यार्थियों के लिए फायदे

ओपन बुक परीक्षा से छात्रों का दबाव कम होगा और उन्हें विषय की वास्तविक समझ विकसित करने का अवसर मिलेगा। यह पद्धति उन्हें प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं और भविष्य के पेशेवर जीवन के लिए भी बेहतर तरीके से तैयार करेगी, क्योंकि यहां केवल जानकारी याद रखना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि जानकारी को सही संदर्भ में लागू करना भी जरूरी होगा।

भविष्य की दिशा

सीबीएसई का यह कदम शिक्षा में नवाचार और सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयोग है। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में इसे अन्य बोर्डों और कक्षाओं में भी लागू किया जा सकता है। यह बदलाव न केवल परीक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाएगा, बल्कि छात्रों के सर्वांगीण विकास में भी सहायक होगा।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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