
भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाने वाली कजरी तीज 2025 इस बार 12 अगस्त को है। यह पर्व मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना के लिए मनाया जाता है। कजरी तीज व्रत का धार्मिक महत्व अत्यंत गहरा है और इसे हिंदू धर्म में विशेष स्थान प्राप्त है। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से लेकर रात्रि तक कड़वी सब्जियों का सेवन करती हैं और व्रत रखती हैं।
कजरी तीज का धार्मिक महत्व
कजरी तीज को ‘हरियाली तीज’ भी कहा जाता है, क्योंकि यह त्यौहार सावन महीने की हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता के साथ जुड़ा हुआ है। कजरी तीज पर महिलाएं व्रत रखकर अपने पति की लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत से पति पर संकट से बचाव होता है और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
इसके अलावा, यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। महिलाएं अपनी शादीशुदा जिंदगी में सुख-समृद्धि और वैवाहिक स्थिरता के लिए देवी पार्वती की पूजा करती हैं। कहा जाता है कि इस दिन देवी पार्वती ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को प्राप्त किया था। इसलिए कजरी तीज का व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है।
कजरी तीज व्रत कैसे रखा जाता है?
कजरी तीज का व्रत निर्जल या फलाहारी (फल, दूध, मीठा आदि) रूप में रखा जाता है। महिलाएं सूर्योदय से पहले स्नान करती हैं और पारंपरिक पोशाक पहनकर पूजा करती हैं। घर में मंडप बनाकर या मंदिर में जाकर भगवान शिव-परिवार की पूजा की जाती है।
व्रत के दौरान महिलाएं कड़वी सब्जियां जैसे करेला, तीतरी भाजी आदि खाती हैं और मीठे से परहेज करती हैं। शाम को श्रृंगार कर महिलाएं पारंपरिक गीत गाती हैं, जिन्हें ‘कजरी गीत’ कहा जाता है। यह गीत सावन की हरियाली और पति की भलाई के लिए होते हैं।
कजरी तीज का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
•पूजा प्रारंभ का समय: सुबह 6:30 बजे से
•पूजा समाप्ति समय: रात्रि 9:30 बजे तक
•शुभ मुहूर्त: प्रातः 7:00 बजे से 9:00 बजे तक सबसे उत्तम माना जाता है।
पूजा में महिलाएं अपने पति के नाम से जल अर्पित करती हैं और भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश और हनुमान की विधिपूर्वक पूजा करती हैं। इसके बाद कड़वी सब्जियों का सेवन कर व्रत का पालन किया जाता है।
कजरी तीज का सामाजिक और सांस्कृतिक पहलू
कजरी तीज का उत्सव केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से भी महिलाओं को जोड़ने वाला पर्व है। महिलाएं एक-दूसरे के घर जाकर मिलती-जुलती हैं, तीज गीत गाती हैं, और अपनी भावनाओं को साझा करती हैं। यह पर्व नारी शक्ति और वैवाहिक संबंधों की मजबूती का प्रतीक भी है।
उत्तर भारत के कई हिस्सों में, विशेषकर बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में कजरी तीज बड़े उत्साह से मनाई जाती है। यहां महिलाएं पारंपरिक पोशाकों में सज-धज कर अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोती हैं।
कजरी तीज 2025 के अवसर पर विशेष
इस वर्ष 2025 में कजरी तीज का पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जा रहा है। यह व्रत पति की लंबी आयु और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति लाने का शुभ अवसर है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस दिन किए गए व्रत से न केवल दांपत्य जीवन में सौहार्द बढ़ता है, बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा भी आती है।
इसके अतिरिक्त, कजरी तीज के दिन व्रत रखने वाली महिलाओं को परिवार में सम्मान और आशीर्वाद मिलता है। इसलिए हर शादीशुदा महिला के लिए यह व्रत रखना अत्यंत लाभकारी माना गया है।
निष्कर्ष
कजरी तीज न केवल एक धार्मिक व्रत है, बल्कि यह पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और समर्पण को भी दर्शाता है। आज के आधुनिक समय में जहां रिश्तों में उतार-चढ़ाव आ रहे हैं, ऐसे में इस पर्व का महत्व और भी बढ़ जाता है।
12 अगस्त 2025 को आने वाली इस कजरी तीज पर हर महिला को चाहिए कि वे व्रत का पालन श्रद्धा और विश्वास के साथ करें और अपने वैवाहिक जीवन को खुशहाल बनाएं।
आपका जीवन प्रेम, खुशहाली और स्वास्थ्य से भरा रहे — यही कजरी तीज का सच्चा संदेश है।
Author: THE CG NEWS
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