भारत में रेटिनल विकार: बढ़ता दृष्टिहानि का खतरा, विशेषज्ञों ने दी तुरंत कार्रवाई की सलाह

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भारत, जिसे “दुनिया की डायबिटीज राजधानी” कहा जाता है, वहां रेटिनल विकार—विशेष रूप से डायबिटिक रेटिनोपैथी (DR)—जल्द ही एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। हाल ही में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि दृश्य हानि की यह बढ़ती दर अवश्यम्भावी नहीं, बल्कि रोकने योग्य है, लेकिन इसके लिए जागरूकता, स्कैनिंग और उपचार तक पहुंच को तत्काल बढ़ाने की आवश्यकता है।

स्थिति की भयावस्था और दरें

DR जैसी समस्याएं रेटिना पर असर डालकर दृष्टि को अक्षम कर देती हैं, और अक्सर यह उत्पादक आयु में ही शुरू हो जाती हैं। दिलचस्प तथ्य यह है कि लगभग 90% मधुमेही मरीजों ने कभी रेटिनल जांच नहीं कराई, और ज्यादातर तब सहायता लेने आते हैं जब दृष्टि की हानि अपरिवर्तनीय होती है।

मिशन विज़न: एक पहल की शुरुआत

जुलाई 2025 में, Vitreo Retina Society of India (VRSI) और Times of India, Roche के समर्थन से एक सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल—“Mission Vision”—की शुरुआत की गई। इस योजना के तहत VIEW (Vision Improvement Experts Working) Council नामक एक मल्टी-स्टेकहोल्डर टास्क फोर्स गठित किया गया, जिसका उद्देश्य DR को राष्ट्रीय महत्व देने हेतु एक कार्ययोजना तैयार करना है।

चार स्तंभों पर आधारित रणनीतियाँ

इस पहल में चार प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान दिया जा रहा है:

1.जन जागरूकता (Public Awareness): पल्प पोलियो जैसे राष्ट्रीय अभियान की तर्ज़ पर जागरूकता बढ़ाने की योजना बनी है, ताकि लोग समय रहते जांच करवाएँ।

2.स्क्रीनिंग और डायग्नोसिस (Screening & Diagnosis): प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs), दवाखानों, ऑप्टोमेट्रिस्ट्स और ASHA कार्यकर्ताओं को जोड़कर व्यापक जांच नेटवर्क स्थापित करने की बात कही गई है।

3.क्षमता निर्माण (Capacity Building): विशेषज्ञों की कमी और इलाज तक पहुंच में अड़चनों को दूर करने के लिए कार्यकर्ता प्रशिक्षण और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना शामिल है।

4.नीतिगत हस्तक्षेप (Policy Advocacy): DR स्क्रीनिंग को 2030 तक हर मधुमेही रोगी के लिए मौलिक अधिकार बनाने, तथा Ayushman Bharat जैसे स्वास्थ्य योजनाओं में रेटिना उपचार साधनों को शामिल करने कीforderung है।

अतिरिक्त दृष्टिकोण और सुझाव

DR को राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में प्राथमिकता:

Times of India द्वारा आयोजित राउंडटेबल में बताया गया कि DR screening को प्रत्येक मधुमेही को मिलने वाला मौलिक अधिकार बनाना चाहिए। इसके लिए Ayushman Bharat योजना के साथ इसे हर राज्य में उपलब्ध कराना जरूरी है।

– प्राथमिक केंद्रों में फंडस कैमरा: हेल्थ वर्कर्स को DR जांच योग्य बनाने हेतु प्राथमिक केंद्रों में fundus कैमरे और स्क्रीनिंग उपकरण को स्थापित करने पर जोर दिया गया है।

– डिजिटल ट्रैकिंग और स्मरण प्रणाली: स्मार्टफोन आधारित मासिक अलर्ट, डिजिटल हेल्थ ID या आधार से जुड़े रिमाइंडर सिस्टम लागू किए जाने की सिफारिश की गई है।

– दूरदराज़ क्षेत्रों हेतु टेली-ऑफ्थैल्मोलॉजी: दूरस्थ इलाकों में तकनिकी मदद के लिए Sankara Nethralaya और अन्य संस्थानों के माध्यम से टेली-आंख सेवा की मॉडल सफलता की मिसाल रही है जिन्होंने दूरस्थ स्क्रीनिंग को संभव बनाया है ।

निष्कर्ष: समय रहते चेतना और नीति-निर्माण की आवश्यकता

रेटिनल विकार, विशेषकर DR, केवल एक आंखों की बीमारी नहीं—यह सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी है। दृष्टि हानि का असर व्यक्ति की गुणवत्ता जीवन और उत्पादकता पर पड़ता है। लेकिन यह समस्या पूरी तरह रोकने योग्य है—यदि समय रहते जागरूकता, स्क्रीनिंग और उपचार को सुनिश्चित किया जाए।

Mission Vision जैसी पहल संकेत देती है कि विशेषज्ञ, मीडिया और उद्योग एक साथ मिलकर परिवर्तनीय समाधान खोज रहे हैं। अब वक्त है कि सरकार, चिकित्सीय संस्थान और नागरिक मिलकर इसे व्यापक रूप से लागू करें – क्योंकि देखना एक मौलिक अधिकार है, और इसे हर भारतीय का जन्मसिद्ध अधिकार बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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