बलरामपुर: हेडमास्टर ने कक्षा-2 की छात्रा को डंडे से पीटा, पैर टूटा; तीन दिन से अस्पताल में भर्ती, कार्रवाई नहीं

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छत्तीसगढ़ के बलरामपुर ज़िले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां एक सरकारी प्राथमिक स्कूल के हेडमास्टर पर आरोप है कि उन्होंने कक्षा-2 में पढ़ने वाली मासूम छात्रा को इतनी बुरी तरह पीटा कि उसके पैर में फ्रैक्चर हो गया। बच्ची पिछले तीन दिनों से अस्पताल में भर्ती है, लेकिन अब तक आरोपी शिक्षक के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं हुई है। इस घटना से स्थानीय लोगों और अभिभावकों में आक्रोश है।

डंडे से पिटाई के बाद अस्पताल पहुंची बच्ची

मामला बलरामपुर ज़िले के एक गांव के सरकारी स्कूल का है। जानकारी के अनुसार कक्षा-2 की छात्रा को हेडमास्टर ने अनुशासन सिखाने के नाम पर डंडे से पीट दिया। पिटाई इतनी ज़ोरदार थी कि बच्ची के पैर की हड्डी टूट गई। परिजनों ने उसे तुरंत अंबिकापुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां पिछले तीन दिनों से उसका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों ने बच्ची को आराम और लम्बे इलाज की सलाह दी है।

परिजन नाराज़, शिक्षक पर कार्रवाई की मांग

छात्रा के परिजनों ने घटना को गंभीर बताते हुए शिक्षा विभाग और प्रशासन से आरोपी शिक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। परिजनों का कहना है कि जिस जगह बच्चों को सुरक्षित माहौल में शिक्षा मिलनी चाहिए, वहां इस तरह की हिंसा अस्वीकार्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन ने भी इस घटना पर चुप्पी साध रखी है और किसी ने आकर बच्ची की हालत देखने की ज़रूरत तक नहीं समझी।

BEO बोले—शिकायत नहीं मिली

इस पूरे मामले पर जब ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) से सवाल किया गया तो उनका कहना था कि उन्हें अभी तक इस घटना की कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि परिजन शिकायत दर्ज कराते हैं तो विभाग स्तर पर जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, अभिभावक सवाल उठा रहे हैं कि बिना शिकायत के भी जब घटना सार्वजनिक हो चुकी है, तो विभाग को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए।

शिक्षा के मंदिर में हिंसा का सवाल

यह घटना एक बार फिर उस बड़े सवाल को खड़ा करती है कि क्या स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सचमुच सुनिश्चित है? शिक्षकों द्वारा शारीरिक दंड देने पर कानूनन रोक है, बावजूद इसके ग्रामीण इलाकों में आज भी अनुशासन के नाम पर बच्चों को पीटा जाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की घटनाएं न सिर्फ बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य पर असर डालती हैं बल्कि उनके मानसिक विकास पर भी गहरा घाव छोड़ती हैं।

प्रशासनिक कार्रवाई की मांग तेज

स्थानीय सामाजिक संगठनों और बाल संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि हेडमास्टर के खिलाफ तत्काल निलंबन की कार्रवाई होनी चाहिए और छात्रा को शिक्षा विभाग की ओर से मुआवजा व बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाना चाहिए। साथ ही, जिला प्रशासन को स्कूलों में नियमित निगरानी की व्यवस्था करनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।

निष्कर्ष

बलरामपुर की यह घटना शिक्षा प्रणाली की उस कमजोरी को उजागर करती है जहां शिक्षक, जिनके जिम्मे बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने की जिम्मेदारी है, वही हिंसा का कारण बन जाते हैं। बच्ची अस्पताल में दर्द से जूझ रही है और परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है। सवाल यह है कि शिक्षा विभाग और प्रशासन कब तक “शिकायत का इंतज़ार” करेगा और कब तक बच्चों की सुरक्षा सिर्फ कागज़ों पर लिखी नीतियों तक सीमित रहेगी।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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