
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाने वाली राधा अष्टमी के पर्व पर आज देशभर के मंदिरों में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रीकृष्ण की प्रियतमा और भक्ति की देवी मानी जाने वाली श्री राधा रानी का जन्मोत्सव वृंदावन और बरसाना में विशेष भव्यता के साथ मनाया गया। सुबह से ही लाखों श्रद्धालु मंदिरों में उमड़ पड़े और “राधे-राधे” के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
पूजा का शुभ मुहूर्त और तिथि
पंचांग के अनुसार, राधा अष्टमी की तिथि इस वर्ष 30 अगस्त की रात 10:46 बजे से आरंभ होकर 1 सितंबर की रात 12:57 बजे तक रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राधा अष्टमी का मुख्य पूजन 31 अगस्त 2025 (रविवार) को किया गया।
भक्तों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मध्याह्न पूजा का मुहूर्त सुबह 11:05 बजे से दोपहर 1:38 बजे तक रहा। इसी अवधि में मंदिरों में विशेष श्रृंगार, अभिषेक और आरती का आयोजन किया गया।
बरसाना में भव्य शोभायात्रा
बरसाना के राधा जन्मस्थान मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच राधा रानी का अभिषेक और श्रृंगार हुआ। इसके बाद नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई जिसमें रथ पर विराजमान राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं का दर्शन करने श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। शोभायात्रा के दौरान जगह-जगह फूलों की वर्षा की गई और भक्तों ने भजनों पर झूमकर राधा नाम का कीर्तन किया।
वृंदावन और मथुरा में गूंजे भजन
वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर और श्री राधा दामोदर मंदिर में आज सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। मंदिरों को फूलों से सजाया गया और भजन-कीर्तन से वातावरण राधामय हो गया। संत-महात्माओं ने प्रवचन देकर भक्तों को राधा-कृष्ण की महिमा बताई और कहा कि राधा जी भक्ति, प्रेम और समर्पण का सर्वोच्च प्रतीक हैं।
मथुरा के द्वारकाधीश मंदिर में भी विशेष आरती और संकीर्तन का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए।
देशभर में उत्सव का उल्लास
राधा अष्टमी का पर्व केवल बृज क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देशभर के मंदिरों में विशेष उत्सव मनाया गया। दिल्ली के इस्कॉन मंदिर, मुंबई के श्रीकृष्ण मंदिर, वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर और जयपुर के गोविंद देव मंदिर में भी भक्तों ने व्रत-पूजा कर राधा रानी से आशीर्वाद मांगा।
इस्कॉन मंदिरों में विशेष भक्ति संध्या और संकीर्तन का आयोजन किया गया। भक्तों ने भजनों की स्वर लहरियों पर नृत्य कर उत्सव को और भव्य बना दिया।
उपवास और भक्ति का महत्व
पौराणिक मान्यता है कि राधा अष्टमी पर उपवास और राधा-कृष्ण की उपासना करने से जीवन में प्रेम, शांति और सौहार्द की प्राप्ति होती है। कई भक्तों ने आज निर्जला उपवास रखा और मध्याह्न पूजा के बाद भोग और प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण किया। पंडितों का कहना है कि यह पर्व हमें निस्वार्थ प्रेम और भक्ति की राह पर चलने का संदेश देता है।
निष्कर्ष
राधा अष्टमी के इस अवसर पर देशभर में भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। बरसाना और वृंदावन में लाखों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया, जबकि अन्य शहरों के मंदिरों में भी राधा-कृष्ण भक्ति का उल्लास देखने को मिला। आज का यह पर्व हमें यह स्मरण कराता है कि राधा और कृष्ण का नाम एक-दूसरे के बिना अधूरा है और उनकी भक्ति ही सच्चे प्रेम का प्रतीक है।
Author: THE CG NEWS
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